सरिता विशेष

मीटिंग किसी की भी हो बौस के काम की तरीफ होती ही है. अपने दर्द को भी दूसरे तरह से कहना पड़ता है, जिससे बौस को बुरा न लगे. राजनीतिक मीटिंग में भी अब यह फामूर्ला हिट होता है. इस परिपाटी को ही हिन्दी मुहावरे में ‘ठकुरसुहासी’ के नाम से जाना जाता है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के कुछ सांसदों के साथ जब मींटिंग कर केन्द्र सरकार और प्रदेश सरकार के कामकाज पर जानकारी चाही तो सांसदों ने केन्द्र की जीएसटी पालिसी की तारीफ की पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रियों की शिकायत की. कहा कि यह लोग जनता की सुनते नहीं. सासंदों ने उत्तर प्रदेश में मौरंग और बालू की कमी से होने वाली परेशानी का भी जिक्र किया. उत्तर प्रदेश के संदर्भ में बाद मे प्रधानमंत्री को बताया गया कि यहां मौरंग और बालू की कमी की वजह पिछली सरकार की नीतियां रही है.

उत्तर प्रदेश में आज के समय में किसी दुकानदार के पास चले जाये तो चर्चा का एक ही बिन्दू जीएसटी होता है. कारोबारी पूरी तरह से अनजान है कि वह जीएसटी का कैसे सामना करे. कई लोगों को यह पता ही नहीं है कि कैसे और कितना जीएसटी देना है. कारोबारी आपस में चर्चा कर इसको समझना चाहते हैं. इस वजह से ज्यादातर कारोबार बंद सा पड़ है कि जब जीएसटी समझ में आयेगा माल बेचेंगे. कई चालाक कारोबारी अपने मन से जीएसटी के नाम पर दाम बढ़ा कर वसूल रहे हैं. यह कारोबारी दाम बढ़ा कर तो वसूल रहे हैं, पर यह नहीं कहते कि इस वस्तु पर जीएसटी कम हुआ है तो यह सस्ता हो गया है.

देश में बड़ी संख्या में सामान्य दुकानदार हैं. यह पूरी तरह से जीएसटी को लेकर उहापोह में हैं. वह अपने मन से जीएसटी के नाम पर वसूली कर रहा है. जीएसटी को लेकर पूरा समाज उहापोह में है. ऐसे में यह कहना कि जीएसटी को लेकर सब कुछ सामान्य है उसे सांसदों की ‘ठकुरसुहासी’ माना जा सकता है. प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा कि वह जनता के बीच जाएं और वहां जीएसटी को लेकर सबको समझायें. मुख्य बात यह है कि खुद सांसदों को नहीं पता कि जीएसटी पर लोगों को क्या समझायें?

जीएसटी की मुश्किलों पर केन्द्र सरकार एक भी कदम पीछे खींचने को तैयार नहीं है. ऐसे में सांसदों ने जीएसटी को लेकर ऐसी कोई बात नहीं की जो सरकार पसंद न करे. उत्तर प्रदेश के संदर्भ में सांसदों ने बहुत अचछी बात कही कि यहां पर बालू और मौरंग को लेकर बड़ी परेशानी है. सरकार ने नदियों बालू और मौरंग के खनन के काम को बंद सा कर रखा है. जिससे इसके भाव तो बढ़ ही गये हैं, यह बाजार से बाहर हो गये हैं. जिससे लोगों का घर बनाना मुश्किल और मंहगा दोनों हो गया है. सांसदों की इस शिकायत को सपा सरकारी की खामी से जोड़ देने के बाद यह बात भी प्रभावी नहीं रह गई. सांसदों ने इस बात की तारीफ की कि प्रधानमंत्री ने उनकी बात को सुना और समझा.