सरिता विशेष

मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव अगले साल हैं. वहां के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अभी से चुनावी प्रचार सा करने लगे हैं. उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह चौहान चुनावी प्रचार के लिये औरया में जनसभा करने के बाद राजधानी लखनऊ में मीडिया से मिलने आये तो उत्तर प्रदेश से ज्यादा मध्य प्रदेश के गुणगान गाते नजर आये. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जो पार्टी का घोषणापत्र है मध्य प्रदेश में पहले से लागू है. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश से विकास के मामले में बहुत आगे है.

केन्द्र सरकार ने बुन्देलखंड को ले कर जो पैकेज दिया उसको लेकर उत्तर प्रदेश में काम ही नहीं शुरू हुआ. मध्यप्रदेश में 99 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. खेती को लेकर मध्य प्रदेश में दी जाने वाली सुविधाओं को विस्तार से बताया. मध्य प्रदेश में बढ़े हुये अपराध पर सफाई देते शिवराज सिंह चौहान ने कहा मध्य प्रदेश में अपराधों पर रिपोर्ट औन लाइन दर्ज होते हैं इसलिये आंकड़े ज्यादा दिखते है. यूपी में अपराध अधिक है पर यहां रिपोर्ट ही दर्ज नहीं होते है. भाजपा की सरकार बनने के बाद यूपी में भी विकास का रथ मध्य प्रदेश की तरह दौडेगा.’

शिवराज सिंह चौहान की परेशानी यह है कि अगले साल वहां पर विधानसभा के चुनाव हैं. मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा लगी हुई है. मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस की सीधी टक्कर है. अगर कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में सत्ता हासिल होगी, तो मध्य प्रदेश कर राजनीति पर उसका प्रभाव पड़ेगा.

मध्य प्रदेश में लंबे समय से भाजपा की सरकार है. पार्टी पर पूरी तरह से शिवराज सिंह चौहान का कब्जा है. शिवराज सिंह चौहान ने भाजपा में किसी को नम्बर दो के नेता की हैसियत बनाने नहीं दी है. मध्य प्रदेश में व्यापम घोटाले को लेकर शिवराज सरकार की बहुत किरकिरी हो चुकी है. लोकसभा चुनाव के बाद केन्द्र सरकार की धूमिल होती छवि और प्रदेश सरकार पर व्यापम की छाया मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के लिये मुसीबत बन सकती है. ऐेसे में शिवराज सिंह चौहान उत्तर प्रदेश के लोगों को मध्य प्रदेश के अच्छे दिनो का हवाला दे रहे हैं.

मध्य प्रदेश की सीमा से लगा उत्तर प्रदेश का बुन्देलखंड इलाका इस सच को देखता और परखता है. सीमा के करीब उसे दोनों में कोई बहुत फर्क नहीं दिखता. अब शिवराज सिंह चौहान अपने काम काज का प्रचार करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते. यही वजह है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में हर सवाल के जवाब में वह मध्य प्रदेश से तुलना करने लगते थे. शिवराज सिंह चौहान मंझे हुये पुराने नेता हैं. प्रचार के हर मौके का लाभ उठाना चाहते हैं.