लंदन, सिंगापुर, हांगकांग और बैंकाक के मैडम तुसाद म्यूजियम में प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी की मोम की मूर्ति लगाई जायेगी. यहां पर पहले से महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी, अमिताभ बच्चन, शाहरूख खान, सचिन तेंदुलकर, ऐश्वर्या राय, सलमान खान, रितिक रोशन, करीना कपूर , माधुरी दीक्षित और कैटरीना कैफ की मोम की मूर्तियां लगी है. मैडम तुसाद म्यूजियम में देश और दुनिया के बडे बडे लोगों की मूर्तियां लगी है. मूर्तियां सम्मान और प्रचार का हिस्सा है. अपने देश में होली में बिकने वाली पिचकारी और दीवाली में बिकने वाले पटाको में तमाम लोगों के फोटो लगाकर खरीदने वालों को लुभाया जाता है. जिस पटाखा या फुलझडी का प्रचार कैटरीना और करीना ने नहीं किया होता है उनपर भी उनकी फोटो लगा दी जाती है. इनको तैयार करने वाले यह देखते है कि लोगों के बीच कौन सबसे ज्यादा लोकप्रिय है वह उसी के नाम का प्रयोग करते है. 

होली के त्योहार का रंग बाजार पर चढने लगा है. बाजार में तरह तरह की पिचकारी दुकाने पर आने लगी है, जो रंग खेलने वालों को आकर्षित करने लगी हैं. प्लास्टिक की बनी यह तरह तरह की पिचकारी 150 रूपये से शुरू होकर 2 से 3 हजार तक की कीमत की आ रही हैं. मौल्स से लेकर सडक तक इस तरह की पिचकारी मिलती है. मजेदार बात यह है कि बच्चे रंग खेलने के बाद पिचकारियों को खिलौने के रूप में प्रयोग भी करते है. इन पिचकारियों को बनाने में अलग अलग डिजाइनों का प्रयोग किया जाता है. कोशिश यह होती है कि डिजाइन ऐसे हों, जो बच्चों को आकर्षित कर सकें. कार्टून कैरेक्टर और बन्दूक रायफल आकार वाली पिचकारी बच्चों को सबसे ज्यादा पसंद आते हैं. इस बार बाजार में जो नई किस्म की पिचकारी देखने को मिली, वह मोदी पिचकारी है. इसमें प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर चिपकाई गई है. दुकानदारों का कहना है कि आजकल मोदी जी का जिस तरह से प्रचार हो रहा है, अब बच्चें भी उनकी तस्वीर के प्रति आकर्षित हो रहे है.

होली के त्योहार में बुरा न मानने का रिवाज है. ऐसे में नेताओं के नाम की पिचकारी का प्रयोग भी धडल्ले से होने लगा है. फिलहाल बाजार में प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम वाली पिचकार बिकने आ गई है. हो सकता है इसके पीछ सोनिया गांधी, ममता बनर्जी या राहुल गांधी के नाम वाली पिचकारी भी तैयार हो रही हो. ऐसे में लोग एक दूसरे के उपर अलग अलग नाम वाली पिचकारी से रंग डालते नजर आये. कहीं मोदी पिचकारी से राहुल पिचकारी का मुकाबला हो रहा हो, तो कहीं सोनिया के नाम वाली पिचकारी से ममता के नाम वाली पिचकारी में रंग चल रहा हो. कुछ भी हो जनता तो बुरा न मानो होली है का नारा लगाते हुये बस एक दूसरे पर रंग डालने का मजा लेगी. रंग खेलते समय इस बात का ख्याल जरूर रहे कि कहीं रंग में भंग न पडे. ऐसे में नेताओं के नाम वाली पिचकारी का प्रयोग सोच समझ कर ही करे.