500 और 1000 के नोट बंद कर कालेधन के खिलाफ लड़ाई का एलान करने वाली भाजपा की केन्द्र सरकार आम जनता की परेशानियों को देखते हुये दबाव में आ गई है. पहले 3 दिन तक 500 और 1000 के नोट स्वीकार करने की बात करने वाली केन्द्र सरकार ने अब यह समय सीमा बढाकर 14 नवम्बर तक कर दी है.

8 नवंबर की रात को 500 और 1000 के नोट बंद होने की घोषणा के बाद पूरे देश में अफरातफरी मच गई. केन्द्र सरकार को यकीन था कि 2-3 दिन में सब व्यवस्था पटरी पर आ जायेगी.

बैंक की एटीएम व्यवस्था फेल होने के बाद बैंको पर उमड़ी भीड को संभाल पाना मुश्किल हो गया. जिससे जनता का गुस्सा सरकार पर भड़कने लगा. माहौल को अपने खिलाफ देखते हुये केन्द्र सरकार ने 500 और 1000 के पुराने नोटों का सरकारी संस्थानों पर संचालन के लिये 2 दिन का और समय दे दिया.

असल में केन्द्र सरकार का यह लगा था कि यह नोट बंद होने से बड़े पैमाने पर कालाधन सामने आ जायेगा. कालाधन तो पीछे रह गया बचत के रूप में बड़े नोट रखने वाले लोग परेशान होकर सड़को पर उतर आये. बचत के रूप में लोगों ने अपने पास बड़े नोट रखे थे. अब यह लोग नोट के बंद होने से परेशान होकर बैंको की लाइन में खड़े हो गये.

ऐसे लोगो की जितनी संख्या दिख रही है उससे कही अधिक लोग घरो में परेशान हैं. सबसे अधिक परेशान वह गरीब तबका है जिसके पास बैंक खाता नहीं है. पढ़ा लिखा नहीं है. ऐसे लोग शोषण का शिकार हो रहे हैं. यह लोग अपने बड़े नोट बट्टे पर चलाने को मजबूर हैं. ऐसे लोगों में मजदूर, करीगर, गांव में रहने वाले लोग सभी शामिल है. एक बड़ा तबका ऐसी महिलाओं का है जो अपनी जरूरत के लिये पैसे घर वालों से छिपा कर रखती थी. सरकार ने ऐसे लोगों की जरूरतों का पहले कोई ख्याल नहीं रखा.

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