सरिता विशेष

दिल्ली की राजनीति शुरू से ही पूर्वांचल कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड के लोगों को लुभाने व उन्हें अपने पाले में करने की रही है. इस की वजह यह है कि यहां बड़ी तादाद में इन राज्यों के लोग रहते हैं और दिल्ली में किस की सरकार बनेगी, यह बहुतकुछ इन के डाले गए वोटों पर भी निर्भर करता है. अब चूंकि दिल्ली में नगरनिगम चुनाव होने हैं, इसलिए भारतीय जनता पार्टी ने भी बड़ा दांव खेलते हुए भोजपुरी गायक व उत्तरपूर्व दिल्ली से सांसद मनोज तिवारी को दिल्ली का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है. उधर कांग्रेस में कद्दावर नेता महाबल मिश्रा की गिनती भी पूर्वांचल नेताओं में होती है.

आम आदमी पार्टी ने तो ‘पूर्वांचल शक्ति’ नाम से एक प्रकोष्ठ बनाया है और इस की बागडोर कभी मौडलिंग और शौर्ट फिल्मों में कलाकार और फिल्मकार की भूमिका निभाने वाले नीरज पाठक को सौंप दी, जो अभी आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, पूर्वांचल शक्ति हैं. नीरज पाठक की पैदाइश बिहार के मधुबनी जिले के एक गांव रांटी की है. इन्होंने स्कूली शिक्षा के बाद की पढ़ाई दिल्ली में रहते हुए की.

पेश हैं, नीरज पाठक से की गई बातचीत के खास अंश:

एक मौडल, कलाकार व फिल्मकार की राजनीति में कैसे ऐंट्री हुई?

अन्ना आंदोलन से प्रभावित हो कर जब मैं इस आंदोलन का हिस्सा बना, तब अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया के संपर्क में आया. यहीं से राजनीति की एबीसीडी शुरू हुई. इस से पहले मैं मौडलिंग करता था. कई शौर्ट फिल्मों में ऐक्टिंग की और डायरैक्शन भी किया.

भाजपा ने हाल ही में भोजपुरी गायक व उत्तरपूर्व दिल्ली से सांसद मनोज तिवारी को दिल्ली का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. आप क्या कहेंगे?

देखिए, भाजपा हमेशा से दिल्ली में पूर्वांचलियों को सिर्फ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल कर आम जनता को बरगलाती रही है. यही वजह है कि लोगों ने पिछले चुनावों में भाजपा को नकारा.

मनोज तिवारी को अध्यक्ष बना कर पूर्वांचल वोट को अपनी तरफ करने की कोशिश है, पर दिल्ली की जनता केंद्र और यहां की राजनीति को समझ चुकी है.

नोटबंदी के ऐलान से तो लोगों की कमर ही तोड़ दी गई. उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड वगैरह राज्यों के लाखों लोग जो दिल्ली में रह कर रोजीरोटी कमाते थे, अब मजबूरन बेरोजगार हो कर गांवों में लौट चुके हैं और उन का भविष्य अंधकारमय हो चुका है.

नोटबंदी पर तो आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल केंद्र की भाजपा सरकार और नरेंद्र मोदी की तीखी आलोचना भी करते रहे हैं. इस से क्या फायदा होगा?

जी, बिलकुल. 8 नवंबर, 2016 की रात 8 बजे जब नरेंद्र मोदी देश को संबोधित करने वाले थे, तो लगा था कि कुछ अच्छे ऐलान करेंगे, पर उन्होंने तो नोटबंदी का ऐलान कर देश को ही गड्ढे में पहुंचा दिया. देश कई साल पीछे चला गया.

मैं आप को बताना चाहूंगा कि आल इंडिया मैन्यूफैक्चरर्स और्गनाइजेशन (एआईएमओ) के एक अध्ययन के मुताबिक, 8 नवंबर से 12 दिसंबर के बीच लाखों लोगों की नौकरियां चली गई हैं. मैन्यूफैक्चरिंग उद्योग में तो 35 फीसदी नौकरियां खत्म हो गई हैं. कई उद्योगधंधे बंद हो गए हैं और कई बंद होने के कगार पर हैं.

