सरिता विशेष

तारीफ और खूबसूरती का गुणगान कई बार खुद पर भारी पड जाता है. जिससे तारीफ करने वाले और जिसकी तारीफ की जा रही है, दोनों की स्थिति बहुत असहज हो जाती है. बिहार की सड़को की तुलना हेमा मालिनी से करने की बात बिहार के नेता लालू प्रसाद यादव को भारी पडी थी. उत्तर प्रदेश के एक नेता ने महिला डीएम की सुदंरता की तारीफ की, तो आलोचना का शिकार हो गये.

इस कडी में ताजा नाम लखनऊ के बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति पद्मश्री प्रोफेसर आरसी सोबती का जुड गयाहै. विश्वविद्यालय के 20वें स्थापना दिवस समारोह में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लेने लखनऊ आई थीं. केंद्रीय मंत्री की तारीफ में कुलपति प्रोफेसर आरसी सोबती ने एक कविता पढी. इस कविता में तुकबंदी करते हुये कुलपति साहब ने ‘महारानी’, ‘दीवानी’, ‘बलिदानी’ और ‘नूरानी’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया था. कविता की आखिरी लाइन ‘जिसकी बातों में है दम-खम, जिसका चेहरा नूरानी है’ थी.

केन्द्रीय मंत्री की तारीफ में मंच पर ‘दीवानी’ और ‘नूरानी’ जैसे शब्दों का प्रयोग विवाद का विषय बन गये. ऐसे शब्दों को अनुचित ठहराया जा रहा है. केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने खुद तो किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी, पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस मामले को संज्ञान में लिया है. जानकार लोग कहते है कि मंत्रालय इस मामलें को लेकर कडा रूख अपना सकता है. मीडिया में इस तरह की खबरों के आने के बाद खुद प्रोफेसर आरसी सोबती किसी तरह की बातचीत से बचते नजर आ रहे है. महिलासंगठनों ने कुलपति के ऐसे शब्दों को महिला विरोधी माना है. उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष जरीना उस्मानी कहती है ‘केन्द्रीय मंत्री को खुद इन शब्दों को संज्ञान में लेकर आपत्ति जतानी चाहिये थी. इस तरह की तारीफ करना किसी भी तरह से सम्मानजनक नहीं लगता है.’