उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अब समझ आ रहा है कि सबकुछ ठीकठाक नहीं है. बिहार के नतीजों ने कम से कम यह तो जता ही दिया है कि 2017 में उत्तर प्रदेश में कोई एक पार्टी अकेले दम पर सत्ता में नहीं आ सकती. सपा व बसपा के गठबंधन की चर्चाओं या अफवाहों के बीच अखिलेश ने एक विचित्र सा फार्मूला यह दिया है कि अगली बार उन के पिता मुलायम सिंह पीएम और राहुल गांधी डिप्टी पीएम बनें.

सूत न कपास जुलाहों में लट्ठमलट्ठा सी इस बात के कोई दीर्घकालिक या तात्कालिक माने किसी ने नहीं निकाले, उलटे, बेचारगी से अखिलेश की तरफ देख सोचा कि वे कब परिपक्व होंगे. 5 लोकसभा सीटों के दम पर सपा के उपमुखिया सब से बड़ी कुरसी के सपने देख रहे हैं तो उन के सोचने की दाद देनी ही पड़ेगी कि सोचने में कंजूसी क्यों, सोचो तो बड़ा ही सोचो. गनीमत है, उन्होंने 2019 का केंद्रीय मंत्रिमंडल घोषित नहीं किया.

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