सरिता विशेष

समाजवादी लोग आपस में लड़ते हैं दूसरो को नहीं लड़ाते’. बिहार के नेता लालू प्रसाद यादव ने यह बात समाजवादी पार्टी के 25 वें स्थापना दिवस के मौके पर लखनऊ में कही. लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में सपा के स्थापना दिवस में बड़े नेताओं ने मुलायम परिवार के बीच चले विवाद में सुलह कराई. लालू प्रसाद यादव का यह बयान उसी संदर्भ में था.

स्थापना दिवस के समारोह में लालू प्रसाद ने अखिलेश यादव को चाचा शिवपाल यादव के पैर छूने को कहा तो मुलायम के जन्मदिन पर लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस हाइवे के उद्घाटन समारोह में प्रोफेसर रामगोपाल यादव के पैर छू कर शिवपाल यादव ने परिवार में विवाद के पूर्ण विराम का एलान कर दिया. मंच पर जुटे सपा के नेताओं ने तलवार लहराकर एकता का एलान कर कहा कि अब वह एकजुट होकर विरोधियों से लड़ेंगे.

असल में सपा का विवाद खत्म होने के अवसर के बाद भी सब कुछ पहले जैसा नहीं हो पाया है. विवाद के पहले शिवपाल यादव अखिलेश मंत्रिमंडल के सबसे ताकतवर मंत्री होते थे अब वह नहीं हैं.

एक कार्यक्रम के अवसर पर खुद शिवपाल यादव ने कहा कि लोग कुर्सी के साथ होते थे. शिवपाल इस बात का जिक्र कर रहे थे कि उनके मंत्रीपद से हटने के बाद अब अफसर उनके पास नहीं दिखते. असल में परिवार के विवाद में सबसे अधिक नुकसान शिवपाल यादव को ही उठाना पड़ा है. वह मंत्री पद से हटे हैं. पार्टी में भी वह कमजोर पड़े हैं. प्रोफेसर रामगोपाल की पार्टी में वापसी के साथ मुलायम ने उन नेताओं को भी पार्टी में वापस लाने के संकेत दे दिये हैं जिनको शिवपाल ने हटाया था.

शिवपाल ने खुद किसी भी तरह के बयानों से खुद को अलग रखा है. पार्टी में वह सपा मुखिया मुलायम की रबर स्टैंप बन कर रह गये हैं. मुलायम ने जिस तरह से बाकी लोगों की बातों को तवज्जों दी उस तरह से शिवपाल का वापस अखिलेश मंत्रिमंडल में सम्मानजनक जगह नहीं दिला सके.ऐसे में शिवपाल को अपनी ताकत का अहसास हो चुका है. अघोषित तौर पर सपा में यह साफ हो चुका है कि पार्टी अखिलेश के चेहरे के साथ ही चुनाव लड़ेगी. चुनाव के बाद अखिलेश ही पार्टी के मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे. इस बात से किसी का कोई विरोध नहीं है.

राजनीति में विरोध हमेशा ताकत के साथ किया जाता है. ऐसे में हर दांव सही ताकत मिलने के बाद ही चला जाता है. सपा ने जिन तलवारों को लहराकर विरोधियों को डराने का काम किया है यह तलवारें आपस में न खिच जाये इस बात का ख्याल रखना पड़ेगा. जिससे लालू की बात एक बार फिर सही साबित हो जाये कि समाजवादी लोग आपस में लड़ते हैं दूसरो को नहीं लड़ाते’.