सरिता विशेष

लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस अपने मेकओवर में लगी है. उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव इसमें अहम रोल अदा कर सकते है. उत्तर प्रदेश से ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी सांसद हैं. उत्तर प्रदेश की जीत से 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का आत्मविश्वास बढ़ सकता है. ऐसे में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिये ‘जियो या मरो’ वाले बन गये हैं.

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में अपने मेकओवर का जिम्मा प्रशांत किशोर को दे दिया है. जिनको ‘पीके’ के नाम से ज्यादा पहचान मिल रही है. प्रशांत किशोर कांग्रेस संगठन को लेकर काम कर रहे हैं. चुनावी रणनीति तैयार कर रहे हैं. कांग्रेस की रणनीति के दो हिस्से हैं. संगठन का हिस्सा प्रशांत किशोर संभालेगे और जनता के बीच संवाद का काम राहुल गांधी करेगे. राहुल गांधी को सोशल मीडिया के जरीये चर्चा में लाने की योजना भी ‘पीके’ तैयार करेगे.

विधानसभा चुनावों में राहुल गांधी जनता के बीच अपनी पकड मजबूत करने के लिये ‘चने पर चर्चा’ की योजना बना रहे हैं. चने का गांव की जीवनशैली से बड़ा गहरा नाता है. इसको लेकर ‘टूटी चूडी चने के खेत में’ गाना तक बन चुका है. माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया यह गाना लोगों को बहुत पसंद आया था.

मनोरंजन ही नहीं चना गरीब और गांव वालों का भोजन माना जाता है. मजदूर और किसान अपनी भूख मिटाने के लिये अपने साथ दो मुठ्ठी चना जरूर रखता था. चना, मक्का और जौ से तैयार होने वाला सत्तू ही गरीबों का भोजन होता था. चने को गरीबों से जोड कर देखा जा रहा है. इसलिये अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ‘चने पर चर्चा’ करने की रणनीति तैयार कर रहे हैं. गरीबों के साथ चने का करीबी संबंध किसानों से होता है. चना अकेली ऐसी फसल होती है जिसकी पत्ती से लेकर पकने तक खाने में प्रयोग किया जाता है. चने का साग, चने का निमोना, चने की दाल, चने की रोटी बहुत सारी चीजे इससे तैयार होती हैं. गांव का मजदूर चना और सत्तू के अलावा जिस चोखा बाटी को सबसे अधिक खाता है, वह भी चने से तैयार होती है.

गांव, गरीब, किसान, मजदूर, दलित और खेतिहर पिछडी जातियां चने से दिल से जुडी है. राहुल गांधी ‘चने पर चर्चा’ के दौरान ऐसे ही लोगों से संपर्क करने का काम करेगे. कांग्रेस इस तरह से ‘चने पर चर्चा’ के कार्यक्रम प्रदेश भर में गांव-गांव में आयोजित करेगी. हाल के दिनों में चने सहित दूसरी दलहन फसलों के दाम तेजी से बढ रहे है. जबकि इनका उत्पादन घट रहा है. राहुल गांधी चर्चा के दौरान किसानों से चने के उत्पादन के लिये जोर देगे. जिससे लोग कांग्रेस की नीतियों की तरफ आकर्षित हो सकेंगे.

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की नैया पार लगाने में ‘चाय पर चर्चा’ का  बडा रोल था. अब विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ‘चने पर चर्चा’ कर चुनाव जीतना चाहती है.देखना यह है कि ‘चाय पर चर्चा’ की तरह ‘चने पर चर्चा’ क्या रंग दिखाती है.