आज हर तीसरा व्यक्ति लाइफस्टाइल समस्याओं जैसे बैक पेन, माइग्रेन, घुटनों का दर्द आदि का सामना कर रहा है. यदि आप भी इस तरह की परेशानियों का शिकार हो रहे हैं तो कुछ सुझावों पर गौर फरमा कर आप फिट और हलका महसूस कर सकते हैं:

आलस त्यागें: सब से पहले आलस को त्यागते हुए सुबहसवेरे अपने पास के पार्क तक पैदल चल कर जाएं. यदि मौसम जाने की अनुमति नहीं देता है तो ट्रेडमिल पर कुछ समय बिता सकते हैं. अपने पास के मैट्रो स्टेशन तक भी चल सकते हैं. अपने वाहन को अपने कार्यस्थल से थोड़ी दूर पार्क करें ताकि आप कुछ दूर पैदल चल सकें. औफिस में लिफ्ट के बजाय सीढि़यों का इस्तेमाल करें.

ड्राइव करते समय ध्यान रखें: ड्राइविंग पीठ दर्द प्रमुख कारणों में से एक है. खासकर उन के लिए जिन्हें लंबे समय तक यात्रा करनी पड़ती है. ड्राइव करते समय स्टीयरिंग व्हील से गलत दूरी बनाए रखने से गरदन, हाथों, कंधों, रीढ़ की हड्डी, पीठ, कलाइयों में परेशानी हो सकती है. इसलिए यह सुनिश्चित कर लें कि अपने स्टीयरिंग व्हील से सही ढंग से दूरी बना कर बैठना भी बहुत जरूरी है. आप की छाती स्टीयरिंग व्हील के समानांतर होनी चाहिए. पैरों को पूर्ण आराम दें.

जब औफिस में हों: कार्यालय की कुरसी ऐसी होनी चाहिए जिस का निचला हिस्सा आप की पीठ के निचले हिस्से को सपोर्ट दे. कंप्यूटर स्क्रीन की ऊंचाई और आप में समानांतर होना चाहिए.

शारीरिक कसरत: कुरसी पर बैठे हुए ही कुछ हलके व्यायाम करने की कोशिश कर सकती हैं. सीधे बैठें और पैरों को फैलाते हुए उन की उंगलियों को ऊपर की ओर रखें. अब उन्हें 30 से 40 डिग्री के स्तर पर उठाने की कोशिश करें और फिर धीरेधीरे जमीन को छूएं बिना उन्हें नीचे तक लाए. इसे 10 से 15 बार दोहराएं. ऐसा करना न केवल आप की टमी को अंदर रखता है, बल्कि आप की पीठ के निचले हिस्से को भी मजबूत करता है.

ऐसा बारीबारी से करें: इस के साथ ही आप दूसरा व्यायाम यह कर सकते हैं कि एक पैन या पैंसिल फ्लोर पर गिरा दें और फिर पैर के अंगूठे व उंगलियों के साथ उठाने की कोशिश करें.

जमीन की ओर सीधे न झुकें: जमीन पर कुछ भी उठाने के लिए सीधे यानी एकदम से न झुकें. पहले झुक कर घुटनों पर बैठें फिर चीज को उठाएं.

कलाइयों को आराम दें: अगर आप सुन्नता या झनझनाहट अपनी उंगली विशेष कर अंगूठे, हाथ की बीच की उंगली पर महसूस करती हैं तो यह कार्पल टनल सिंड्रोम का लक्षण हो सकता है. अत: कलाइयों को आराम देना भी जरूरी है. हाथों और कलाईयों को कुछ अंतराल में आराम देती रहें.

– डा. सतनाम सिंह छाबड़ा, सर गंगा राम अस्पताल

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