इस कारोबार से पूर्वी क्षेत्र के कई राज्यों के कामगार जुड़े थे, जिन की नौकरी अब जा चुकी है. और तो और इस कदम से न तो भ्रष्टाचार खत्म हुआ, न ही भ्रष्टाचारी पकड़े गए. उलटे, बैंकों और एटीएम में लोग घंटों लाइन में लगे रहे. बैंकों से नोट गायब थे और बाहर नोटों की कालाबाजारी हो रही थी. दुखद बात तो यह है कि इस नोटबंदी से लाइनों में खड़े देशभर में तकरीबन 150 लोगों की मौत भी हो गई.

राजनीतिक पार्टियों के लिए पूर्वांचल के लोग दिल्ली में क्या अहमियत रखते हैं?

देखिए, पहले की सरकारों ने दिल्ली में पूर्वांचल के लोगों के लिए कुछ नहीं किया. उन्हें सिर्फ सब्जबाग दिखा कर उन का वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया. आम आदमी पार्टी ने सब के साथ पूर्वांचल के लोगों को भी तवज्जुह दी. यही वजह है कि पिछले विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल के 12 लोगों को पार्टी ने टिकट दिया और वे सभी जीत भी गए. दिल्ली सरकार में अभी 2 मंत्री पूर्वांचल के हैं.

मैं चाहूंगा कि दिल्ली में पूर्वांचल के लोग सिर उठा कर जीएं और अपने हुनर, अपनी मेहनत से आगे बढ़ें.

आप को लगता है कि मनोज तिवारी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बनाने के पीछे आगामी नगरनिगम चुनाव में भाजपा को खोई इज्जत मिल जाएगी?

ऐसा कुछ नहीं होगा. मनोज तिवारी भोजपुरी में गाते अच्छा हैं. ऐक्टिंग भी ठीकठाक कर लेते हैं, पर यह ऐक्टिंग जनता के बीच काम नहीं आएगी. दिल्ली की जनता विकास चाहती है और खुद मनोज तिवारी उत्तरपूर्व दिल्ली से सांसद रहते हुए अपने इलाके से ही गायब रहे हैं. उन्होंने तो अपने एमपी फंड का भी सही इस्तेमाल नहीं किया है.

केंद्र की जिस भाजपा सरकार ने नोटबंदी से जनता को बरगलाने की कोशिश की है, मैं यह बताना चाहूंगा कि इस में ही घोटाले हुए. हमारे यहां जो नोट छपते हैं, उस के कागज विदेश से आते हैं. इस में ही लाखों करोड़ रुपए के घोटाले हुए. 8 से 12 हजार करोड़ रुपए तक की तो दलाली खाई गई.

जनता की गाढ़ी कमाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खा गए और उधर बड़ेबड़े कारोबारियों में बांट दिए. दिल्ली के नगरनिगम चुनाव में भाजपा का नामोनिशान मिट जाएगा.

एक तरफ तो भाजपा मनोज तिवारी को दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बनाती है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा के बड़े नेता विजय गोयल दिल्ली से बिहारियों को खदेड़ देने की बात करते हैं.

पिछले लोकसभा चुनाव में मनोज तिवारी के दिल्ली की औरतों पर किए गए ट्वीट पर खासा बवाल मचा था. आम आदमी पार्टी इसे महिला विरोधी क्यों मानती है?

देखिए, राजनीति अपनी जगह है. पर हम सब को औरतों के प्रति आदर भाव रखना चाहिए. अपने ट्वीट में मनोज तिवारी ने दिल्ली की औरतों को गोलगप्पे खाने वाली और खा कर दोने की तरह फेंकने वाली कहा था. यह दोहरी मानसिकता नहीं तो और क्या है?

क्या मौडलिंग व फिल्मों की ओर आप की फिर लौटने की इच्छा होती है?

फिलहाल तो पार्टी ने मुझे जो जिम्मेदारी दी है, उसी पर ध्यान दे रहा हूं. लेकिन मौडलिंग व फिल्मों से मोह अभी तक गया नहीं है.

और क्याक्या पसंद है आप को?

भारत में केरल बारबार जाना चाहता हूं. वहां की खूबसूरती बेजोड़ है. खाने में कुछ भी खा लेता हूं, बशर्ते पौष्टिक हो. अच्छेअच्छे कपड़े पहनने का शौक रखता हूं.