सरिता विशेष

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री परम पूज्यनीया प्रातः स्मरणीय श्रीमति स्मृति ईरानी को डियर कहने की जुर्रत करने वाले डॉक्टर अशोक चौधरी बिहार के शिक्षा मंत्री हैं, जिन्हें तय है तमीज आती होती तो स्मृति ईरानी को देवी, आदरणीया या माता सरीखे सम्मानजनक सम्बोधन से ट्वीट करते, नमस्कार प्रणाम  या चरण स्पर्श जैसे पौराणिक शब्द इस्तेमाल करते. डियर सम्बोधन आधुनिक युग की देन है जिससे ईसाइयत की बू आती है, सो मेडम भड़क उठीं कि आप महिलाओं को डियर कब से कहने लगे.

इस भड़कने के दो फायदे हुये पहला तो यह कि मुद्दे की बात ही गायब हो गई कि मेडम आपके केलेण्डर में 2015 कब खत्म होगा. देश मे नया शिक्षा सत्र चालू हो चुका है, लेकिन नई शिक्षा नीति का अता पता नहीं है. दूसरा फायदा यह हुआ कि अब कोई यह सवाल पूछने की हिमाकत नहीं करेगा, फिर भले ही 2016 पूरा गुजर जाए. स्मृति का सम्मान और स्वाभिमान करोड़ों नौनिहालों के भविष्य से ज्यादा महत्वपूर्ण है और जो शिक्षा मंत्री उनके इस अहंकार को तुष्ट नहीं कर सकता, निश्चित ही वह अनार्य या असभ्य होकर प्रताड़ना का पात्र है.

इधर लोग हैरान हैं कि इस प्रचलित सम्बोधन में हर्ज क्या है. अगर सवा अरब की आबादी बाले इस देश में डियर शब्द को लेकर सर्वे या जनमत संग्रह करवाया जाये तो एक ही इसे आपत्तिजनक करार देगा और वे स्मृति ईरानी होंगी, जो नहीं जानती या जानते हुये भी अंजान बनी रहेंगी कि रोजाना करोड़ों लोग बगैर किसी पूर्वाग्रह के डियर शब्द का प्रयोग करते हैं. सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के औपचारिक कागजी और मौखिक वार्तालाप में डियर सम्बोधन ही इस्तेमाल होता है, लेकिन यह भगवा मानसिकता और पौराणिक संस्कृति से मेल नहीं खाता, इसलिए जरूर  स्मृति का न भड़कना हैरानी की बात होती.

शायद वे चाहती थीं कि अगर अँग्रेजी में ही सम्बोधन देना था तो उन्हे हर हाइनेस या यूअर लेडीशिप जैसे लफ्जों से नवाजा जाना चाहिए था, जो ब्रिटिश हुकूमत में गौरी मेमों और राजघराने की महिलाओं को सम्मान देने प्रयोग किए जाते थे. अशोक चौधरी को समझा दिया गया है कि स्मृति कोई मामूली महिला नहीं हैं वे लोकतन्त्र की आभिजात्य महिला हैं जिनहे यूं ही अहम महकमे की ज़िम्मेदारी नहीं सौंपी गई है. इसलिए छोटे मोटे लोगों को अपनी हैसियत और औकात में रहना चाहिए.