समाजवादी पार्टी सरकार में महिला अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के अधिकारों की रक्षा करने का दावा करने वाली भाजपा अब अपनी सरकार में महिला अधिकारी चारू निगम के स्वभिमान की रक्षा को लेकर बैकफुट पर है. चारू निगम आईपीएस अधिकारी हैं. ट्रेनिंग के समय पर वह गोरखपुर जिले के गोरखनाथ सर्किल की पुलिस सर्किल आफिसर के रूप में काम कर रही हैं. उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद गोरखपुर चर्चा मे है. योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से ही सांसद हैं. यहीं के गोरखनाथ मंदिर के महंत के रूप में रहते थे. गोरखनाथ मंदिर गोरखनाथ पुलिस सर्किल में ही आता है. योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से यहां पर बहुत ही भरोसेमंद और तेजतर्रार अफसरों की नियुक्ति की गई थी.

चारू निगम ट्रेनी आईपीएस अधिकारी हैं. शराब बंदी को लेकर धरना प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर पुलिस के द्वारा लाठी चार्ज के मसले पर चारू निगम और गोरखपुर के विधायक डाक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल के बीच नोकझोंक ने बड़ा रूप ले लिया है. महिला आईपीएस अधिकारी के अपमान को लेकर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आईपीएस एसोसिएशन ने अपना विरोध दर्ज कराया है. आईपीएस चारू निगम ने अपनी बात को खुलकर अपने फेसबुक पेज पर लिखा तो विधायक राधा मोहन अग्रवाल ने मीडिया से बात की और अपनी किसी भी तरह की गलती नहीं मानी.

राधा मोहन अग्रवाल-चारू निगम प्रकरण के 3 दिन बीत जाने के बाद भी न सरकार ने इस मसले पर अपना पक्ष रखा और ना ही भाजपा संगठन ने ही अपना पक्ष रखा है. सोशल मीडिया में चर्चा शुरू होने के बाद से यह मसला उलझता जा रहा है. इसे समाजवादी पार्टी के दुर्गा शक्ति नागपाल प्रकरण से जोड़ा जा रहा है. इससे भाजपा के सरकार और संगठन दोनों की छवि धूमिल हो रही है. उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से अधिकारी और नेताओं के टकराव का यह पहला मुद्दा नहीं है. प्रदेश में कम समय में ही कई ऐसी घटनायें घट चुकी हैं जहां असफर और नेता आमनेसामने आ गये.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लगातार सीख के बाद भी भाजपा के नेता और कार्यकर्ता किसी भी तरह से अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे. विद्यार्थी परिषद जैसे भाजपा के संगठन स्कूलों में फीस मुद्दे को लेकर ऐसे व्यवहार कर रहे हैं जैसे वह सरकार का अंग हो. फर्जी मीट की दुकानों के संबंध में यह बात देखने में आई थी कि पुलिस से अधिक एक्शन में भगवा बिग्रेड थी. उस समय मसला हिन्दुत्व का था ऐसे में बात थम गई. अब भाजपा के नेताओं का कोई गलत सलूक कोई स्वीकार नहीं कर रहा. योगी सरकार की छवि कमजोर पड़ती जा रही है. हर घटना में त्वरित प्रतिक्रिया देने वाले भाजपा संगठन और सरकार की टीम के चुप रहने से विरोधियों को पौ बारह हो रही है. चारू निगम प्रकरण में सरकार फैसला लेने में जितना देर लगायेगी मसला उतना ही उलझता जायेगा.