न्यायलय से लेकर विधानसभा के अंदर बहुमत साबित करने तक उत्तराखंड में हरीश रावत सरकार भले ही जंग जीत गई हो पर उसकी मुसीबतें कम न होगी. स्टिंग आपरेशन में सीबीआई जांच और कांग्रेस के बागी विधायको का मसला अभी चल रहा है. अगर बागी विधायको के पक्ष में फैसला जाता है और उनकी अयोग्यता रदद हो जाती है तो रावत सरकार को फिर से बहुमत साबित करना होगा. जिससे साफ हो रहा है कि नई विधानसभा के पहले के बचे समय में रावत सरकार विकास के कामों पर ध्यान देने की जगह पर अपनी सरकार को बचाने के दांवपेंच से उलझी रहेगी. बागी विधायको की सुनवाई 12 जुलाई को होगी. इसके अलावा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत को स्टिंग आपरेशन प्रकरण में सीबीआई जांच का सामना करना पड़ सकता है. राजनीतिक जानकार कहतें है कि भाजपा ने जिस तरह से उत्तराखंड की लड़ाई में अपनी शाख गंवाई है उसके बाद वह रावत सरकार के खिलाफ आक्रामक रूख रखेगी. ऐसे में रावत सरकार के लिये आने वाले दिन कठिन होगे.

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने अदालत के फैसले के बाद बहुत ही नरम स्वर में अपनी बात रखी जिससे लगा कि वह अब इस मामले आगे किसी भी तरह के विवाद से बचना चाहते है. यह बात और है कि दिल्ली में कांग्रेस ने केन्द्र सरकार पर अपना हमला जारी रखा है. उत्तराखंड मसले पर कांग्रेस केद्र सरकार को घेर कर अपने खिलाफ लड़ाई को कमजोर करना चाह रही है. केन्द्र सरकार भी इस फजीहत पर बुरी तरह से खफा है. भारत के लोकतंत्र की यह पहली घटना है जहां पर केन्द्र सरकार को इतनी बुरी तरह से अपने कदम वापस खीचने पडे हो. उत्तराखंड पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जिस तरह से लोकसभा में वित्तमंत्री अरूण जेटली ने जीएसटी बिल पर चर्चा करते समय अदालतों के दखल की आलोचना की उससे साफ लग रहा था कि केन्द्र सरकार की सोंच क्या है ?

वित्त मंत्री ने तो वैसे यह बातें वित विधेयक पर चर्चा का जवाब देते कही. अरूण जेटली ने कहा कि अब सरकार के पास बजट बनाने और टैक्स लेने जैसे काम ही रह जायेगे. अरूण जेटली ने कहा कि राजनीति समस्याओ का समाधान न्यायपालिका को नहीं करना चाहिये. सरकारी काम में न्यायपालिका के दखल पर वित्तमंत्री के बयान को उत्तराखंड की लड़ाई से भी जोड़कर देखा जा सकता है. ऐसे में हरीश रावत के लिये आने वाले दिन चुनौतियों भरे होगे. केन्द्र सरकार से जिस सहयोग की आपेक्षा वह कर रहे है उसका मिलना मुश्किल है. उत्तराखंड में भाजपा खुद कई गुटों में बंटी है. हरीश रावत के लिये बेहतर विकल्प होगा कि वह नये चुनावों में जाये. बहुमत की सरकार बनाये जिससे वह उत्तराखंड के विकास के लिये बेहतर तरीके से काम कर सकेगे. 53 दिन के विवाद में उत्तराखंड में हरीश रावत के पक्ष में सहानूभुति की लहर है. कांग्रेस के बागी नेताओं के की छवि खराब हुई है. जिससे कांग्रेस के भीतर हरीश रावत के खिलाफ होने वाली गुटबाजी खत्म हो गई है. जिसका लाभ हरीश रावत सरकार को मिल सकता है. ऐसे में नया जनादेश ही हरीश रावत सरकार के लिये बेहतर विकल्प होगा.