भारत में तलाक के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है. 10 साल पहले जहां भारत में 1 हजार लोगों में 1 व्यक्ति तलाक लेता था, वहीं अब यह संख्या 1,000 पर 13 से ज्यादा हो गई है. तलाक याचिकाएं पहले से दोगुनी मात्रा में जमा हो रही हैं. खासकर मुंबई, बैंगलुरु, कोलकाता, लखनऊ जैसे बड़े शहरों में यह ट्रैंड ज्यादा देखने को मिल रहा है. इन शहरों में मात्र 5 सालों में तलाक फाइल करने के मामलों में करीब 3 गुना वृद्धि दर्ज की गई है.

2014 में मुंबई में तलाक के 11,667 केस फाइल किए गए जबकि 2010 में यह संख्या 5,248 थी. इसी तरह 2014 में लखनऊ और दिल्ली में क्रमश: 8,347 और 2000 केस फाइल किए गए जबकि 2010 में यह संख्या क्रमश: 2,388 और 900 थी.

तलाक के मामलों में इस बढ़ोतरी और दंपती के बीच बढ़ते मतभेदों की वजह क्या है? क्यों रिश्ते टिक नहीं पाते? ऐसे क्या कारण हैं जो रिश्तों की जिंदगी छोटी कर देते हैं?

इस संदर्भ में अमेरिका के मनोवैज्ञानिक और मैरिज ऐक्सपर्ट जौन गौटमैन ने 40 सालों के अध्ययन और अनुभवों के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि मुख्य रूप से 4 ऐसे कारक हैं, जिन की वजह से दंपती के बीच संवादहीनता की स्थिति पैदा होने लगती है. इस स्थिति के 6 सालों के अंदर उन का तलाक हो जाता है.

आलोचनात्मक रवैया : वैसे तो कभी न कभी सभी एकदूसरे की आलोचना करते हैं पर पतिपत्नी के बीच यह आम बात है. समस्या तब पैदा होती है जब आलोचना करने का तरीका इतना बुरा होता है कि चोट सीधे सामने वाले के दिल पर लगती है. किसी भी हाल में एक जना दूसरे को गलत साबित करने के प्रयास में लग जाता है. उस पर इलजामों की बौछार करने लगता है. ऐसे में कई दफा पतिपत्नी एकदूसरे से इतनी दूर चले जाते हैं कि फिर लौटना कठिन हो जाता है.

घृणा : जब आप के मन में जीवनसाथी के लिए घृणा और तिरस्कार के भाव उभरने लगें तो समझ जाएं कि अब रिश्ता ज्यादा दिन टिकने वाला नहीं. घृणा प्रदर्शन के तहत ताने देना, नकल उतारना, नाम से पुकारना जैसी कितनी ही हरकतें शामिल होती हैं, जो सामने वाले को महत्त्वहीन महसूस कराती हैं. इस तरह का व्यवहार रिश्तों की जड़ों पर चोट करता है.

बचाव करने की आदत : जीवनसाथी पर इलजाम लगा कर खुद को बचाने का रवैया जल्द ही रिश्तों के अंत की वजह बनता है. पतिपत्नी से अपेक्षा की जाती है कि वे हर स्थिति में एकदूसरे का सहयोग करें. मगर जब वे एकदूसरे के ही विरोध में खड़े होने लगें तो उन का रिश्ता कोई नहीं बचा सकता.

संवादहीनता : जब व्यक्ति अपने जीवनसाथी के प्रति उदासीनता की चादर ओढ़ लेता है, संवाद खत्म कर देता है और उस की बातों को नजरअंदाज करने लगता है, तो दोनों के बीच आई यह दीवार रिश्ते में मौजूद रहीसही जिंदगी भी खत्म कर देती है.

कुछ और कारण

क्वालिटी टाइम: इंस्टिट्यूट फौर सोशल ऐंड इकोनौमिक चेंज, बैंगलुरु द्वारा की गई एक रिसर्च के अनुसार पतिपत्नी के अलगाव का सब से प्रमुख कारण ड्युअल कैरियर कपल (पतिपत्नी दोनों का कामकाजी होना) की लगातार बढ़ती संख्या है. इस रिसर्च में यह बात सामने आई है कि 53% महिलाएं अपने पति से झगड़ती हैं, क्योंकि उन के पति उन के साथ क्वालिटी टाइम नहीं बिताते, वहीं 31.7% पुरुषों को अपनी कामकाजी पत्नियों से शिकायत है कि उन के पास परिवार के लिए समय नहीं है.

सोशल मीडिया: हाल ही में अमेरिका में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि सोशल मीडिया में अधिक समय देने की प्रवृत्ति और तलाक दर में पारस्परिक संबंध है.

जितना ज्यादा व्यक्ति सोशल मीडिया में ऐक्टिव होता है, परिवार टूटने का खतरा उतना ही ज्यादा होता है.

इस की मुख्य रूप से 2 वजहें हो सकती हैं. पहली यह कि सोशल मीडिया में लिप्त रहने वाला व्यक्ति पत्नी को कम समय देता है. वह सारा समय नए दोस्त बनाने व लाइक्स और कमैंट्स पाने के चक्कर में लगा रहता है. दूसरी यह कि ऐसे व्यक्ति के ऐक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स होने के चांसेज बढ़ जाते हैं. सोशल मीडिया पर फ्रैंडशिप ऐक्सैप्ट करना और उसे आगे बढ़ाना बहुत आसान होता है.

