सरिता विशेष

सूफी दार्शनिक तन से ज्यादा मन की शुद्धि पर ज़ोर देते थे तो तय है कि वे सारे फ़सादों की जड़ उन विचारो , सिद्धांतों और मान्यताओं को मानते थे जो धर्म ग्रंथो से आईं इधर उज्जैन के सिंहस्थ कुम्भ में आम श्रद्धालु क्षिप्रा में डुबकी लगाकर पाप धोते मोक्ष के वहीखाते में अपना नाम दर्ज कर रहे हैं लेकिन इस धार्मिक आयोजन के नायक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इतने से संतुष्ट नहीं हैं लिहाजा उन्होने 12 से 14 मई तक उज्जैन के नजदीक ही निनोरा कस्बे में एक विशाल अंतर्राष्ट्रीय विचार महाकुंभ के आयोजन की भी घोषणा कर डाली है जिसका शुभारंभ आर आर एस प्रमुख मोहन भागवत और समापन प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे । इस विचार महाकुंभ का मसौदा स्पष्ट नहीं है न ही उन मनीषियों के नाम अभी सरकार बता रही जो इस वैचारिक वेतरणी मे डुबकी लगाएंगे पर इतना तय है कि इसमे कोई लेफ्ट समर्थक तो दूर की बात है कोई गैर हिंदुवादी विचार धारा का चेहरा नहीं होगा क्योकि उसे इसी आधार पर विद्वान या मनीषी नहीं माना जा सकता । यानि इस आयोजन में हिन्दुत्व थोपने के षड्यंत्र से इंकार नहीं किया जा सकता लेकिन यह बात राष्ट्रवाद की आड़ मे किए जाने की संभावना ज्यादा है छुट पुट चर्चा आयोजन को आरोपों से बचाने इधर उधर की हो सकती है । जो निष्कर्ष निकलेंगे उन्हे प्रकाशित किया जाएगा पुस्तक का नाम होगा अमृत संदेश  ।

अमृत हर कोई जानता है बगेर मंथन के नहीं निकलता इसलिए मौजूदा दौर के देवता ही आपस मे रस्साकसी करेंगे जिसका अघोषित अजेंडा यह होगा कि कैसे अधिकतम शांति से हिन्दुत्व थोपा जा सकता है और इसकी राह में बाधाएँ कैसी और कौन हैं । विचार विमर्श करना अच्छी बात है इससे ज्ञान चक्षु खुलते हैं लेकिन एक ही विचारधारा के लोग जब मिल बैठ कर सब कुछ तय करेंगे तो उसमे मंथन कहाँ रह जाएगा । कुछ वैज्ञानिक, समाज शास्त्री और अन्य क्षेत्रो के विद्वान भी इस विचार महाकुंभ मे खासतौर से बुलाये जा रहे हैं जिनका काम सहमति देना ज्यादा होगा स्वतंत्र विचार रखना कम होगा । मुमकिन है चर्चा का फोकस दलितों पर रखा जाए क्योकि 11 मई को भाजपा दलितों को अलग से स्नान करवा रही है जिस पर विवाद शुरू हो गए हैं कि कुम्भ का राजनैतिकीकरण किया जा रहा है । शिवराज इस आयोजन के इवैंट मेनेजर मात्र हैं नहीं तो इसके पीछे दिमाग तो आर एस  एस का ही है जो सब कुछ अनुकूल होते हुये भी संतुष्ट नहीं है यह असंतुष्टि दरअसल में क्या है यह जरूर विचार महाकुंभ से उजागर होगा ।