सरिता विशेष

आनंद एल राय निर्देशित फिल्म ‘‘रांझणा’’ में एक राजनेता का किरदार निभाने के बाद अभय देओल हालिया प्रदर्शित फिल्म ‘‘हैप्पी भाग जाएगी’’ में भी लाहौर के बिलाल के किरदार में नजर आए, जिन्हे न चाहते हुए अपने पिता की इच्छा के आगे झुककर राजनेता बनना पड़ता है. ‘रांझणा’ में उनके किरदार का पैशन राजनीति थी, जबकि ‘हैप्पी भाग जाएगी’ में उनके किरदार का पैशन राजनीति नहीं है. ऐसे में निजी जीवन में वह राजनीति को लेकर क्या सोच रखते हैं, यह जानना कम दिलचस्प नहीं रहा.

हाल ही में अभय देओल से मुलाकात होने पर जब हमने उनसे जानना चाहा कि राजनीति को लेकर उनकी अपनी समझ क्या है? तो अभय देओल ने ‘‘सरिता’’ पत्रिका को बताया-‘‘सच कहूं तो मुझे राजनीति की कोई समझ नही है. राजनीति हो या व्यापार हो, हर चीज पैसे से संचालित होती हैं. यह दुर्भाग्य की बात है. पैसा ही मानवता को भी संचालित करती है. जबकि होना यह चाहिए कि मानवता को संचालित करना चाहिए कि क्या बिजनेस किया जाए और किस तरह की राजनीति विकसित हो? पर जो हालात हैं, वह सिर्फ भारत ही नही पूरे विश्व के हैं.

आज की तारीख में कोई भी इंसान देश या समाज में बदलाव लाने के लिए राजनीति का हिस्सा नहीं बनता. सभी सिर्फ पैसा कमाने के लिए राजनीति से जुड़ रहे हैं. पूरे विश्व का माहौल इतना गंदा हो गया है कि यदि आप राजनीति में रहते हुए भ्रष्टाचार से दूर रहना चाहते हैं, तो संभव नहीं हैं. राजनेता को भ्रष्ट होना ही पड़ता है.’’

जब हमने उनसे पूछा कि राजनीति में जो हालात हैं, उनसे उबरने का कोई रास्ता उन्हे नजर आता है? तो अभय देओल ने कहा-‘‘इसके लिए जरूरी है कि हर आम इंसान जागरूक हो और एकता के सूत्र में बंधे. हम जिन्हें सरकार कहते हैं, वह आते कहां से हैं? वह भी हमारे ही बीच से ही हैं. हम ही उन्हें वोट देकर चुनकर भेजते हैं. मुझे लगता है कि लोग वोट देते समय सिर्फ अपने बारे में सोचते हैं. जिस दिन लोग अपने बारे में सोचना छोड़कर दूसरों के बारे में, समाज व देश के बारे में सोचना शुरू करेंगे, उसी दिन वोट देने का उनका तरीका बदलेगा. तभी राजनीति में बदलाव आएगा. देखिए, बिना सरकार के तो देश चल नहीं सकता. इसके अलावा गीता मे कहा गया है कि हर इंसान को उसके कर्म के अनुसार ही सब कुछ मिलेगा. इसे हमें याद रखना चाहिए. ’’