सरिता विशेष

पुरानी कहावत है कि जब रोम जल रहा था तब नीरो चैन की वंशी बजा रहा था इधर देश जल तो नहीं रहा है पर सूखे की मार ऐसी है कि 33 करोड़ लोग पानी के लिए त्राहि त्राहि कर रहे हैं और चिंता की बात यह आशंका है कि मई के आखिर पानी पीड़ितों की तादाद 50 करोड़ तक पहुँच जाएगी । देश भर में पानी के लिए मारा मारी मची है हालत यह है कि कई हिस्सों मे लोग पानी पर चौबीसों घंटे पहरा दे रहे हैं, एक त्रासद बात यह भी है कि पानी की छीना छपटी के चलते हत्याए तक होने लगी हैं ।

अभी बहुत ज्यादा वक्त नहीं हुआ बीती 6 अप्रैल को मुंबई हाइ कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट मे जल संकट पर सुनवाई हुई थी और इन अदालतों ने जम कर लताड़ केंद्र सरकार को यह कहते लगाई थी कि, दस राज्य सूखे की मार झेल रहे हैं ,पारा 45 डिग्री के पार पहुँच रहा है । लोगों के पास पानी नहीं है । हालत खराब होती जा रही है । ऐसे में आप आँखें कैसे मूँदे रह सकते हैं ? उन्हे मदद पहुंचाने के लिए कुछ तो करिए । केंद्र सरकार ने इस फटकार को बेहद गंभीरता से लिया और पानी पीड़ितों का गम भुलाने एक भव्य समारोह के आयोजन का फैसला ले डाला, मौका है मोदी सरकार की दूसरी सालगिरह को समारोह पूर्वक मनाने का जिसमे करोड़ों रु पानी की तरह फूंके जाएंगे । उम्मीद है कि इस रंगारंग जलसे का उदघाटन महानायक अमिताभ बच्चन के कर कमलों द्वारा होगा इस जश्न मे तीन खान आमिर , सलमान और शाहरुख तो खासतौर से बुलाये ही जा रहे हैं पर सूचना प्रसारण मंत्रालय ने तमाम फिल्मी हस्तियों को इस तर समारोह में पधारने आमंत्रण भेज दिया है  इस जलसे का नामकरण होना अभी  बाकी है लेकिन तैयारियों पर नजर रखने सरकार ने सियासी दिग्गजों की एक पेनल बना दी है जिसमे शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू के अलावा केबिनेट मंत्री नितिन गडकरी पीयूष गोयल और सूचना प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठोर शामिल हैं ।

दिल्ली के इंडिया गेट पर होने जा रहे इस मेगा इवैंट में कोई 60 हजार लोगों को बॉलीवुड के इन नाचने गाने बालों के जरिये बताया जाएगा कि पिछले 2 सालों में देश ने जितनी तरक्की की है उतनी आजादी के बाद से अभी तक नहीं की थी इसलिए सूखा पानी जैसे क्षुद्र मुद्दों का शोक मत करो और नाचो गाओ झूमो कि सरकार तुम्हारे लिए क्या कुछ नहीं करती अगर इंडिया गेट तक नहीं आ सकते तो भी कोई बात नहीं इस तर जलसे का लुत्फ अपने घरों में बैठकर कोल्ड ड्रिंक पीते और आइस क्रीम खाते उठाओ क्योंकि इसका सीधा प्रसारण भी होगा । पहली सालगिरह के जलसे को सरकार ने नाम साल एक शुरुआत अनेक दिया था पर तब आम लोगों में मोदी को लेकर आस बाकी थी पर अब जब देश सूखे की चपेट में है तब मोदी बंसी नहीं बल्कि शहनाइयाँ बजबा रहे हैं जिनकी गूंज लगातार 8 घंटे सुनाई देगी । कोर्ट के बाहर सुप्रीम कोर्ट को जबाब दे दिया गया है कि केंद्र सरकार की आंखे खुली हुई हैं और वह सूखा पीड़ितों के मनोरंजन के लिए ही यह तर जलसा कर रही है ।