सरिता विशेष

करण जोहर हवा में उड़ रहे हैं. करण जोहर को लग रहा है कि उन्होंने देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह से अपनी फिल्म के सुचारू रूप से प्रदर्शन की हरी झंडी ले चुके हैं. उन्हे लग रहा है कि उन्होने महाराष्ट् के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस और महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे के संग बैठक कर अपनी फिल्म के प्रदर्शन के लिए रास्ता साफ कर लिया है. इसलिए अब उन्हे काहे का डर..मगर बौलीवुड के सूत्रों की माने तो अभी भी करण जोहर की फिल्म ‘‘ऐ दिल है मुश्किल’’ के प्रदर्शन और फिल्म की सफलता को लेकर मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं. यूं तो इसका ईशारा राज ठाकरे अपने बयान में भी कर चुके हैं. राज ठाकरे ने मीडिया से कहा था-‘‘मनसे फिल्म के रिलीज का विरोध नहीं करेगी. मगर लोग तो बहिष्कार करेंगे ही.’ करण जोहर को इसके मायने तलाशने होंगे.

करण जोहर ने जिस तरह से फिल्म इंडस्ट्री की एसोसिएशनों को दरकिनार करते हुए राजनेताओें के साथ बैठकें कर समझौते किए हैं, उससे फिल्म इंडस्ट्री के अंदर भी उनके खिलाफ एक माहौल बन गया है. आधे से ज्यादा बौलीवुड इस तरह के समझौते का विरोध कर रहा है. उधर भारतीय सेना भी खिलाफ है. कई पूर्व सैनिको ने बयान जारी कर कहा है कि सैनिकों के वेलफेअर फंड में किसी से जबरन वसूली वाला पांच करोड़ नहीं चाहिए.

उधर महाराष्ट्, गोवा, गुजरात व कर्नाटक इन चार राज्यों के सिंगल सिनेमा घर मालिको की एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन दातार ने करण जोहर पर फिल्म एक्जबीटरों के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगाते हुए ऐलान किया है कि उनकी एसोसिएशन करण की फिल्म को रिलीज नहीं करेगी. नितिन दातार का आरोप है कि करण जोहर अखबारों में विज्ञापन देकर भ्रम फैलाने के अलावा फिल्म एक्जबीटरों के साथ धोखाधड़ी कर रहे हैं कि उनकी फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ सिंगल थिएटर में रिलीज होगी. जबकि हकीकत यह है कि नितिन दातार की एसोसिएशन में 450 सदस्य हैं, जो कि फिल्म को रिलीज नही करेंगे, इसमें से सिर्फ 80 सिंगल थिएटर मुंबई में हैं.

इतना ही नही बौलीवुड के सूत्र दावा कर रहे हैं कि करण जोहर ने राजनीतिक हस्तियों के साथ मेल मिलाप कर लिया, मगर देश की आम जनता से सीधे बात करना उन्होंने जरूरी नहीं समझा. करण को देश की जनता की भावनाओं व संवेदनाओं को भी समझना होगा. अंततः राजनेता नहीं देश की जनता ही तय करेगी कि वह ‘ऐ दिल है मुश्किल’ देखना चाहती है या नहीं..यानी कि अभी भी ‘ऐ दिल है मुश्किल’ की राह आसान हुई है, ऐसा नहीं लगता..