सरिता विशेष

समाजवादी पार्टी के विवाद पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा ‘यह मामला परिवार का नहीं सरकार का है. सरकार के कामकाज मे बाहरी लोगों का दखल होगा तो काम कैसे चलेगा’.

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद इस बात का कयास लगना तेज हो गया है कि सरकार के कामों में दखल देने वाला बाहरी कौन है ? कुछ लोगों का अंदाजा है कि मुख्यमंत्री ने जिस बाहरी आदमी का जिक्र किया वह नाम अमर सिंह का है.

इसके पक्ष में तर्क दिया जा रहा है कि मुख्य सचिव पद से हटाये गये दीपक सिंघल अमर सिंह के करीबी थे. अमर सिंह बाहरी आदमी है. इस बात को मानने से सपा नेता शिवपाल सिंह ने मना कर दिया. उनका कहना है कि सपा में कोई बाहरी आदमी नहीं है. सपा पार्टी पूरे परिवार की तरह  है.

‘सपा में बाहरी कौन’ इस कयास की तरफ दूसरा निशाना मुलायम सिंह यादव परिवार के करीबी सदस्य की ओर है. कयास यह है कि मंत्री पद से हटाये गये गायत्री प्रसाद प्रजापति और इस करीबी सदस्य के बीच करीबी रिश्ता था. जब गायत्री प्रसाद प्रजापति को मंत्री पद से हटाया गया तो परिवार का दबाव मुलायम सिंह यादव पर पड़ने लगा.

मुलायम ने मामले को लेकर अखिलेश से बात करने की कोशिश भी की पर बात हो नहीं पाई. अखिलेश हटाये गये लोगो को मंत्रिमंडल में दोबारा शामिल करने को तैयार नहीं थे.

जब यह बात पक्की हो गई कि मुलायम इस बात की जिद नहीं करेगे तब ही अखिलेश उनकी की बात संभव हो पाई. अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने शिवपाल को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाने के घटनाक्रम में भी पूरी तरह से परिवार का विवाद दिखा.

आपसी मानमनौव्वल में यह साफ झलक रहा था.जब तक बाहरी आदमी के नाम का सच सामने नहीं आयेगा लोग कयास लगाते रहेंगे. 

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कितना भी यह कहें कि विवाद परिवार का नहीं था पर सच यह है कि पूरा विवाद परिवार का है और परिवार के ही हल करने से हल होगा.

बाहरी किसी भी व्यक्ति का पार्टी में इतना प्रभाव नहीं है कि वह विवाद को इस स्तर तक उठाने में सफल हो जाये. फौरीतौर पर यह विवाद भले ही सुलझा दिखाई दे पर आने वाले दिनों में यह और उलझता जायेगा.

आपसी रिश्तों में पडी गांठ इस विवाद को और उलझा देगी. जिसका परिणाम पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर पडना लाजिमी है. ऐसे में विवाद का कारण बाहरी व्यक्ति है तो लोग उसका कयास लगाने से चूकेंगे नहीं. पूरे विवाद से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की छवि धूमिल हुई है. विरोधियों को यह आरोप लगाने का मौका मिल गया है कि प्रदेश में कई मुख्यमंत्री काम कर रहे हैं.