सरिता विशेष

मोदी विरोध की जो गलती कांग्रेस ने दोहराई अब वही गलती प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कर रहे है. नरेन्द्र मोदी जब गुजरात में मुख्यमंत्री थे उस समय कांग्रेस ने उनको निशाने पर ले लिया. कांग्रेस भाजपा के कटट्रवाद और गुजरात दंगों को लेकर बेहद मुखर हो गई. कांग्रेस को लगा कि नरेद्र मोदी की आलोचना के सहारे वह भाजपा को हाशिये पर लाने में सफल हो जायेगी. इस अभियान में कांग्रेस ने भाजपा के नेताओं में केवल नरेंद्र मोदी को ही निशाने पर लिया.2002 के गुजरात दंगों के बाद कांग्रेस की केन्द्र में 10 साल सरकार रही.इस बीच कांग्रेस केवल नरेद्र मोदी के विरोध को ही प्रमुखता से उठाती रही.केन्द्र सरकार के रूप में कांग्रेस के मोदी विरोध की राजनीति ने ही नरेन्द्र मोदी को गुजरात से निकालकर देश के बाहर मजबूत हालत में खडा कर दिया.2014 के लोकसभा चुनावों के समय कांग्रेस को उम्मीद थी कि भाजपा में नेतृत्व के मसले पर नरेद्र मोदी का विरोध होगा जिसका लाभ कांग्रेस को मिलेगा.सही मायनों में नरेंद्र मोदी कांग्रेस विरोध के रथ पर सवार होकर चुनावी वैतरणि पार कर गये.

जिस तरह से कांग्रेस ने मोदी का विरोध किया था उसके जवाब में मोदी ने कांग्रेस मुक्त भारत अभियान शुरू किया.केन्द्र में सरकार बनाने के बाद नरेद्र मोदी कांग्रेस विरोध की राजनीति में इतना डूब गये कि बाकी मुददे वह भूलते जा रहे है.असल में जिस तरह से कांग्रेस विरोध में मोदी देश के प्रधानमंत्री बने उसी तरह से मोदी के विरोध से काग्रेस की सत्ता में वापसी हो सकती है.दरअसल भारतीय मतदाता बहुत ही संवेदनशील होता है.वह हमेशा उसको पसंद करती है जो दूसरों के द्वारा परेशान किया जाता है.भारत में ‘सहानुभूति वोट’ मिलने के तमाम उदाहरण मिलते है.मोदी ही नहीं उनके समर्थक भी कांग्रेस और कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी के किसी विरोध को छोडना नहीं चाहते है.कांग्रेस विरोध को अगर ऐसे ही हवा मिलती रही तो कांग्रेस कमजोर के बजाय मजबूत होगी.

‘अगस्ता वेस्टलैंड’ डील के मामले में केन्द्र सरकार को कांग्रेस के खिलाफ पुख्ता सबूत एकत्र करना चाहिये.जिस तरह से बफोर्स मसले में हुआ उससे सीख लेकर मोदी सरकार को कदम उठाना चाहिये.कई बार बडे नामों को आरोपी बनाने की जल्दबाजी में लडाई कमजोर हो जाती है.कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी मानते है कि कांग्रेस और राहुल गांधी को निशाना बनाने से पार्टी का लाभ होगा. भाजपा सासंद किरीट सोमैया और राज्यसभा सांसद सुब्रामणमय स्वामी जिस तरह से कांग्रेस और गांधी परिवार को निशाने पर लेते है उससे कांग्रेस को अपने बचाव का रास्ता मिल जायेगी.मोदी सरकार को लगता है कि वह जनता से किये गये वादों को पूरा नहीं कर पा रही है ऐसे में अगर वह कांग्रेस विरोध की राजनीति को लेकर काम करेगी तो एक वर्ग खुश हो सकता है.यह हो सकता है कि कांग्रेस के विरोधी इससे खुश रहे पर जनता में कांग्रेस का विरोध ‘सहानुभूति वोट’ में बदल सकता है.मोदी सरकार को 2 साल का समय पूरा हो रहा है.इस कार्यकाल में देश में मोदी की चमक फीकी पडी है.भाजपा का बेस वोटर भी खुश नहीं है.ऐसे में सिर्फ कांग्रेस विरोध से मोदी की नैया पार नहीं लगेगी.