महागठबंधन के जरिये बिहार में सत्ता बचाने वाले जनता दल यूनाइटेड यानि जदयू ने उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में भी महागठबंधन बनाने की कवायद शुरू कर दी है. जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने जदयू नेताओं की बैठक में इस मसले पर विचार विमर्श किया. जदयू के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश निरंजन ‘भैया जी’ ने बताया कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव भले ही दूर हो पर जदयू ने चुनावी तैयारी शुरू कर दी है. जदयू का प्रयास होगा कि वोटों को बिखरने से रोका जाये. बिहार में महागठबंधन तोडने वाले समाजवादी पार्टी प्रमुख के नेता मुलायम सिंह यादव के प्रति जदयू की तल्खी बरकरार है.

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने सापफतौर से कहा कि उत्तर प्रदेश में बनने वाले महागठबंधन में सपा नेता मुलायम का कोई रोल नहीं होगा. महागठबंधन से बाहर जाकर मुलायम ने खुद दरवाजे बंद कर लिये हैं. जदयू को यह पता है कि बिहार की तरह उत्तर प्रदेश की राह आसान नहीं है.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में वोटों का बिखराव रोकने के लिये सपा और बसपा का साथ होना जरूरी होगा. यह दोनो ही दल महागठबंधन का हिस्सा नहीं बन सकते. कांग्रेस इस महागठबंधन की मुख्य धुरी बन सकती है. कांग्रेस के साथ जदयू और राजद यानि लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल, चौधरी अजीत सिंह का लोकदल महागठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं. कांग्रेस जिस तरह से क्षेत्रीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी को रोकने का काम कर रही है उससे साफ लगता है कि उत्तर प्रदेश में भी महागठबंधन के मजबूत प्रयास होंगे. उत्तर प्रदेश में बहुत उलझे और जटिल मुद्दे हैं. विधानसभा की चुनावी लडाई तीन दलों सपा-बसपा और भाजपा में मुख्य मुकाबला होगा. ऐसे में अगर महागठबंधन इस मुकाबले में हिस्सेदारी बनाने में सफल हो गया तो वह लडाई को किसी भी तरफ मोडने में सफल हो सकता है.

उत्तर प्रदेश के वर्तमान हालात किसी भी दल के पक्ष में नहीं हैं. सपा सरकार के बहुत सारे उपायों के बाद भी जनता में सरकार के कामकाज से कोई खुश नहीं है. भाजपा के पक्ष में लोकसभा चुनावों में जो हवा बनी थी वह अब कमजोर पड चुकी है. मायावती की बसपा के पक्ष में भी कोई लहर नहीं है. ऐसे में अगर महागठबंधन सही नेता और गठजोड के सहारे विधानसभा चुनावों में लडाई को लडती है तो उसे भी सीधी लडाई में शामिल होने का मौका मिलेगा.

कांग्रेस पर ऐसी लडाई के सहारे ही भाजपा को चित्त करना चाहती है ऐसे में उसका अनुभव छोटे दलों के लिये मददगार साबित हो सकता है. उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले गठबंधन के गणित को कांग्रेस पश्चिम बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में परखना चाहती है. लोकसभा चुनावों में कांग्रेस विरोध की आंधी का वेग धीरे धीरे कम हो रहा है. कांग्रेस इसका लाभ उठाकर भाजपा के खिलापफ नये गठजोड लाकर राजनीतिक सफलता हासिल करने की फिराक में है.

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