भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दलित के घर खाना खाया. इस घटना को पूरे देश में बिना सच को जाने प्रचारित किया गया. भाजपा ने भी इस बात का कहीं कोई खंडन नहीं किया. मीडिया से लेकर राजनीतिक पार्टियों तक में अमित शाह के इस भोजन पर सियासी तूफान खडा हो गया. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से लेकर बसपा नेता मायावती और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य तक ने अमित शाह के दलित के घर भोजन करने पर अपनी अपनी प्रतिक्रिया दी. यह माना गया कि अमित शाह ने दलित के घर भोजन कर प्रदेश की राजनीति में नये संकेत दिये है.

सच्चाई यह है कि अमित शाह ने दलित के घर नहीं बल्कि अति पिछडे वर्ग में आने वाले बिंद के घर भोजन किया. वाराणसी से 28 किलोमीटर दूर जोगियापुर गांव की बिंद बस्ती के लोग यह जानकर बहुत खुश थे कि गांव के लोगों को अमित शाह के साथ खाना खाने का मौका मिलेगा.

बिंद बस्ती में अमित शाह का खाना गिरिजापति बिंद के घर तय किया गया. अमित शाह की आगवानी के लिये गांव की औरतों ने गाना गाया. गांव के खराब रास्ते पर मिट्टी के उपर लाल कारपेट डाल दिया गया. दरवाजे पर 2 दर्जन से अधिक चारपाई डाली गई और उनपर नई रंगबिरंगी चादर बिछा दी गई. केले के पेड से प्रवेशद्वारा बनाया गया. छोटे से घर में कई महिलाये एक साथ खाना बना रही थी.

‘जगजीत लेहिए मोदी व अमित भइया’ आर्केस्ट्रा पर गाना बज रहा था. गांव में शादी जैसा महौल बना हुआ था. दोपहर 11 बजकर 45 मिनट पर अमित शाह बिंद बस्ती पहुंचे तो वहां उनके साथ खाने वालों की भीड लगी थी. यह देख कर भाजपा नेताओं के लिये हालात संभालना मुश्किल हो गया. ऐसे में अमित शाह के साथ खाना खाने वालों में गांव के 2 नाम शामिल किये गये. गिरिजापति बिंद और दीनानाथ भास्कर ने अमित शाह के साथ भोजन किया. अमित शाह गांव में 40 मिनट रूके.गांव के बाकी लोगों ने अमित शाह के चले जाने के बाद स्थानीय भाजपा नेताओं के साथ भोजन किया.

अमित शाह ने गिरिजापति बिंद की बेटी किरन के बनाये खाने की तरीफ करते कहा कि लौकी और नेनुआ की सब्जी बहुत अच्छी बनी है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य ने कहा कि अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ता के घर भोजन किया. यह भाजपा की पंरपरा में शमिल है. इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिये. बिद और मल्लाह जातियां अति पिछडे वर्ग में आती है. इनके यहां अगडी जातियां हमेशा से भोजन करती रही हैं. इनसे किसी तरह का छुआछूत का व्यवहार नहीं होता है. ऐसे में भाजपा अध्यक्ष के भोजन करने को मुद्दा बनाने का काम क्यो किया गया समझ से बाहर आने वाली बात है. भाजपा ने इस बात पर पूरी चुप्पी साध ली जिससे यह बात साफ हो गई कि वह भी दलित के घर खाने के हो रहे प्रचार में ही अपना भला देख रही है.