आम लोगों ने सरकार को क्लीन चिट यह कहते हुये दे दी है कि अगर यह असली एनकाउंटर था तो पुलिस को सौ और अगर फर्जी था तो दो सौ सेल्यूट, क्योंकि आतंकवादी तो असली थे. भोपाल की सेंट्रल जेल से दिवाली की देर रात कोई 2-3 बजे सिमी के 8 कैदी फिल्मी स्टाइल में फरार हुये थे और जाते जाते एक हवलदार रमाशंकर यादव की हत्या कर गए थे. इसके बाद बड़े नाटकीय तरीके से पुलिस वालों ने महज 8 घंटे बाद आठों संदिग्ध कैदियों या आतंकियों को इंटखेड़ी गांव मे हुई मुठभेड़ में मार गिराया.

कहानी यहां खत्म नहीं हुई, बल्कि यहां से शुरू हुई, जब कांग्रेस ने इस एनकाउंटर और कैदियों के यूं इतमीनान से फरार होने पर सवाल दागना शुरू कर दिये कि कैदियों के पास हथियार कहां से आए, उन्हे नए कपड़े किसने मुहैया कराये, उन्हे जूते किसने दिलाये, ऐसे कई सवाल जो जेल महकमे में पसरी घूसखोरी और लापरवाही को उजागर करते हुये थे, का जबाब भाजपा ने यह कहते दिया कि इस पर राजनीति न की जाये. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तो ऐसी राजनीति पर लानत दे डाली जो शहादत का सम्मान न करे.

वैसे भी घटना के 24 घंटे बाद माहौल अपने पक्ष मे देख वे उत्साहित थे कि लोगों ने मुद्दे की बात को ज्यादा तूल नहीं दिया और मामला जैसा कि वे और भगवा खेमा चाहता था अघोषित रूप से देश प्रेम और राष्ट्र भक्ति की आड़ में हिन्दुत्व में सिमट कर रह गया. इसलिए ताबड़तोड़ तरीके से इस एनकाउंटर को अंजाम देने बाली पुलिस टीम पर नगद इनाम की बौछार कर दी गई. शहीद के खिताब से नवाज दिये गए मृत हवलदार को दौगुनी श्रद्धा निधि दी गई, तो उसका बेटा चुप हो गया जो एक दिन पहले तक कह रहा था कि जेल में पैसे लेकर ड्यूटियां लगाई और रद्द की जाती हैं.

रहे सहे सवालों और संदेहों के बाबत जांच की ज़िम्मेदारी एनआईए को सौंप दी गई. जेल के कुछ मुलाज़िम और अफसर तो घटना के तुरंत बाद बर्खास्त किए ही जा चुके थे. अब सब कुछ ठीक ठाक और नियंत्रण में है, क्योंकि अब ऐसा कोई वीडियो वायरल नहीं हो रहा है, जिससे यह लगे  कि यह मुठभेड़ पूर्व नियोजित या फर्जी थी. ऐसे वायरल हुये वीडियो, जो पुलिस का सहयोग करने वाले गांव वालों ने शौकिया तौर पर बना डाले थे, गायब हो चले हैं और गुणगान पुलिस वालों का हो रहा है . साफ दिख रहा है कि भोपाल के इस संदिग्ध एनकाउंटर का हश्र भी व्यापम घोटाले जैसा होने के इंतजाम कर दिये गए हैं, जिसके तमाम बड़े आरोपी सीबीआई जांच के दौरान जमानत पर बाहर आए और ठाट से गुजर कर रहे हैं. साफ यह भी दिख रहा है कि केंद्रीय जांच एजेंसियां राज्य सरकार की मदद के लिए नियुक्त की जाती हैं.

कांग्रेस प्रभावी तरीके से इस मुठभेड़ के बाबत सवाल नहीं उठा पाई तो उत्तर प्रदेश से बसपा प्रमुख मायावती को कहना पड़ा कि कहीं  पुलिस का दुरुपयोग तो मनमाने तरीके से नहीं हो रहा, मुस्लिम वोटों को अपने पाले में लाने की जुगत में लगी मायावती को इस बयान से कितना नफा होगा, यह तो आने वाले वक्त मे पता चलेगा, लेकिन भाजपा को हिंदुओं का अपार समर्थन मिल रहा है, जो यूपी विधान सभा चुनाव में मुद्दों के टोटों से जूझ रही है. लोग उत्तेजित और आंदोलित हैं कि मुस्लिम आतंकियों का सफाया हो रहा है, कैसे और क्यों हो रहा है इससे उन्हे सरोकार नहीं यानि माहौल ऐसा बनाया जा चुका है कि राष्ट्र भक्ति और देश प्रेम अब धर्म का दूसरा नाम हो गयें हैं, जो इस बाबत सवाल करे वह गद्दार है देशद्रोही हैं, इसलिए मत पुछो कि जो हुआ वो लौकतान्त्रिक था या नहीं, विधि सम्मत था या नहीं. रही बात भोपाल के इस सर्जिकल एनकाउंटर की, तो जेल के गद्दारों पर खामोशी औढ़ना लोगों की मजबूरी हो गई है. सिर्फ देशभक्ति जताने इसे असली मानते कोई सवाल न पूछना या दलील न देने की गलती की सजा भुगतने के लिए लोगों को तैयार रहना चाहिए.