सरिता विशेष

देश की सीमा पर कश्मीर में बढ़ती आतंकी घटनायें और देश के अंदर बढ़ती नक्सलवादी घटनाओं को लेकर अब विरोधी ही नहीं, भाजपा के समर्थक भी केन्द्र सरकार के गृह मंत्रालय और केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से नाराज नजर आ रहे हैं. छत्तीसगढ में नक्सली हमले में 25 जवानों के शहीद होने और कश्मीर में स्कूली बच्चों के पत्थरबाजी में शामिल होने के कारण केन्द्र सरकार के असफल होने की बात सामने आ रही है. अब भाजपा के समर्थक भी सोशल मीडिया पर ऐसे संदेश देने लगे हैं कि गृह मंत्रालय आतंकवाद और नक्सलवाद को संभालने में असफल हो गया है. दबी जुबान में सोशल मीडिया में यह बात भी सामने आ रही है कि अगर गृह मंत्रालय इस तरह की घटनायें रोक नहीं सकता तो उसमें व्यापक फेरबदल की जरूरत है.

असल में भाजपा के समर्थक केन्द्र सरकार के असफल होने की बात को मानना नहीं चाहते, ऐसे में वह गृह मंत्रालय को निशाने पर ले रहे हैं. केवल छत्तीसगढ़ में ही फरवरी 2014 में 2 बार इस तरह की घटनायें घटी. दोनों घटनाओं में 22 से अधिक पुलिसकर्मियों की हत्या की गई थी. मार्च 2017 में 12 जवान मारे गये और 24 अप्रैल की घटना में 25 जवान शहीद हो गये. हर हमले के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह हमले को चुनौती के रूप में देखते हैं. इसके बाद फिर हमला हो जाता है. कुछ इसी तरह से कश्मीर में भी हो रहा है. कश्मीर में बच्चों के स्कूल लबें समय तक बंद रहे. इसके बाद खुले तो एक सप्ताह में ही स्कूली बच्चे वापस पत्थरबाजी करने लगे. तब सरकार को स्कूल फिर बंद करने पड़ गये.

सरकार के तमाम दावों और प्रयासों के बाद भी कश्मीर में शांति बहाली नहीं हो पा रही है. कश्मीर में शांति बहाली के नाम पर ही भाजपा ने पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई. दावा यह किया गया कि इससे कश्मीर में शांति बहाली हो सकेगी. पीडीपी और भाजपा के बीच कभी अच्छे संबंध नहीं रहे. वैचारिक रूप से दोनों अलग विचारधारा को मानते हैं. इनके एक साथ होने से भी कश्मीर पर कोई सार्थक प्रभाव नहीं पड़ा है. नोटबंदी को लेकर सरकार ने कहा कि इससे कश्मीर में अमन कामय होगा. ऐसे में अब यह सवाल मुखर होने लगा है कि भाजपा सरकार आतंकवाद और नक्सलवाद दोनों को लेकर असफल हो चुकी है.

मोदी समर्थक इसे केन्द्र सरकार के असफल होने के जगह पर गृह मंत्रालय के असफल होने की बात मान रहे हैं. ऐसे में साफ है कि इसको लेकर निशाने पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह हैं. ऐसे में यह संभव है कि आने वाले दिनों में केन्द्र सरकार इसको लेकर कोई बड़ा फैसला ले. उत्तर प्रदेश में चुनावी जीत के बाद भाजपा की जिम्मेदारियों में कई गुने की बढोत्तरी हो चुकी है. दूसरी तरफ खुफिया सूत्र यह मानते हैं कि उत्तर प्रदेश में भगवा वेश में आतंकवादी किसी घटना को अंजाम दे सकते हैं. ऐसे में गृहमंत्रालय के सामने नई चुनौतियों के ढेर लगे हैं. इनपर खरे उतराना सरल नहीं है. राजनीतिक जानकार यह मानते हैं कि गृह मंत्रालय को जिम्मेदार मानना भाजपा की अंदरूनी राजनीति का हिस्सा भी हो सकता है.