सरिता विशेष
‘‘तारे जमीं पर’ ’के लेखक और ‘‘स्टेनली का डिब्बा’’ तथा ‘‘हवा हवाई’’ जैसी सफलतम फिल्मों के लेखक व निर्देशक तथा ‘‘चिल्ड्रन फिल्म सोसायटी’’ के पूर्व चेअरमैन अमोल गुप्ते अब बाल फिल्म ‘‘स्निफ’’ का निर्माण, लेखन व निर्देशन कर रहे हैं, जो कि बच्चों की पहली रोमांचक फिल्म है.जो कि एक बाल जासूस की कहानी है, जिसके अंदर सूंघने की अद्भुत क्षमता है.
 
‘‘सरिता’’पत्रिका से बात करते हुए फिल्म ‘‘स्निफ’’ के लेखक व निर्देशक अमोल गुप्ते ने कहा-‘‘यह एक रोमांचक फिल्म है.भारत में अब तक किसी ने भी बच्चों के लिए रोमांचक जाॅनर पर काम नहीं किया है. मैं पहली बार प्रयास कर रहा हॅं. यह एक बाल जासूस की कहानी है. हमेन तमाम विदेशी लेखको की जासूसी की पुस्तकें, उपन्यास पढ़े हैं. हमारी फिल्म का बाल जासूस सॅूंघ कर सच जान जाता है. उसके अंदर सूंघने की ऐसी शक्ति है, जिसका कायल हर इंसान हो जाएगा. इसीलिए हमने फिल्म का नाम ‘स्निफ’ रखा है. हमारी पिछली फिल्मों की ही तरह इस फिल्म की अपील युनिवर्सल है और इसे बच्चों के साथ साथ उनके माता पिता भी देखना चाहेंगे. इतना ही नही हमने इस फिल्म में भी एक अहम संदेष दिया है कि आप अपने बच्चों को सम्मान देना कब शुरू करेंगे.’’
 
फिल्म ‘‘तारे जमीं पर’’ में दर्षिल सफारी ने अभिनय किया था, जबकि ‘स्टेनली का डिब्बा’और ‘हवा हवाई’ में अमोल गुप्ते ने अपने बेटे पार्थ गुप्ते को अभिनय करने का अवसर दिया था. पार्थ गुप्ते को सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार के राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया. मगर अब फिल्म ‘स्निफ’में अमोल गुप्ते ने अपने बेटे पार्थ गुप्ते की बजाय नए बाल कलाकार खुषमीत को अभिनय करने का मौका दिया है. इस पर अमोल गुुप्ते कहते हैं- ‘‘मैं कथानक व चरित्र के आधार पर कलाकार चुनता हूं. मेरा बेटा अच्छा कलाकार है. उसे राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है. मगर अब वह साढ़े पंद्रह वर्ष का हो गया है. जबकि ‘स्निफ’की कहानी एक आठ वर्ष के बालक की है. एक दिन जब मैं कुछ बच्चों के साथ वर्कशॉप कर रहा था, तो वहां पर खुषमीत अपनी मां के साथ आया था. वह बहुत ही ज्यादा इन्नोसेंट नजर आया. बुद्धिमान व सुलझाा हुआ लगा. तो मैने उसे अपनी फिल्म ‘स्निफ’का हीरो बना दिया. अब जब हम उसके साथ शूटिंग कर रहे हैं , तो उसकी परफार्मेंस से मैं भी चकित हो रहा हूं.’’