धर्म का असर रिश्तों पर

सामान्यतया रिश्तों में कभी खटास और कभी मिठास का दौर चलता ही रहता है. मगर इस का मतलब यह नहीं कि आप अपनी गलतियों पर ध्यान न दें और समाधान के लिए पंडेपुजारियों के पास दौड़ें. पंडेपुजारी पतिपत्नी के रिश्ते को 7 जन्मों का बंधन बताते हैं. रिश्तों को बचाने के लिए वे सदा स्त्री को ही शिक्षा देते हैं कि वह दब कर रहे, आवाज न उठाए.

दरअसल, धर्मगुरुओं की तो मंशा ही होती है कि व्यक्ति 7 जन्मों के चक्कर में फंसा रहे और गृहकलेषों से बचने के लिए तरहतरह के धार्मिक अनुष्ठानों व क्रियाकलापों में पानी की तरह पैसा बहाता रहे.

स्त्रियां ज्यादा भावुक होती हैं. जपतप, दानपुण्य में विश्वास करती हैं. इसी का फायदा उठा कर धर्मगुरु उन से ये सब करवाते रहते हैं ताकि उन्हें चढ़ावे का फायदा मिलता रहे.

हाल ही में एक परिवार इसलिए बरबाद हो गया क्योंकि गृहक्लेष से बचने के लिए घर की स्त्री ने तांत्रिक का दरवाजा खटखटाया.

गत 25 मई को दिल्ली के पालम इलाके में एक बेटे ने अपनी मां की चाकू घोंप कर बेरहमी से हत्या कर दी. 63 साल की मां यानी प्रेमलता अपने बेटेबहू के साथ रहती थी. हर छोटीबड़ी समस्या के समाधान के लिए वह तांत्रिकों और ज्योतिषियों के पास जाती. घर में आएदिन होने वाले झगड़ों के निबटारे के लिए भी वह तांत्रिक के पास गई और फिर उस के बताए उपायों को घर पर आ कर आजमाने लगी. यह सब देख कर बहू को लगा कि वह जाटूटोना कर रही है अत: उस ने यह बात पति को बताई. फिर इसी बात को ले घर में खूब झगड़ा हुआ और बेटे ने सब्जी काटने वाले चाकू से मां पर हमला कर दिया.

मजबूत बनाएं रिश्ता

रिश्ते बनाना बहुत सहज है पर उन्हें निभाना कठिन. जौन गौटमैन के मुताबिक रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए कपल्स को इन बातों का खयाल रखना चाहिए:

लव मैप का फंडा : लव मैप मानव मस्तिष्क का वह हिस्सा है जहां व्यक्ति अपने जीवनसाथी से जुड़ी हर तरह की सूचना जैसे उस की परेशानियों, उम्मीदों, सपनों समेत दूसरे महत्त्वपूर्ण तथ्यों व भावनाओं को इकट्ठा रखता है. गौटमैन के मुताबिक दंपती लव मैप का प्रयोग एकदूसरे के प्रति अपनी समझ, लगाव और प्रेम प्रदर्शित करने में कर सकते हैं.

साथ दें सदा : जीवनसाथी के जीवन से जुड़े हर छोटेबड़े मौके पर उस के साथ खड़े रहें. पूरे उत्साह और प्रेम के साथ उस के हर दुखसुख के भागीदार बनें.

महत्त्व स्वीकारें : किसी भी तरह का फैसला लेते वक्त या कोई भी महत्त्वपूर्ण काम करते समय जीवनसाथी को भूलें नहीं. उस की सहमति अवश्य लें.

तनाव करें दूर : पतिपत्नी के बीच तनाव लंबे समय तक कायम नहीं रहना चाहिए, जीवनसाथी आप की किसी बात से आहत है तो मीठे शब्दों का लेप जरूर लगाएं. एकदूसरे के साथ सामंजस्य बनाए रखें. कंप्रोमाइज करना सीखें.

दूरी न दें बढ़ने : कई दफा पतिपत्नी के बीच का विवाद इतना गहरा हो जाता है कि पास आने के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं. साथी स्वयं को अस्वीकृत महसूस करता है. दोनों इस बारे में बात तो करते हैं पर कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकाल पाते. हर वादविवाद के बाद वे और ज्यादा कुंठित महसूस करते हैं.

गौटमैन कहते हैं कि कभी ऐसा मौका न आने दें. पतिपत्नी के बीच विवाद इसलिए बढ़ता है क्योंकि उन की बातचीत में मधुरता, उत्साह और लगाव का अभाव होता है. वे समझौता नहीं करना चाहते. इसी वजह से भावनात्मक रूप से भी एकदूसरे से दूर हो जाते हैं. यह दूरी कितनी भी बढ़ जाए पर एक कपल को यह जरूर पता लगाना चाहिए कि विवाद के मूल में क्या है और उसे कैसे दूर किया जाए.

पार्टनर को अच्छा महसूस कराएं : पतिपत्नी को इस बात का खयाल रखना चाहिए कि उस के जीवनसाथी को क्या पसंद है, वह किस बात से खुश होता है. समयसमय पर जीवनसाथी के साथ बीते खुशनुमा लमहों का जिक्र करें ताकि वही प्यार आप फिर से महसूस कर सकें.

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