पति पत्नी का रिश्ता बड़ा ही खूबसूरत रिश्ता होता है. आजकल अपना हमसफर तलाशते समय जहां युवकयुवतियां अपने जीवनसाथी के लिए सुंदरता, कैरियर, लंबाई, मोटाई जैसे अनेक मानदंड निर्धारित करते हैं, वहीं कुछ ऐसे भी होते हैं, जिन के लिए सिर्फ आंतरिक सौंदर्य और गुण ही माने रखते हैं. अनुपम तिवारी और उन की पत्नी निधि तिवारी की जोड़ी को देख कर सहसा इस कहावत पर यकीन भी होने लगता है. इन का वैवाहिक जीवन इस बात का प्रतीक है कि किसी भी प्रकार की शारीरिक अक्षमता व्यक्ति के आंतरिक गुणों से बढ़ कर नहीं हो सकती.

विवाह से पूर्व यदि लड़का या लड़की को अपने होने वाले जीवनसाथी के बारे में यह पता चलता है कि उस के होने वाले जीवनसाथी को कोई ऐसी बीमारी है, जो विवाहोपरांत उन के समस्त जीवन को ही प्रभावित कर देगी तो आमतौर पर विवाह से इनकार कर दिया जाता है. परंतु निधि तिवारी को तो विवाह से पूर्व ही पता था कि उन के पति को आंखों की एक ऐसी बीमारी है जिस में उन की आंखों की रोशनी दिनप्रतिदिन कम हो कर एक दिन पूरी तरह समाप्त हो जाएगी.

इस के बावजूद उन्होंने अपने परिवार वालों की इच्छा के विपरीत जा कर उन से विवाह किया. आज दोनों अपने वैवाहिक जीवन के 27 वर्ष पूरे कर चुके हैं. अनुपम तिवारी की आंखों की रोशनी पूरी तरह समाप्त हो गई है पर इस से उन के खुशहाल वैवाहिक जीवन पर कोई असर नहीं पड़ा है. अनुपम एक छोटी फैक्टरी

के मालिक हैं और उन की पत्नी निधि तिवारी वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक काउंसलर हैं. उन की एक खूबसूरत बेटी है, जो एमबीए कर रही है. आइए, जानते हैं उन के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक और प्रेरणास्पद बातें:

कैसे मुलाकात हुई आप दोनों की?

निधि: मेरी ननद ने मिलवाया था हम दोनों को.

अनुपम: मेरी मामीजी इन के पापा को जानती थीं. वे ही रिश्ता ले कर आई थीं. दीदी की सहेली इन्हें जानती थीं. अत: वे ही इन्हें मुझ से मिलाने लाई थीं.

कैसा लगा मिल कर?

निधि: मैं मनोविज्ञान की छात्रा थी. अत: इन से मिल कर मुझे लगा कि जिंदगी से निराश हो चुके हैं, परंतु अपने कारण किसी को परेशान नहीं करना चाहते.

अनुपम: मामीजी जब रिश्ता ले कर आईं तो इन के मातापिता तो विवाह के लिए तैयार ही नहीं थे, जो स्वाभाविक भी था, क्योंकि कोई भी मातापिता एक नेत्रहीन से अपनी बेटी का विवाह नहीं करना चाहेंगे. 1 साल तक बात आईगई हो गई. फिर एक दिन अचानक दीदी अपनी सहेली के साथ इन्हें मुझ से मिलाने ले कर आ गईं. यकीन मानिए आधे घंटे तक हम ने अकेले में बातें कीं पर मैं ने इन्हें नजर उठा कर देखा तक नहीं.

ऐसा आप ने अनुपम में क्या पाया कि सब के विरोध के बावजूद इन से ही विवाह किया?

निधि: एक सच्चा, सरल, सहज और अति संकोची इनसान जो जिंदगी की वास्तविकता से कोसों दूर था, जिस के जीवन का एकमात्र उद्देश्य था अपने कारण किसी को परेशान न करना. बस इन की इसी मासूमियत पर मैं फिदा हो गई.

अनुपम: मैं तो इस शादी के लिए तैयार ही नहीं था पर एक दिन मेरी मां ने पापा की बीमारी का हवाला देते हुए अपना आंचल फैला दिया कि विवाह के लिए हां कर दो तो मैं मजबूर हो गया और कहा कि आप जहां चाहें वहां मेरा विवाह कर दें. मैं तैयार हूं. दरअसल, मैं अपने कारण किसी लड़की की जिंदगी बरबाद नहीं करना चाहता था.

आप दोनों के विवाह पर परिवार वालों की प्रतिक्रिया कैसी थी?

निधि: मेरे मातापिता इस विवाह के सख्त खिलाफ थे पर मैं ने उन से प्रश्न किया कि यदि विवाह के बाद मुझे कोई बड़ी और लाइलाज बीमारी हो गई, तो क्या मेरे पति मुझे छोड़ देंगे? बस इस प्रश्न पर वे निरुत्तर हो गए.

अनुपम: मेरे परिवार वालों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था, क्योंकि हर मातापिता की तरह उन्होंने भी मेरे विवाह के सपने संजोए थे और आज उन के सपने पूरे होने जा रहे थे.

अब जबकि अनुपम की आंखों की रोशनी पूरी तरह समाप्त हो चुकी है, तो आप दोनों नातेरिश्तों को कैसे मैनेज करते हैं?

निधि: चूंकि मेरी ससुराल यहीं है तो आमतौर पर अधिकांश उत्तरदायित्व मैं अपने सासससुर की मदद से निभाती हूं पर हां जहां आवश्यक होता है मैं इन्हें भी अपने साथ ले जाती हूं.

अनुपम: अधिकांश जिम्मेदारियां ये स्वयं ही निभा लेती हैं.

