शराबबंदी आंदोलन विधानसभा चुनावों में प्रमुख मुद्दा बन सकता है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उत्तर प्रदेश में इसको हवा देनी शुरू कर दी है. दक्षिण में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने भी शराबबंदी की जरूरत पर बल दिया है. पूरे देश के समाजिक संगठन इस बात की जरूरत को समझते हुये इसको चुनावी मुद्दा बनाने के प्रयास में हैं. समाज सुधारक स्वामी अग्निवेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में शराबबंदी मुख्य मुद्दा हो सकती है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर भी यह दबाव पड़ रहा है कि शराबबंदी को लेकर वह अपनी राय दें.

इस संबंध में राय देते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि शराबबंदी से गन्ना किसानों को नुकसान होगा. मुख्यमंत्री यह कहना चाहते थे कि गन्ने से बनने वाली शराब की कीमत किसानों को मिलती है. उत्तर प्रदेश में चीनी मिले गन्ना किसानों को गन्ने का वही मूल्य देती हैं, जो उनको चीनी बनाने से मिलता है. यही वजह है कि सरकार को गन्ना किसानों को समर्थन मूल्य देना पडता है. इसके बाद भी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को दूसरे प्रदेशों के मुकाबले गन्ना मूल्य कम मिलता है.

चीनी मिले अगर गन्ने से तैयार होने वाले बाय प्रोडक्टस की कीमत जोड कर गन्ना मूल्य किसानों को देंगी, तो किसानों को 400 रूपये प्रति कुन्तल से उपर गन्ना मूल्य मिलने लगेगा. यह बात सच है कि शराबबंदी का असर उन चीनी मिलों पर पडेगा जो शराब बनाने का काम करती हैं.

जनता दल युनाइटेड के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष सुरेश निरजंन ‘भैयाजी’ कहते हैं ‘शराबबंदी से किसानों को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा. शराबबंदी से किसानों को लाभ होगा. शराब का बडी मात्रा में सेवन किसान करते हैं. शराबबंदी से समाज में अपराध कम होंगे, किसानों को बचत होगी, उनकी सेहत ठीक होगी, किसानों का समय बचेगा, खेतों में काम करने की क्षमता बढ़ेगी. वह घर परिवार के बीच समय दे सकेगा. ऐसे में शराबबंदी से गन्ना किसानों को यह दूसरे किसी किसान को नुकसान होने की बात गलत है. यह हो सकता है कि शराब कारोबारी और ठेकेदारों को नुकसान होगा. यह लोग भी अपना समय और पैसा दूसरे रोजगार में लगायेंगे. शराबबंदी का फैसला राजनीतिक इच्छाशक्ति से जुडा मुद्दा है. बिहार के मुख्यमंत्री ने जिस इच्छा शक्ति को दिखाया है, दूसरे प्रदेशों में भी यह होना चाहिये.’

शराबबंदी को लेकर तमाम तरह के छोटे बडे आंदोलन हर जगह चलते रहे हैं. समय के साथ इनको सरकार का सहारा मिलने लगा है. जिससे अब यह आन्दोलन बडे हो गये हैं. उत्तर प्रदेश देश का सबसे बडा राज्य है. विधानसभा चुनावों में शराबबंदी बडा मुद्दा हो सकता है. अभी कुछ दिन पहले एक संस्था के कार्यक्रम में राज्य के एक मंत्री को महिलाओं ने घेर लिया और उनपर दबाव डाला कि वह राज्य में शराबबंदी की बात करें. ऐसे में इस बात को अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्तर प्रदेश सरकार पर समय के साथ साथ शराबबंदी का दबाव बढेगा.

समाजवादी पार्टी को शराब कारोबारियों का सबसे बडा हितैषी माना जाता है. ऐसे में अब समाजवादी पार्टी को यह साबित करना होगा कि वह शराबबंदी को लेकर क्या सोचती है? मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का यह तर्क किसी के गले उतरने वाला नहीं है कि शराबबंदी से गन्ना किसानों को नुकसान होगा. स्वामी अग्निवेश कहते है कि चुनाव जैसे जैसे करीब आयेगे शराबबंदी बडा मुद्दा बनकर सामने आयेगा.