राजद सुप्रीमो लालू यादव नोटबंदी के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कुछ ज्यादा ही खफा हो गए हैं. वैसे तो लालू अकसर मोदी के खिलाफ बयानबाजी करते रहते हैं और उनकी खिल्ली उड़ाते रहते हैं. अब उन्होंने मोदी को नया नाम दिया है, ‘अंकल पोजर’.

लालू ने ट्वीट के जरिए कहा है कि प्रधानमंत्री अंकल पोजर की तरह काम करते हैं. किसी काम को शुरू करके उसे बिगाड़ कर रख देते हैं और उसके बाद अपनी गलती का ठीकरा दूसरे के सिर फोड़ देते हैं. अपने कारनामों से उन्होंने जनता, किसान, सरकार और खुद अपनी पार्टी भाजपा का भी नुकसान कर रहे हैं.

गौरतलब है कि ‘अंकल पोजर हैंग्स द पिक्चर’ की कहानी सभी ने स्कूली दिनों में पढ़ी होगी. उस कहानी में लिखा गया है कि दीवार पर फोटो टांगने के लिए अंकल पोजर ने समूची दीवार को ही तहस-नहस कर डाला. एक कील ठोंकने के लिए उसने पूरी दीवार में सैंकड़ो छेद कर दिया. उसके बाद एक कील ठोंकने में कामयाबी मिली भी तो तस्वीर टेढी लगा दी. लालू कहते हैं कि अंकल पोजर की तरह मोदी हर घर और कारोबार में घुस कर सबका नुकसान कर रहे हैं और खुद इस मुगालते में हैं कि उन्होंने बहुत अच्छा काम कर डाला.

लालू के मोदी की खिल्ली उड़ाने का सिलसिला यहीं नहीं थमता है. लालू कहते हैं कि नरेंद्र मोदी तो गजबे, गजबद्ध आदमी हैं. चुनाव आते ही वह हर प्रांत से अपनी रिश्तेदारी जोड़ने लगते हैं. पिछले दिनों पंजाब में चुनाव प्रचार करने गए तो कह दिया कि पंजाब से उनका खून का रिश्ता है. इसके बाद वह मजाकिया लहजे में मोदी से सवाल पूछते हैं कि क्या मोदी का बाकी राज्यों से पानी का रिश्ता है?

बड़े से बड़े सियासी मामलों पर मजाक उड़ाना और उसे हवा में उड़ा देना लालू यादव की फितरत रही है. पिछले दिनों बिहार में महागठबंधन में शामिल दलों के बीच जुबानी लठ्ठ चलने से भड़की सियासी आग को ठंडा करने की कोशिश करते हुए राजद सुप्रीमो अपने मसखरी के पुराने रंग में दिखे थे. उन्होंने महागठबंधन और नीतीश के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले अपने नेताओं को नसीहत दिया कि वह अपनी जुबान पर काबू रखें. उन्होंने सीरियस लहजे में कहा कि नीतीश कुमार महागठबंधन के नेता हैं और उसके बाद चुटकी लेते हुए कहा कि वह महागठबंधन के फायर ब्रिगेड हैं. महागठबंधन में आग लगाने की कोशिशों पर वह तुरंत ही ठंडा पानी डाल कर ठंडा कर देते हैं.

खिल्ली उड़ाने के मामले में वह अपनी पार्टी के नेताओं को भी नहीं बख्शते हैं. पिछले महीने जेल से बाहर आने के बाद राजद के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद शहाबुद्दीन ने कहा था कि वह नीतीश को नहीं बल्कि लालू को अपना नेता मानते हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि नीतीश तो हालात की वजह से मुख्यमंत्री बन गए.

इस मामले में राजद के थिंक टैंक माने जाने वाले रघुवंश प्रसाद सिहं ने शहाबुद्दीन को कटघरे में खड़ा कर दिया था. इतना ही नहीं रघुवंश ने यह कह कर भी नया तूफान खड़ा कर डाला था कि मुझे गाली देने के लिए नीतीश कुमार ने 2-2 मंत्रियों को लगा रखा है, वह लालू जी को नजर नहीं आ रहा है. नीतीश के कई मंत्री महागठबंधन को तोड़ रहे हैं. इसके बाद उन्होंने लालू को चुनौती देने के मूड में कह डाला था कि वह बोलना नहीं छोड़ेंगे. अगर वह चुप रहेंगे तो डेमोक्रेसी नहीं बचेगी?

रघुवंश और शहाबुद्दीन के बयानबाजी से राजद में उठे तूफान को लालू ने यह कह कर ठंडा कर दिया था कि रघुवंश बाबू तो हमेशा पिच पर खड़े रहते हैं. बॉल मिलते ही वह बैट घुमाने लगते हैं. उन्हें कई बार समझाया है कि चुट्टी, चिकोटी नहीं काटें, पर वह सुनते ही नहीं हैं.