साधारण से बहुत असाधारण हो जाने तक  के लंबे सफर मे प्रधानमंत्री नरेन्द्र  मोदी ने बहुत उतार चढ़ाव और तरह तरह के लोग देखे हैं पर चाटुकारों से उनका वास्ता पहली बार पड़ रहा है और यह चाटुकारिता भी इतने अव्वल दर्जे की है कि इन्दिरा युग के वे लोग भी शर्मा जाएँ जो इन्दिरा इज इंडिया और इंडिया इज इन्दिरा का नारा बुलंद करते थकते नहीं थे,  क इयों ने तो इन्दिरा गांधी को देवी तक का दर्जा दे दिया था.

अब इसी तर्ज पर नरेंद्र मोदी को अवतार कहने बालों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है. उनमे ताजा नाम मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का है, जिनहोने भोपाल मे कहा कि नरेंद्र मोदी जो काम कर रहे हैं वह किसी साधारण मनुष्य के बस की बात नहीं. एक तरह से शिवराज ने मोदी को अवतार घोषित कर दिया है. ठीक इसके 4 दिन पहले वेंकइया नायडू ने भाजपा की एक मीटिंग मे मोदी को भगवान का तोहफा बताया था और इसके कुछ पहले अभिनेता अनुपम खेर ने कहा था कि प्रधानमंत्री का चमचा कहलाने पर उन्हे  फख्र महसूस होता है. इसमे कोई शक नहीं कि नरेंद्र मोदी के नाम की इन दिनो तूती बोल रही है उनकी कृपा दृष्टि जिस पर पड़ जाए उसकी ज़िंदगी सँवर जाती है. इसकी जीती जागती मिसाल मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी हैं और जिस पर उनकी भोंहे तिरछी हो जाएँ उसको सियासी तौर पर मिटने मे कुछ दिन ही लगते हैं. भाजपा के पितृ पुरुष लालकृष्ण आडवाणी से लेकर शत्रुधन सिन्हा तक एक लंबी श्रृंखला है, जिसमें जाने कितने जोशी, जेठमलानी, और जसवंत जड़े दिख जाते हैं.

खतरा न पालने मे यकीन रखने बाले नरेंद्र मोदी के लिए अब ये नए चाटुकार बड़ा खतरा हैं जो उनके प्रधानमंत्री बनने से पहले दुआ यह मांगते थे कि कैसे भी हो यह आदमी पीएम नहीं बनना चाहिए लेकिन मोदी बन गए और पूरी शान से डटे हैं, तो इन लोगों को भगवान याद आ रहा है. हालांकि मोदी को भगवान कहने की शुरुआत सबसे पहले साध्वी उमा भारती ने एक साल पहले की थी जिनके मंत्री होने के बाद भी कहीं अते पते नहीं हैं.

इन्दिरा गांधी  के डूबने की एक बड़ी वजह इसी प्रजाति के चाटुकार और खुशामदिए थे, मोदी को यह बात मालूम है लेकिन अपनी तारीफ हर किसी को अच्छी लगती है. लिहाजा वे इन लोगों से यह नहीं कह पा रहे की मुझे आदमी ही रहने दो भगवान या अवतार मत बनाओ. इन चाटुकारों के अपने स्वार्थ मोदी को लेकर हैं, जिनहे ये ज्यादा दिन छुपाकर नहीं रख पाएंगे, लेकिन लोकतन्त्र मे असली भगवान आखिरकार जनता ही साबित होती है, जो एक झटके मे राजा को रंक और रंक को राजा बना देती है. चाय बेचने बाले मोदी खुद इसकी मिसाल हैं लिहाजा उन्हे कुकुरमुत्ते से उग रहे इन चाटुकारों से खबरदार तो रहना पड़ेगा, जिनहोने उन्हे भगवान बनाने का ठेका ले रखा है और इनमे से अधिकांश आडवाणी गुट के हैं यानि खतरा दो तरफा है .