सासससुर ने अपने व्यवहार या बातों से कभी जताया कि आप ने उन के बेटे का जीवन बना दिया?

निधि: मेरे सासससुर बेहद नेकदिल हैं. वे अकसर महसूस कराते हैं कि आज उन के बेटे का जीवन बनाने वाली मैं हूं. पर मुझे उस से कोई फर्क नहीं पड़ता. मैं ने तो जानबूझ कर विवाह किया था, क्योंकि मुझे लगता है कि केवल एक बीमारी के कारण इनसान के सारे गुणों को नकार देना कहां का न्याय है?

क्या विवाह के बाद आप दोनों को अपनी ससुराल में वही मानसम्मान प्राप्त हुआ, जो एक दामाद और एक बहू को मिलता है?

निधि: बिलकुल. ये घर के बड़े बेटे हैं, इसलिए मुझे हमेशा बड़ी बहू का ही मान मिला.

अनुपम: अपनी ससुराल से मुझे कोई गिलाशिकवा नहीं रहा. शुरू में अवश्य इन के पिताजी तैयार नहीं थे, परंतु विवाह हो जाने के बाद कभी दूसरे दामाद और मुझ में कोई फर्क नहीं किया. यहां तक कि 27 साल के वैवाहिक जीवन में कभी आंखों के बारे में बात तक नहीं हुई.

कभी अपने निर्णय पर दोनों को पछतावा हुआ?

निधि: पछतावे का तो प्रश्न ही नहीं उठता, क्योंकि विवाह का निर्णय मेरा अपना था. किसी का कोई दबाव नहीं था.

अनुपम: कभी नहीं, क्योंकि मैं तो विवाह ही नहीं करना चाहता था. आज इन के कारण ही मैं एक पिता और पति हूं.

विवाह होने के बाद स्वयं में कितना बदलाव किया दोनों ने?

निधि: मैं जब विवाह के बाद ससुराल आई तो उस समय अनुपम एकदम पैंपर्ड चाइल्ड थे. मातापिता के प्यारे, बेचारे को दिखता नहीं है, इसलिए हर कार्य कर दिया जाता था यानी सब की दया के पात्र. मैं ने आ कर सब से पहले इन के खोए आत्मविश्वास को जगाया. अपने स्वयं के सारे कार्य इन्हें खुद करने के लिए प्रेरित किया ताकि ये स्वयं को एक सामान्य इनसान समझ सकें. आज अपने सारे कार्य स्वयं करने के साथसाथ ये पानी भरना, खाना गरम करना, फ्रिज में खाना रखना जैसे सभी कार्य खुद करते हैं.

अनुपम: सही कहा इन्होंने. मेरे मातापिता तो सदैव मेरे भविष्य को ले कर चिंतित रहते थे. इन्होंने मुझे इनसान बना दिया. मैं तो फकीरी अंदाज में रहता था. बढ़े बाल और दाढ़ी, अस्तव्यस्त कपड़े, स्लीपर डाल कर निकल जाता था पर इन्होंने मुझे ढंग से रहना सिखाया. मैं कहीं आताजाता नहीं था पर इन्होंने मुझे हर जगह जाना सिखाया.

आप के विवाह के समय आप के दोस्तों और नातेरिश्तेदारों की क्या प्रतिक्रिया थी?

निधि: हमारा समाज इस प्रकार की बातों को जल्दी हजम नहीं कर पाता. इसलिए सब से पहली प्रतिक्रिया तो यही थी कि जरूर लड़की में कोई खोट होगा, जो जानबूझ कर ऐसे लड़के से विवाह कर रही है. दूसरे सभी ने इसे बेमेल शादी कहते हुए इस की सफलता पर ही संदेह व्यक्त किया था. पर आज 27 साल के बाद सभी चुप हैं.

अनुपम: मेरे घर में तो सभी बेहद खुश थे. हां, कुछ लोग एक अंधे व्यक्ति को इतनी योग्य और खूबसूरत जीवनसाथी पाते देख कर हैरत में अवश्य थे.

कभी अपने विवाह को ले कर कोई अफसोस होता है?

निधि: इन्हें ले कर तो कभी कोई अफसोस नहीं होता पर हां चिंता अवश्य होती है इन की. सोचती हूं कि इन्हें इतना आत्मनिर्भर बना दूं कि यदि कभी मैं इन से पहले चली गई, तो भी इन्हें कोई दिक्कत न हो.

अनुपम: अकसर होता है कि मैं इन्हें और बेटी को वह जीवन नहीं दे पा रहा जो एक सामान्य व्यक्ति देता है. मैं कभी इन्हें ले कर घूमने नहीं जा पाता, क्योंकि आजकल के खराब जमाने में एक सामान्य आदमी तो अपनी बेटी को बचा नहीं पा रहा मैं अंधा क्या बचाऊंगा.

घर के आर्थिक मामले कैसे निबटाते हैं?

निधि: हम ने घर की आर्थिक जिम्मेदारियां आपस में बांट ली हैं जिन्हें मैं और ये मिल कर पूरा कर लेते हैं.

अनुपम: स्वाभाविक रूप से मैं उतना अच्छा जीवन तो नहीं दे पा रहा हूं जितना देना चाहता हूं पर हां मेरी फैक्टरी और इन की तनख्वाह से मैनेज हो जाता है. किसी बात की कमी नहीं रहती.

अपनी सैक्सुअल रिलेशनशिप के बारे में कुछ बताएं?

इस प्रश्न का उत्तर दोनों एकसाथ हंसते हुए देते हैं, ‘‘हमारी खूबसूरत बेटी अनुकृति हमारे स्वस्थ संबंधों की प्रतीक है.’’

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