उत्तर प्रदेश में भाजपा की बहुमत वाली सरकार में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनउ के सांसद और केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह आउट ऑफ फ्रेमनजर आ रहे हैं. योगी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में मंच पर केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह सबसे किनारे बैठे हुये थे. वह भी इतना की फोटो फ्रेमके ही बाहर थे.

उत्तर प्रदेश की राजनीति के फ्रेममें रहने वाले राजनाथ सिंह ऐसे ही आउट औफ फ्रेमथे या इसकी कोई गंभीर वजह है यह अभी साफ नहीं हो पा रहा है. जिस तरह से योगी सरकार में कल्याण सिंह के पौत्र संदीप सिंह को जूनियर होते हुये भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया और सालों से पार्टी संगठन का काम कर रहे राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह को दरकिनार किया गया उससे लगता है कि राजनाथ सिंह के आउट ऑफ फ्रेमरहने की वजह खास है.

भाजपा में राजनाथ सिंह का राजनीतिक कद किसी भी दूसरे नेता से बड़ा है. वह राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, केन्द्रीय मंत्री जैसे सभी खास पदो पर रहे हैं. गृहमंत्री के रूप में भी वह केन्द्र सरकार के सबसे भरोसेमंद पद पर हैं. उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की जब रेस चल रही थी तो पूरे प्रदेश की जनता की पसंद नम्बर एक राजनाथ सिंह थे.

हालाकिं खुद राजनाथ सिंह हमेशा इस बात से इंकार करते रहे. ऐसे में यह उम्मीद की जा रही थी कि प्रदेश सरकार के गठन में राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह को मंत्री पद जरूर दिया जायेगा. भाजपा में इस बार विधानसभा का टिकट देने से लेकर मंत्री पद देने तक परिवारवाद का खूब जोर चला. पार्टी को परिवारद का मुद्दा बेकार का लगा. ऐसे में पंकज सिंह के सामने कोई मजबूरी नहीं थी.

पकंज सिंह लंबे समय से पार्टी संगठन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. वह संगठन में महामंत्री के रूप में काम करते रहे हैं. पंकज सिंह को पहले भी विधानसभा का टिकट मिल चुका था पर वह चुनाव नहीं लड़े थे. इस बार वह अच्छी वोट से चुनाव जीते. अखिलेश सरकार के समय सड़कों पर उतर कर कई धरना प्रदर्शन की अगुवाई की थी और पुलिस से लाठी भी खाई थी. पार्टी में प्रदेश स्तर पर उनका कोई विरोध भी नहीं था. ऐसे में पूरी उम्मीद थी कि भाजपा की बहुमत वाली सरकार में उनको मंत्रिमंडल में शामिल किया जायेगा. अगर जूनियर होने के तर्क पर उनको सरकार में शामिल नहीं किया गया तो कल्याण सिंह के बेटे संदीप सिंह को कैसे शामिल किया गया यह सवाल उठता है?

परिवारवाद अब भाजपा के लिये कोई अछूत शब्द नहीं रह गया है. ऐसे में यह बात सामने आ रही है कि राजनाथ के आउट ऑफ फ्रेमहोने की वजह से ही पंकज सिंह को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया. भाजपा का पक्ष हो सकता है कि मंत्रिमंडल में किसी को लेना या न लेना मुख्यमंत्री का अपना अधिकार होता है. बचाव के लिये इस तर्क का इस्तेमाल किया जा सकता है. सही मायानों में अब यह तर्क मायने नहीं रखता. मंत्री के चुनाव में मनमानी से अधिक तमाम तरह के समीकरण काम करते हैं.

भाजपा के कुछ नेता यह भी कहते हैं कि पंकज सिंह के लिये पार्टी ने अच्छा बड़ी जिम्मेदारी सोच रखी है. समय आने पर उनको सौंपी जायेगी. राजनीति में नेता कब फ्रेम के अंदर रहता है और कब फ्रेम के बाहर रहता है यह पार्टी जरूरत पर निर्भर करता है.