सरिता विशेष

मध्य प्रदेश के सामान्य प्रशासन मंत्री लाल सिंह आर्य के खिलाफ भिंड जिले की एक अदालत ने हत्या के एक चर्चित मामले में अपराधी मानते उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है, इसके बाद भी मुख्य मंत्री शिवराजसिंह चौहान उन्हे बर्खास्त नहीं कर रहे हैं. इसे लेकर प्रदेश कांग्रेस ने आक्रामक रुख अख़्तियार कर रखा है, लेकिन हाल फिलहाल उसकी आवाज नक्कारखाने में तूती जैसी साबित हो रही है. कांग्रेसी सीएम हाउस और राजभवन पर धरने प्रदर्शन कर चुके हैं और अब जनता के बीच जाने की तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि मुद्दे में दम है.

विधान सभा में कांग्रेसी नेता अजय सिंह इस सुनहरे मौके को भुनाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं. उनकी इन दलीलों में वजन तो है कि आर्य का मंत्री पद पर बने रहना असंवैधानिक है और भाजपा अब मनमानी पर उतारू हो आई है. राज्यपाल ओमप्रकाश कोहली के नाम दिये ज्ञापन में कांग्रेस ने साफ कहा है कि राज्य मंत्रिमंडल का ऐसा सदस्य जो हत्या का आरोपी हो पद पर कैसे रह सकता है. संवैधानिक प्रमुख होने के नाते राज्यपाल को यह अधिकार है कि वे लाल सिंह आर्य को मंत्रिमंडल से बरख्वास्त करें.

अपनी बात में दम लाने अजय सिंह ने ऐसे ही दो पुराने मामलों का हवाला देते कहा है कि उमा भारती के सीएम रहते कर्नाटक की हुबली द्वारा जारी एक समन जारी होने पर उन्होंने पद से त्यागपत्र दे दिया था और एक अन्य मंत्री अनूप मिश्रा से भाजपा ने इस्तीफा ले लिया था जबकि वे सीधे आरोपी नहीं थे.

यह है मामला

13 अप्रेल 2009 की रात लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेसी नेता माखनलाल जाटव की गोहद इलाके के छरेंटा गांव में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. जाटव के परिजनों ने लाल सिंह आर्य का नाम बतौर मुजरिम लिया था लेकिन पुलिस ने उन्हें अभियुक्त नहीं बनाया था. इसके बाद जांच में सीबीआई ने भी आर्य को क्लीन चिट दे दी थी. बाद में जाटव के परिजनों ने धारा 319 के तहत आवेदन लगाया था जिसकी सुनवाई के बाद अदालत ने धारा 302 के तहत आर्य को मुजरिम करार देते वारंट भी जारी कर दिया था.

हमलावर हुई कांग्रेस

इस पर वजूद की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस ने एकजुट होकर लाल सिंह आर्य को बर्खास्त करने की मुहिम छेड़ दी है, पर सीएम हाउस पर प्रदर्शन करते वक्त उन्हें इंसाफ की जगह पुलिस की लाठियां मिलीं तो वे और उग्र हो उठे और राजभवन पहुंच गए, लेकिन वहां भी कोई सुनवाई नहीं हुई तो इसे जन आंदोलन बनाने की तैयारी उसने शुरू कर दी है.

दिक्कत में शिवराज

आखिर शिवराज सिंह चौहान क्यों लाल सिंह आर्य को नहीं हटा रहे, इस बात को लेकर अफवाहों और अटकलों का बाजार गरम है. आम राय यह बन रही है कि आर्य के पद पर बने रहने से भाजपा की इमेज खराब हो रही है. दागियों से परहेज करने का दम भरने वाली पार्टी क्यों दिलेरी नहीं दिखा पा रही, जबकि उसके पास अच्छा मौका था कि वह आर्य को मंत्री पद से हटकर एक मिसाल कायम कर सकती थी. इस बात का जवाब साफ है कि अब नैतिकता, अनैतिकता और अच्छे,  बुरे के माने अपनी मनमर्जी से तय कर भाजपा और शिवराज सिंह आम लोगों की भावनाओं को दरकिनार कर रहे हैं जो उन्हें आगे चलकर महंगा भी पड़ सकता है.

उधर समर्थन मिलते देख कांग्रेस जोश में है और सूबे भर में आंदोलन की तैयारियां कर रही है. शिवराज सिंह को लग रहा है कि अगर कांग्रेस के दबाब में आकर आर्य को बाहर का रास्ता दिखाया तो ज्यादा किरकिरी होगी. देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इसे जन आंदोलन बना पाने में कामयाब हो पाती है या नहीं और ज्यादा बवंडर मचा तो शिवराज उससे निबटने कौन सा ऐसा रास्ता चुनते हैं जिससे सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे. अगर अदालत ने लाल सिंह आर्य की गिरफ्तारी को लेकर और कडा रुख दिखाया तो फिर जरूर भाजपा को वही करने मजबूर होना पड़ेगा जिससे आज वह बचने की कोशिश में लगी है. अगले साल विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस को खोई जमीन हासिल करने एक अच्छा मौका मिल गया है, जिससे वह सरकार को कटघरे में खड़ा कर पाई तो फायदे की फसल भी काटने का मौका उसे मिलेगा.