कर्नाटक के चामराजनगर जिले का कस्बा कोल्लेगल काले जादू के लिए इतना कुख्यात है कि वहां अभी तक कोई मुख्यमंत्री मारे डर के गया ही नहीं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि काले जादूगर कुर्सी भी खिसका सकते हैं और मूठ मारनी नाम की तांत्रिक क्रिया भी कर सकते हैं, जो हो जाए तो आदमी जिंदा नहीं बचता. पहली दफा कोई सीएम यानि सिद्धारमैया वहां गए तो, पर काले जादू का भूत उनके सर उस वक्त सवार हो गया, जब चामराजनगर के एक किसान ने उन्हे भेंट मे लाल रंग की शाल देनी चाही. सिद्धारमैया लाल रंग की शाल देख भड़के तो नहीं, पर उन्होंने किसान की यह भेंट लेने से इस अंदाज मे इंकार किया कि मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उसे बाहर कर दिया. यह किसान भी सीएम को शाल देने की अपनी जिद पर अड़ गया था, इसलिए भी स्थिति असहज हो गई थी.

बहरहाल बला तो टल गई, पर सवाल यह छोड़ गई कि क्या सिद्धारमैया भी इतने अंधविश्वासी हो चले हैं कि एक लाल शाल से डर गए. जबाब हां में ही निकलता है, क्योंकि कुछ दिन पहले ही उनकी कार पर काला कौआ बैठ गया था, तो उन्होंने तुरंत नई कार का ऑर्डर दे दिया था और उस कार में सवार नहीं हुये थे, जिसका लिहाज कौए ने नहीं किया था कि यह सीएम की कार है, इस पर नहीं बैठना चाहिए.

दरअसल कर्नाटक में सब कुछ ठीक ठाक नहीं है. सिद्धारमैया को हटाये जाने की मांग कांग्रेस के अंदर ज़ोर पकड़ रही है. इसलिए कोई जोखिम ना उठाते हुए वे कौओं और लाल शालों से बिदकने लगे हैं, तो उन पर तरस ही खाया जा सकता है. इससे तो बेहतर होगा कि वे पद पर बने रहने के लिए काले जादूगरों का सहारा लेते और काग शांति के लिए कोई यज्ञ हवन करवा डालते.

असल मे भयभीत आदमी की मनोस्थिति क्या होती है यह सिद्धारमैया की हालत देख समझा जा सकता है. ज्यादा नहीं इससे 3 दिन पहले एक पंचायत कर्मी ने सार्वजनिक रूप से उनका चुंबन ले लिया था, तब वे कुछ नहीं बोले थे, उल्टे चुंबन देने वाली महिला को आशीर्वाद दे दिया था, क्योंकि उसने उन्हें पितातुल्य बताया था. मुमकिन है किसान भी उन्हे अग्रज मानता हो, पर बेचारा कह नहीं पाया होगा. अब कौओं और शाल से डरा एक सीएम कब तक इन कथित टोने टोटकों और अपशगुनों से खुद को बचाए रख पाता है, यह देखना कम दिलचस्पी की बात नहीं होगी.