उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को प्रदेश के लोग प्यार से भैया कहते है. मुख्यमंत्री के समर्थक ही नहीं विरोधी तक उनके अच्छे स्वभाव की तारीफ दिल खोलकर करते है. इसके बाद भी सरकार की छवि जनता के बीच अच्छी नहीं बन पा रही है. प्रदेश में रहने वाले ज्यादातर लोग मानते है कि अखिलेश यादव अच्छे आदमी है पर उनके करीबी नेता, अफसर उनको सही बात सुनने और समझने का मौका नहीं देते है. ऐसे नेता और अफसर मुख्यमंत्री को यह समझाने में सफल हो रहे है कि पूरे प्रदेश में चारो तरफ उनकी जय जयकार हो रही है. मुख्यमंत्री के करीबी लोगों के ऐसे व्यवहार से प्रदेश की जनता ही नहीं खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पिता और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अघ्यक्ष मुलायम सिंह यादव भी परेशान दिखते है.

मुलायम सिंह यादव कई बार मंच से खुलेआम ऐसी बातें कह चुके है. अखिलेश यादव कहते है नेता जी पार्टी के संरक्षक है उनको आलोचना का पूरा हक है. मुख्यमंत्री अगर एक बार अपने करीबी अपफसरों और नेताओं से हकीकत समझ लेते तो पता चलता कि जनता में उनके स्वभाव की छवि भले ही अच्छी हो पर उनके कामकाज से कोई खुश नहीं है. इसका बडा कारण मुख्यमंत्री अखिलेश यादव नहीं उनके करीबी नेता और अपफसर है.

लखनऊ के विक्रमादित्य मार्ग स्थित समाजवादी पार्टी ने कार्यालय समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर की जयंती समारोह में बोलते हुये मुलायम सिंह यादव ने कहा कि कुछ मंत्री सिर्फ पैसा कमा रहे है. कई मंत्री तो सुधर गये हैं पर कई अभी बाकी हैं. मुलायम सिह यादव ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री को चुगलखोरों से होशियार रहना चाहिये. राजनीति में सुननी सबकी चाहिये पर  सबकी सुनकर जो सही हो वही करना चाहिये. मुलायम सिंह यादव सरकार बनने के समय से यह कह रहे है कि महिला नेताओं को पार्टी में आगे लाना चाहिये. वह सभी स्थल पर पीछे बैठी महिलाओं को देखकर नाराजगी जताते हुये बोले इनको पीछे क्यों बैठाया? अखिलेश मंत्रीमंडल में केवल 2 ही महिलायें मंत्री है. मुलायम पार्टी के कार्यकर्ताओं से मिलते हैं और उनसे सच बात कहने को कहते है. ऐसे में कार्यकर्ता जो बताते हैं उससे मुलायम को निराशा और दुख होता है. यह पीडा वह कई बार व्यक्त कर चुके है.

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पिता मुलायम की बात से इत्तेफाक तो रखते हैं पर उस पर अमल नहीं करते. मुख्यमंत्री तक जनता की कोई पहुंच नहीं है. जो लोग उन तक पहुंचते हैं वह मुख्यमंत्री को सच्चाई बताने की जगह पर तारीफ करते है. पार्टी और सरकार दोनो ही स्तर पर मुख्यमंत्री तक पहुंच रखने वाले लोग जनता के स्वर को मुख्यमंत्री तक पहुचने नहीं देना चाहते. मुख्यमंत्री से मिलना उनसे अपनी परेशानी कहना सरल नहीं रह गया है.

लखीमपुर खीरी जिले में 3 लडकियों का अपहरण होता है. फिरौती में 50 लाख रूपये मांगे जाते है. पीडित परिवार 5 लाख की फिरौती देकर अपनी लडकियों को छुडाता है. पुलिस तब सक्रिय होती है जब मुख्यमंत्री को इस घटना की जानकारी होती है. अफसर और मंत्री मोबाइल के अपने सीयूजी फोन खुद नहीं उठाते. ऐसे में कैसे जनता परेशानी कहेगी यह सोचने वाली बात है.