सरिता विशेष
वैसे तो उत्तर प्रदेश में विधनसभा चुनावों का समय आ रहा है. सभी राजनीतिक दल इसकी तैयार में लग गये है. उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग भी चुनावी तैयारी में जुट गया है. बाल आयोग ऐसे 50 बच्चों को तैयार कर रहा है जो अपने अधिकार और मुद्दों को लेकर जागरूक है. यह बच्चे अपनी मांगों को लेकर एक ड्राफ्ट तैयार कर रहे है. इसे लेकर यह बच्चे हर राजनीतिक दल के प्रमुखों लोगों से मिलेगे. बच्चों मांग वाले बिन्दुओं को चुनावी घोषणापत्रा में शामिल करने की मांग करेगे. उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ‘एवरी लाॅस्ट चाइल्ड मिशन’ पर काम कर रहा है. जिससे समाज के अंतिम बच्चे तक को उसका अधिकार दिलाया जा सके. इस मिशन में शामिल बच्चे बाल आयोग की अध्यक्ष जूही सिंह के साथ उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक से मिलने राजभवन गये. बच्चों ने अपना मांग पत्रा राज्यपाल को दिया.
 
बाल आयोग की अध्यक्ष जूही सिंह ने जब से अपना पदभार संभाला बच्चों को लेकर नयेनये काम करने में लगी रही. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्राी अखिलेश यादव के साथ बच्चों की बाल संसद का आयोजन किया. संसद डिपंल यादव के साथ बच्चों के न्यूट्रीशन, पोषण कार्यक्रम को आगे बढाया. जूही सिंह ने बाल संरक्षण गृहों का निरीक्षण करने के काम को पूरे प्रदेश में किया. जूही सिंह उत्तर प्रदेश के जिस शहर जाती थी वहां की संस्थाओं से मिलकर बच्चों की बेहतरी के लिये काम करती थी. कम समय में बाल आयोग की पूरी टीम के साथ बच्चों को एक मुकाम दिलाने का काम किया. ‘सेव द चिल्ड्रेन’ संस्था ने एक साल की सर्वे रिपोर्ट में पाया कि केवल राजधनी लखनउ में ही 10 हजार 771 स्ट्रीट चिल्ड्रेन है. इनमें 30 प्रतिशत लडकियां है. इनमें से 13 से 18 साल की बच्चियां हयूमन ट्रैफकिंग गिरोह के निशाने पर रहती है.
 
 
‘सेव द चिल्ड्रेन’ संस्था की अंजलि सिंह ने कहा कि इन बच्चों को समाज की मुख्यधरा में शामिल करना किसी चुनौती जैसा है.बाल आयोग की अध्यक्ष जूही सिंह ने कहा कि इतने सारे बच्चों को सडक पर होना चिंता का विषय है. मुख्यमंत्राी ने इसको संज्ञान में लिया है. सरकार बहुत सारी योजनाओं में इनको अधिकार देने का काम कर रही है. यह समस्या एक दिन की नहीं है.अगर पहली की सरकारों ने बच्चों के मुददो पर काम किया होता तो हालात यह नहीं होते. जूही सिंह ने ‘एवरी लाॅस्ट चाइल्ड मिशन’ का ब्रांड एम्बेंसडर मिस ग्रैंड इंटरनेशनल वर्तिका सिंह को बनाया है. राज्यपाल ने बाल आयोग की इस पहल की सराहना की. बाल आयोग से तैयार 50 बच्चे अपनी मांगों को लेकर चुनाव के पहले सभी नेताओं से मिलकर बच्चों की मांग को चुनावी मुददा बनाने का दबाव बनायेगे.