नोटबंदी में सरकार छोटे कारोबारियों को दरकिनार कर बड़े कारोबारी घरानों को लाभ पहुंचा रही है. यह नोटबंदी नहीं यह गलाबंदी, व्यापार बंदी और सरासर लूट है. प्रधानमंत्री आये दिन अपने बयान बदलते रहते हैं. नोटबंदी में सबसे अधिक समस्या अगर किसी वर्ग को हुई है तो वह कारोबारी वर्ग है. छोटा, बडा मझोला एक भी ऐसा कारोबारी नहीं है जिसकों नुकसान न हुआ हो. नोटबंदी पर अपने विचार व्यक्त करते उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बनवारीलाल कंछल ने यह बातें मेरठ में प्रांतीय कार्यसमिति में कही.

बनवारीलाल कंछल ने अपनी योजना की जानकारी देते कहा कि 26 दिसम्बर को सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर जिलाधिकारी के जरीये प्रधानमंत्री और केन्द्रीय वित्तमंत्री को कारोबारियों की समस्याओं से संबंधित ज्ञापन दिया जायेगा.

नोटबंदी में खामियों की खिलाफ अपने अभियान में बनवारीलाल कंछल ने कहा कि कारोबारी कालेधन और आतंकवाद के पूरी तरह से खिलाफ हैं. परेशानी की बात यह है कि सरकार नोटबंदी को लेकर कारोबारियों को होने वाली परेशानियों को नहीं देख रही है. नोटबंदी में प्रदेश का कारोबार 40 से 80 फीसदी तक घट गया है. कारोबारियों की उधारी डूब रही है. कारखाने बंद हो रहे हैं. कारोबारी सबसे ज्यादा भारतीय जनता पार्टी का समर्थन करते थे. इसके बाद भी जब जब भाजपा की सरकार आई है कारोबारियों का उत्पीडन हुआ है.

केन्द्र सरकार एक तरफ बिग बाजार जैसी बड़ी कंपनियों को नोट बदलने की इजाजत देती है दूसरी ओर छोटे व्यापारियों को परेशान करती है. इससे साफ है कि केन्द्र सरकार बड़े कारोबारियों का हित साध रही है. कैशलेस व्यवस्था के लिये धीरे धीरे काम करने की जरूरत थी. इस तरह से औन लाइन दुकानदारी करने वाली बड़ी कंपनियों को मुनाफा होगा. छोटे कारोबारी के हित मारे जायेंगे. कैशलेश व्यवस्था में पेटीएम जैसी मल्टीनेशनल कंपनी का मुनाफा करोड़ों में बढ़ गया.

बनवारीलाल कंछल ने कहा कि देश की प्रगति में छोटे कारोबारी का भी बड़ा हाथ है. बहुत सारे रोजगार वह देता है.कारोबार का नुकसान होने से देश में बेरोजगारी बढेगी. इसका प्रभाव केवल कारोबारी पर ही नहीं किसान, मजदूर, और कर्मचारी सब पर पड रहा है. बैकों से पैसा निकालने की लिमिट तय होने से कारोबारी अपनी जरूरत भर का पैसा ही नहीं निकाल पा रहा है. ऐसे में उसका व्यापार प्रभावित हो रहा है. बनवारीलाल कंछल ने कहा कि कैशलेश व्यवस्था जबरदस्ती न सौंपी जाये. इसके लिये पूरे देश में माहौल बनाया जाये. इसके प्रयोग पर लगने वाले चार्ज को खत्म किया जाये. सरकार अगर कालेधन के खिलाफ है तो सभी राजनीतिक दलों को भी आयकर कानून के दायरे में लाया जाये.