सरिता विशेष

नरेंद्र मोदी की राजनीतिक किताब में किसी का स्वागत है तो किसी के लिए दरवाजे बंद हैं. अगर ऐसा लगने लगे कि कोई काम का नहीं रह गया, तो उनकी राजनीतिक किताब के मुताबिक़ उसे बलि का बकरा बनाया जा सकता है. लेकिन सवाल उठता है कि कैसे यह तय होगा कि कौन काम का नहीं रह गया?

धुर हिंदूवादी या हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा के पैरोकार मोदी जनभावनाओं को उभारने में अपनी पार्टी के किसी भी नेता से आगे माने जाते हैं. गुजरात का मुख्यमंत्री चयनित होने से पहले मोदी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक रहे और जिस समय देश के सर्वाधिक विकसित राज्य की उन्हें कमान सौंपी गई थी उस समय तक उन्हें कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं था.

लेकिन आज हम आपको मोदी की जो कहानी बताने जा रहे हैं, वो बेहद दिलचस्प है. एक ऐसी कहानी, जो अभी तक चर्चा में नही आ पाई. आप भी पढ़िए.

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