सरिता विशेष

भाजपा के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केन्द्र सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सांसद डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी का दर्द उत्तर प्रदेश के राजभवन में अपनों के बीच छलक गया. उत्तर प्रदेश के राजभवन में उत्तर प्रदेश के पद्म सम्मान पाने वालों के लिये एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. इसमें राज्यपाल राम नाईक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित पार्टी और सरकार के खास लोग मौजूद थें.

सम्मानित होने के बाद जब डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी ने पहले राजनीति में जुगाड़ की प्रतिभा पर खुलकर बोले. इसकी जरूरत बताते हुए डॉक्टर जोशी ने कहा कि सियासत में जुगाड़ का अपना खासा महत्व है. उनका कहना था कि जुगाड़ भी एक प्रतिभा है इसकी जरूरत हर जगह पड़ती है. जुगाड़ से ही नई खोज हो जाती है. जुगाड़ होना कम प्रतिभा की बात नहीं है.

राजनीति में जुगाड़ के बाद डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी ने अपने पद्म विभूषण सम्मान पर भी बोला जिससे उनका दर्द और भी बढ कर छलक रहा था. डॉक्टर जोशी ने कहा कि उनको पद्म विभूषण सम्मान मिला है. वह अपनी खुद की पहचान ढूंढ रहे हैं. वह यह समझ नहीं पा रहे कि यह सम्मान मेरी पहचान को उजागर करता है या नष्ट करता है. डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी ने जब यह बात कही तो लोग मंत्रमुग्ध हो कर उनकी बात सुनते रहे. राज्यपाल राम नाईक ने अपने उदबोधन में डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी के काम की तारीफ करते हुये अपने अनुभव सुनाये.

डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी का बयान उस समय आया है जब राष्ट्रपति के नाम को लेकर बड़े भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को दरकिनार करने की बात कही जा रही है. जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब भाजपा अपने मतो पर राष्ट्रपति का चुनाव कर सकती है तो लालकृष्ण आडवाणी का नाम आगे क्यों नहीं रखा गया? इसमें भाजपा के बड़े नेताओं की उपेक्षा को देखा जा रहा है. अपने विषय में लालकृष्ण आडवाणी ने कोई बयान भले न दिया हो पर डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी ने जुगाड़ और पद्म विभूषण सम्मान और अपनी पहचान की बात को लेकर अपना दर्द बयान कर दिया है.

भाजपा भले ही इस बात को महत्व न दे, इसे पार्टी का फैसला बताये पर जनता के बीच और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच यह बातें अहम है कि पार्टी अपने बड़े नेताओं के साथ कैसा व्यवहार कर रही है? देश में इस बात का मान दिया जाता है कि अपने से बड़े को प्रमुख बनाकर रखा जाये. समाजवादी पार्टी में उसके मुखिया मुलायम सिंह यादव को जब पुत्र अखिलेश यादव ने दरकिनार किया तो पार्टी का सबसे प्रमुख यादव और पिछड़ा वर्ग हर ही नाराज होकर दूर चला गया जिसका असर अखिलेश यादव को अपनी बुरी हार के रूप में देखनी पड़ी.

भाजपा तो रामायण और महाभारत सहित तमाम धार्मिक कहानियों और ग्रंथों से प्रेरणा लेकर चलती है. उस में जब बुजुर्ग नेताओं की अवहेलना होती है तो उनका दर्द छलकना स्वाभाविक है. इससे सीख लेकर पार्टी को सोचना चाहिये.