सरिता विशेष

आरएसएस यानि राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ फिल्म और फैशन की बहुत समर्थक नहीं रही है. कई बार वह इसके विरोध में भी खड़ी होती रही है. ऐसे में संघ प्रमुख मोहन भागवत का सिनेमा के अवार्ड फंक्शन में जाना और वहां पर आमिर खान को अवार्ड देना दिखता है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत कुछ बदल रहे हैं. आमिर खान के असहिष्णुता के बयान को को लेकर कुछ समय पहले संघ और उससे जुड़े संगठन बहुत नाराज थे. इन लोगों ने आमिर खान को देश छोड़ कर चले जाने का बयान तक दे डाला था. जब मोहन भागवत के हाथों आमिर खान को अवार्ड मिला तो उस वक्त पूरा नजारा बदला सा दिख रहा था. खुद आमिर खान कभी अवार्ड समारोह में नहीं जाते पर यहां आकर उन्होंने अपने पिछले रिकार्ड को तोड़ा है.

आमतौर पर संघ प्रमुख को ऐसे फिल्मी कार्यक्रमों में नहीं देखा जाता. संघ प्रमुख मोहन भागवत के यहां आने और अवार्ड लेने वाले लोगों को अवार्ड देने की पीछे की खास वजह भी है. यह अवार्ड फंक्शन भारत रत्न मशहूर गायिका लता मंगेशकर ने अपने पिता मास्टर दीनानाथ मंगेशकर की स्मृति में किया था. दीनानाथ मंगेशकर हिन्दू महासभा और संघ के स्वंयसेवक थे. ऐसे में संघ प्रमुख को इसमें अवार्ड देने के लिये बुलाया गया था. वैसे तो यह अवार्ड क्रिकेटर कपिल देव और वैजयंती माला को भी मिला पर चर्चा में आमिर खान ज्यादा रहे.

चर्चा की एक वजह यह भी है कि अखबारों के फिल्मी पन्ने पर किसी संघ प्रमुख को अवार्ड देते पहले नहीं देखा गया. संघ खुद को एक सांस्कृतिक संगठन मानता है. ऐसे में यह बहुत चर्चा का विषय नहीं है. संघ खुद ही अपने को इस तरह की गतिविधियों से दूर रखता है. इसलिये संघ प्रमुख मोहन भगवत के इसमें हिस्सा लेने से चर्चा होने लगी. चर्चा का सबसे बड़ा कारण आमिर खान और उनका एक वर्ग द्वारा किया गया विरोध भी था. लता मंगेशकर ने अपने पिता और संघ के बीच संबधों को बता कर यह जता दिया कि संघ प्रमुख के वहां आने की वजह पूरी फिल्मी नहीं थी.

संघ प्रमुख मोहन भागवत को उदारवादी सोच को बढ़ावा देने वाला माना जाता है. वह संघ को हर क्षेत्र में विस्तार देना चाहते हैं. राजनीति में किसी से परहेज न रखने की नीति के फलस्वरूप ही भाजपा ने अलग दलों से तालमेल और बाहरी नेताओं को पार्टी में शामिल करने का काम किया. यही नहीं मोहन भागवत की अपनी नीति के कारण ही संघ चुनावी तैयारियों से लेकर चुनाव में प्रचार प्रसार तक में मजबूती से भाजपा का साथ देता दिख रहा है. जिससे भाजपा को पूरे देश में काम करने और अपने प्रसार का मौका मिला सका है.

आज जहां दूसरे दलों के संगठन टूट रहे है वहीं पर संघ अपने मजबूत संगठन की ढाल लेकर भाजपा के साथ खड़ा है. जानकार लोग मानते हैं कि संघ की विस्तारवादी नीति का प्रभाव भाजपा पर भी पड़ेगा. भाजपा में संघ का दखल पहले के मुकाबले बढ़ेगा.