राष्ट्रीय

मोदी और नीतीश ने की लालू की बेइज्जती

प्रकाश पर्व के मौके पर पटना पहुंचे प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शराबबंदी की जम कर तारीफ की. वहीं नीतीश ने भी मोदी के सुर में सुर मिलाया. नीतीश ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान मोदी ने वहां शराबबंदी कराई थी, जिससे बाद ही गुजरात ने तरक्की की रफ्तार पकड़ी.

गौरतलब है कि जब नोटबंदी के बाद सभी विपक्षी दलों ने मोदी की आलोचना की थी, तो नीतीश ने  उस मसले पर मोदी का साथ दिया था और नोटबंदी को जरूरी बताया था. देश-विदेश से आए पंजाबियों और     प्रधनमंत्री ने प्रकाश पर्व के आयोजन की कामयाबी के लिए नीतीश की जम कर तारीफ की. नीतीश भी सारा क्रेडिट खुद ले गए और सरकार के सबसे बड़े सहयोगी दल राजद के मुखिया लालू यादव को दरकिनार कर दिया. लालू को न तो मंच पर जगह मिली ओर न ही कामयाबी का श्रेय मिला.

पटना के गांधी मैदान में आयोजित प्रकाश पर्व समारोह में प्रधनमंत्री समेत कई केंद्रीय मंत्री, राज्य के मंत्री और कई सीनियर नेता मौजूद थे. नीतीश और उनके अफसरों ने राजद सुप्रीमो जैसे जमीनी नेता लालू यादव को मंच के सामने जमीन पर बैठने को मजबूर किया. लालू को स्टेज पर बैठने की जगह नहीं दी गई, जबकि वह राज्य के सीनियर लीडर ही नहीं महागठबंधन की सरकार के सबसे बड़े सहयोगी भी हैं. इसके बाद भी नीतीश कुमार ने उनकी अनदेखी की. मोदी के साथ-साथ नीतीश ने भी अपने भाषण में लालू का जिक्र तक नहीं किया.

पिछले बिहार विधान सभा चुनाव में लालू और नीतीश के गठजोड़ ने साबित कर दिया था कि उनके पास मजबूत वोट बैंक है. 243 सदस्यों वाले बिहार विधन सभा में 178 सीटों पर महागठबंधन का कब्जा है. इसमें जदयू की झोली में 71 सीट हैं तो राजद के खाते में 80 सीट हैं. वहीं कांग्रेस के हाथ में 27 सीटे हैं. सीटों के अलावा सबसे ज्यादा वोट भी राजद को ही मिला था.  राजद को जहां 18.4 फीसदी वोट मिले थे वहीं  नीतीश की पार्टी जदयू को 16.8 फीसदी वोट मिल सका था, कांग्रेस को 6.7 फीसदी वोट मिले थे और तीनों दलों को मिले वोट को मिलाने से यह आंकड़ा कुल 41.9 फीसदी हो जाता है. इसके बाद भी लालू की अनदेखी कर नीतीश ने महागठबंधन के भीतर अफवाहों का बाजार गर्म कर दिया है.

मीडिया वालों ने जब मोदी और नीतीश की जुगलबंदी के बारे में लालू से सवाल किया तो लालू ने अपने ठेठ गवंई लहजे में कहा-‘ आप लोग अपना जलेबी छानते रहिए, बाद में निकलेगा पकौड़ी.’ लालू के कहने का मतलब था कि आप लोग अपने में खुश होते रहिए कि नीतीश और लालू के बीच में तनाव बढ़ रहा है पर कुछ होने वाला नहीं है. राजद के सूत्रों की मानें तो मोदी और नीतीश की अनदेखी से लालू खासे नाराज हैं और प्रकाश पर्व के खत्म होने के बाद वह इस बारे में नीतीश से बात करेंगे.

इसके पहले भी नीतीश महागठबंधन की लाइन से अलग जा कर कई मौकों पर केंद्र सरकार और प्रधनमंत्री की तारीफ में कसीदे गढ़ चुके हैं. 3 तलाक के मसले पर ही नीतीश ने मोदी को कठघरे में खड़ा किया था, लेकिन जीएसटी, सर्जिकज स्ट्राइक, नोटबंदी और बेनामी संपति के मामले में नीतीश ने खुल कर मोदी के सुर में सुर मिलाया. इन मामलों में नीतीश बिना-लाग लपेट के मोदी का साथ दे चुके हैं.

गौरतलब है कि पिछले दिनों जब राजद सुप्रीमो लालू यादव नोटबंदी के खिलाफ शुरू की गई मुहिम शुरू की, तो उसमें भी नीतीश ने उनका साथ नहीं दिया था. नोटंबदी के 50 दिन पूरे होने पर राजद ने पिछले 28 दिसंबर को महाधरना का आयोजन किया तो उससे नीतीश ने कन्नी काट ली थी. वह पहले ही नोटबंदी को सही करार दे कर इससे पल्ला झाड़ चुके हैं.

प्रकाश पर्व का पूरे ताम-झाम से आयोजन कर नीतीश देश-विदेशों से तारीफें बटोर रहे हैं और उनके पार्टी के लोग यह हवा बनाने में लगे हुए हैं कि इससे नीतीश नेशनल ही नहीं बल्कि इंटरनेशनल नेता बन कर उभरे हैं. दरअसल, पंजाबियों के प्रकाश पर्व का कामयाब बनाने के बहाने नीतीश की नजर अगले महीने होने वाले पंजाब विधान सभा चुनाव पर है. पंजाबियों से मिली वाहवाही के बाद यह उम्मीद तो जगने लगी है कि पंजाब चुनाव में नीतीश की पार्टी जदयू को 5-7 सीटें तो मिल ही जाएगी.

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