देश की जनता कालेधन के नाम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ थी. तमाम तरह की परेशानियों के बाद भी वह उफ करने को तैयार नहीं थी. जनता को लग रहा था कि प्रधानमंत्री मोदी कालाधन रखने वालों के खिलाफ कड़े कदम उठायेंगे. एक बार फिर जनता के साथ धोखा हुआ. अब केन्द्र सरकार कालाधन रखने वाले के सब गुनाह माफ कर उनके कालेधन को सफेद करने की योजना ले आई है. मजेदार बात यह है कि एक बार फिर से कालेधन के सफेद होने से गरीब को लाभ पहुंचाने की बात की जा रही है.

केन्द्र सरकार ने कहा है कि आधा काला धन देकर कोई भी भ्रष्टाचारी अपने गुनाह से अर्जित धन को सफेद कर सकता है. गरीबों के गुस्से को कम करने के लिये केन्द्र सरकार ने उनको झुनझुना देते कहा है कि इस कालेधन से सरकार गरीबों का भला करने के लिये ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना’ यानि पीएमजीकेवाई शुरू करेगी. कालाधन से गरीबों का भला करने का यह पहला वादा नहीं है. इसके पहले भी चुनाव प्रचार में यह वादा किया गया था.

लोकसभा चुनाव के समय भारतीय जनता पार्टी ने कहा था कि केन्द्र में उनकी सरकार बनने के 100 दिन के अंदर ही विदेशो में जमा कालाधन देश के अंदर लाया जायेगा. इससे हर किसी के बैंक खाते में 15-15 लाख रूपया जमा होगा. कालेधन के खिलाफ 100 दिन में केन्द्र की मोदी सरकार ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे जनता को सीधे किसी तरह से लाभ हुआ हो.

8 नवम्बर को 500 और 1000 के नोट कालाधन के नाम पर बंद कर दिये गये.जिससे जनता को अपने ही पैसे बैंकों से निकालने में परेशानी का सामना करना पड रहा. एक तरफ केन्द्र सरकार ने कहा कि बडे नोट से कालाधन बढता है दूसरी तरफ 1000 की जगह 2000 का नोट जारी करती है? प्रधानमंत्री मोदी ने देश की जनता से वादा किया कि जनता 50 दिन सरकार का साथ थे इसके बाद सारे कालेधन वालो का पैसा रद्दी हो जायेगा.

50 दिन पूरे होने के पहले ही सरकार कालाधन रखने वालों के लिये योजना लेकर आ गई. जिससे वह अपने पूरे कालेधन का आधा हिस्सा सफेद कर सकते हैं. असल में कालाधन रखने वालों ने यह पैसा मेहनत से नही कमाया है. ऐसे में उनके लिये यह बहुत राहत की बात है. इस येाजना से साफ हो गया है कि सरकार मेहनतकश जनता को 50 दिन धैर्य रखने की बात करती है तो दूसरी तरफ बड़ा कालाधन रखने वालों को मुसीबत से बचाने के लिये योजना लेकर आती है. ऐसे में जनता को विपक्षी दलों का वह आरोप सही लगता है कि सरकार गरीब के नहीं अमीर के साथ है. भाजपा को यह पता है कि इस योजना से गरीब में गुस्सा आयेगा. इसलिये एक बार फिर गरीब को यह समझाने की कोशिश में है कि इस पैसे का उपयोग उसके कल्याण के लिये होगा.