अगर आप वर्किंग हैं और प्रैगनैंट हैं तो आप को अपना खयाल रखना होगा, जो आप के साथसाथ उस गर्भस्थ शिशु के लिए भी फायदेमंद होगा, जो जल्दी आप के जीवन में ढेर सारी खुशियां ले कर आने वाला है. गर्भस्थ शिशु का सही विकास हो और आप की सेहत भी दुरुस्त रहे, इस के लिए आप को ये 5 हैल्दी टिप्स अपने डेली रूटीन में शामिल करने होंगे: ऐसे करें दिन की शुरुआत

सुबह उठते ही कमरे की खिड़कियां और दरवाजे खोल दें. सुबह की ताजा हवा आप के तनमन को तरोताजा कर देगी. रात भर की अशुद्ध हवा जो बंद कमरे में जमा हो जाती है, बाहर निकल जाएगी. आमतौर पर सुबह उठ कर दूध वाली चाय की आदत होती है. अत: इस की जगह ग्रीन टी पीना शुरू करें. ऐंटीऔक्सीडैंट से भरपूर ग्रीन टी आप को ऐनर्जी देगी. एक रिसर्च के अनुसार दूध वाली चाय हानिकारक होती है. यदि मौर्निंग वाक के लिए बाहर नहीं जा सकती हैं तो घर पर ही 5-10 मिनट चहलकदमी करें. चाहे कितनी ही देर से क्यों न जागें, व्यायाम जरूर करें. ज्यादा समय न हो तो 10 मिनट ही करें, लेकिन करें जरूर. इस के ढेर सारे फायदे हैं. यह आप को दिनभर तरोताजा रखेगा. इसे करने से थकान कम होगी और रक्तसंचार सही रहेगा.

हैल्दी डाइट कभी भी कहीं भी प्रैगनैंसी के समय बैलेंस्ड और हैल्दी डाइट की जरूरत ज्यादा होती है. कामकाजी गर्भवती दफ्तर के कामकाज और घर की भागदौड़ में संतुलित आहार नहीं ले पाती. उस की शिकायत होती है कि औफिस में जब जी चाहे खापी नहीं सकती. सहकर्मी क्या कहेंगे? ऐसी सोच से बाहर आएं.

सब को पता है कि ऐसे समय में आप को पोषण की ज्यादा जरूरत है. इसलिए बेझिझक खाएं. अपने लंच के अलावा सेब, केला, अन्य फल, मिक्स सलाद, सूखा मेवा, हलवा आदि के छोटेछोटे लंचपैक अलग से रखें. इन्हें काम के बीच में निकाल कर थोड़ाथोड़ा खाती रहें. यानी थोड़ेथोड़े अंतराल पर कुछ न कुछ हैल्दी डाइट लेती रहें. पेयपदार्थों से करें दोस्ती

कामकाजी गर्भवती को पेयपदार्थों से दोस्ती कर लेनी चाहिए. खूब पानी पीएं. इस के अतिरिक्त जूस, सूप, शेक, ग्रीन टी लेती रहें. औफिस में ग्रीन टी की व्यवस्था न हो तो घर से ग्रीन टी के पाउच और थर्मस में गरम पानी ले जाएं. रात में 1 गिलास दूध जरूर लें. दूध पसंद न हो तो पनीर खाएं. कम से कम 1 बार सूप जरूर पीएं. कामकाजी महिलाएं एक धारणा बना लेती हैं कि उन के पास समय का अभाव है.

आप को हर काम मैनेज करना सीखना होगा. जैसे आप कहती हैं कि आप के पास इतना वक्त नहीं है कि सूप बना सकें. यदि आप के घर में अन्य लोग हैं तो आप सूप बनवा कर फ्रिज में रख लें. यह 2-3 दिन आराम से चल जाता है. खुद बनाना हो तो किसी दिन दूसरे कामों में कटौती कर सूप बनाएं. सिचुएशन के मुताबिक मैनेज करना सीखें, कोई परेशानी नहीं होगी.

चुराएं आराम के पल जरूरत से ज्यादा भागदौड़ थका देती है. आप की सेहत पर इस का बुरा असर पड़ता है. औफिस में घंटों एक जगह बैठना, कंप्यूटर पर लगातार काम करना प्रैगनैंसी पीरियड में अच्छा नहीं होता. इस के अलावा आनेजाने में भी परेशानी होती है.

शहरों में जाम में फंसना भी कम बड़ी सजा नहीं है. धूल, धुआं और भागदौड़ गर्भस्थ शिशु के लिए खतरनाक तो है ही, आप के लिए भी हानिकारक है. रिसर्च बताती है कि ऐसी स्थितियों के कारण आजकल ब्लीडिंग की समस्या और प्रीमैच्योर बेबी की आशंका बढ़ रही है. अत: समझदारी इसी में है कि आप काम का ज्यादा बोझ अपने ऊपर न लादें. तीसरेचौथे महीने से वीकैंड के अलावा सप्ताह के बीच एक दिन की छुट्टी अवश्य लें. 7वें महीने से यह छुट्टी 1 दिन और बढ़ा सकती हैं.

रिसर्च बताती है कि कामकाजी महिलाओं में बारबार गर्भपात का खतरा बढ़ता जा रहा है. अन्य कारणों के अलावा इस की एक बड़ी वजह काम के दौरान आराम न करना भी है. आप ने बेबी की प्लानिंग की है तो उस के प्रति पूरी जिम्मेदारी निभाएं. उसे स्वस्थ तनमन के साथ स्वस्थ माहौल में बाहर लाने की जिम्मेदारी आप की है और इस के लिए आप को आराम के पल चुराने होंगे. भरपूर नींद है जरूरी

अच्छी और गहरी नींद हर किसी के लिए जरूरी है. लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए यह बेहद जरूरी है. चाहे जितना भी काम हो, कम से कम 8 घंटे की नींद जरूरी है. औफिस का कोई काम घर न लाएं. सोने का एक निश्चित समय निर्धारित करें. यह तय कर लें कि आप को 10 बजे तक सो जाना है. इस नियम का सख्ती से पालन करें. इस के लिए कोई काम अधूरा छोड़ना पड़े तो छोड़ दें. अधूरा काम दूसरे दिन या फिर कभी और पूरा हो जाएगा, लेकिन आप की नींद की भरपाई दूसरे दिन नहीं हो पाएगी, क्योंकि सुबह होते ही फिर से आप का रूटीन वर्क शुरू हो जाएगा. इसलिए नींद से कोई समझौता न करें.

इन सब बातों के साथसाथ एक बात जो सब से ज्यादा जरूरी है, वह है खुश रहें. इस का सीधा असर आने वाले बच्चे में दिखेगा.