पुत्र और भाई के बीच पुल बने सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव का हर दांव फेल होता दिख रहा है. चुनाव के समय पार्टी दो राहे पर खड़ी है. कार्यकर्ता अपने अपने नेताओं के पक्ष में लामबंद खड़े हैं. जिससे नेताओं की आपसी खींचतान में पार्टी को नुकसान हो रहा है. मुलायम सिंह यादव ने 2017 के विधानसभा चुनाव के लिये सपा के 325 उम्मीदवारों के नामों की लिस्ट क्या जारी की सपा का विवाद फिर से खुलकर सामने आ गया.

चुनाव लड़ने वाले कुछ नामों पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव के बीच मतभेद हैं. मतभेद का कारण यह है कि मुलायम ने जिन उम्मीदवारों की सूची जारी की है उनमे कुछ नाम अखिलेश यादव को पंसद नहीं हैं. बताया जाता है कि उम्मीदवारों की एक लिस्ट अखिलेश यादव की तरफ से गई थी और एक शिवपाल यादव की तरफ से. मुलायम सिंह यादव ने जो उम्मीदवार घोषित किये उनमें शिवपाल गुट का पलटा भारी है.

असल में सपा में परिवार का विवाद पुराना है. फौरीतौर इस विवाद पर विराम लग चुका था. अब टिकट वितरण के समय एक बार फिर से विवाद खड़ा हो गया. मुलायम सिंह यादव दिल से पुत्र अखिलेश यादव के साथ हैं. वह उपरी तौर पर भाई शिवपाल यादव के साथ दिखते हैं. शिवपाल और अखिलेश के बीच संबंधों को सहज करने के लिये मुलायम का हर दांव काम नही आ रहा. अधिकार की लड़ाई में दोनो समयसमय पर एक दूसरे के सामने आ जाते हैं.

धीरेधीरे पार्टी और परिवार दोनो ही जगहों पर अखिलेश ने अपनी ताकत बढ़ा ली है. यही कारण है कि पिछले विवाद को हल करने के समय अखिलेश ने जो भी फैसला लिया था वह कायम रहा. शिवपाल के पक्ष में कोई फैसला नहीं आ सका. टिकट वितरण में मुलायम ने शिवपाल को तवज्जो देने की कोशिश की तो अखिलेश फिर सामने आ गये. पार्टी में परिवार के बीच का झगड़ा कितना ही सुलझा हुआ दिखे पर तकरार का प्रभाव पार्टी में कार्यकर्ता स्तर तक पहुंच गया है. जिसका नुकसान पार्टी को चुनाव के मैदान में होगा.

मुलायम एक तरफ अखिलेश की साफ छवि को लेकर चुनाव मैदान में जाना चाहते हैं तो दूसरी तरफ वह शिवपाल के उन समर्थकों को भी साथ रखना चाहते हैं जो धन और बाहुबल से चुनाव जीतने की कला में माहिर हैं. दोनों के बीच संतुलन तब तक बन सकता था जब तक अखिलेश और शिवपाल एक साथ रहते. अब दोनों के आमने सामने आने से यह संतुलन मुश्किल हो गया है. ऐसे में लग नहीं रहा कि सपा पूरी ताकत से चुनाव लड़ पायेगी.