हम जब भी नमकीन खाने की बात करते हैं तो हमारे सामने मसालेदार तीखे व्यंजनों की तसवीर आ जाती है. इन मसालों में मिर्च का प्रयोग जरूर किया जाता है. लोगों को भी लगता है कि जब तक नमकीन रैसिपी में मिर्च न डाली जाए, फिर चाहे हरी हो या लालमिर्च, खाने का स्वाद अधूरा ही लगता है. लेकिन कई ऐसी रैसिपीज हैं जिन्हें हम बिना मिर्च का प्रयोग किए बना सकते हैं और वे स्वाद में बेजोड़ भी लगती हैं, साथ ही, हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी भी हैं.

साबुदाना खिचड़ी

बिना मिर्च के बन सकने वाली डिश साबुदाना खिचड़ी को मुख्यतया त्योहारों के दौरान बनाया जाता है. लेकिन इस के बेहतरीन स्वाद की वजह से लोग इसे कई दफा दोपहर के भोजन के तौर पर साबुदाना भी बना लेते हैं. बस, ये सही तरीके से भिगोया हुआ हो.

यों तो साबुदाना 2 तरह का मिलता है, बड़ा और छोटा. बड़े साबुदाने की खिचड़ी के लिए साबुदाने को लगभग 8 घंटे तक पानी में भिगो कर रखना होता है. छोटे साबुदाने को 1-2 घंटे भिगो कर रखना ही काफी है. इसे बनाने के लिए आलू, पनीर और मूंगफली के चूरे के साथ बाकी मसालों का प्रयोग किया जाता है.

आलू और पनीर को तेल या घी में भून कर अलग करने के बाद बचे हुए गरम घी में जीरा तड़काने के बाद मूंगफली को भून लें. अब साबुदाना और नमक व अन्य मसाले मिला कर भूनिए. इस में पानी डाल कर धीमी आंच पर कुछ मिनट पकाइए, साबुदाने की बिना मिर्च वाली खिचड़ी तैयार है.

साबुदाने की टिक्की

साबुदाने की टिक्की से बनी चाट आप के मुंह के जायके को बदलने के लिए काफी है. इस के लिए उबले आलू में पहले से भिगोया हुआ साबुदाना डाल कर मिक्स कर के छोटी टिक्की बना लें. गरम तेल की कड़ाही में इन टिक्कियों को सुनहरे होने तक तल लें. फिर टिक्की के ऊपर फेंटी दही डाल कर नमक, भुना जीरा पाउडर और इमली की चटनी डाल कर इस का स्वाद लें.

कच्चे केले की टिक्की

इसी तरह आप कच्चे केले की टिक्की भी बना सकते हैं. बस, इस के लिए कच्चे केले को कुकर में पका लें. फिर हलका सा बेसन मिला कर इसे डीपफ्राई कर लें. सुनहरे होने पर कड़ाही से निकाल लें. चाहें तो इसे इसी तरह सौस के साथ खाएं या फिर दही डाल कर चाट के तौर पर खाएं.

अंकुरित मूंग की दाल

स्वस्थ रहना और स्वादिष्ठ खाना दोनों एकसाथ मुश्किल जरूर है लेकिन थोड़ी मेहनत के बाद आप स्वादिष्ठ और हैल्दी जायके का लुत्फ उठा सकते हैं. इस के लिए हमें अंकुरित मूंगदाल की जरूरत पड़ती है. यह कैलोरीमुक्त होने के साथ ही फाइबर, विटामिन सी, प्रोटीन और आयरन का बेहतरीन स्रोत होती है. इस से शरीर का मेटाबौलिज्म रेट सुधर जाता है.

एक बरतन में अंकुरित मूंगदाल लें और इस में बारीक कटा प्याज, टमाटर, चाट मसाला, नमक और नीबू का रस मिला लें. हरी धनिया का इस्तेमाल गार्निशिंग के लिए करें, यह स्प्राउट्स चाट काफी स्वादिष्ठ होती है.

सूजी का उपमा

सूजी का उपमा भला किस ने नहीं खाया होगा, इस बार बिना मिर्च के उपमा बना कर देखें. इस के लिए मुट्ठीभर चने की दाल को 2-3 घंटे भिगो लें. इस से उपमा का स्वाद बढ़ता है.

कड़ाही में मूंगफली को पहले भून कर निकाल लें. इस के बाद रिफाइंड तेल में चने की दाल को हलका भूनने के बाद सूजी को भूनें. इसे लगातार चलाते रहना जरूरी है, वरना सूजी जल जाएगी. अंत में नमक और मूंगफली डाल कर मिला लें. जरूरत के अनुसार पानी डालें और चलाते रहें. सूजी का उपमा तैयार है.

ओट्स चीला

चीला तो आप ने अब तक बेसन या सूजी का ही खाया होगा, इस बार ओट्स का चीला बनाएं. इस के लिए आप को ओट्स को मिक्सचर में पीसना होगा. इस के बाद एक बरतन में पिसे ओट्स, दही, प्याज, टमाटर और नमक व अन्य मसाले मिला लें. लगभग आधा घंटा ढक कर छोड़ दें.

अब तवे को गरम कर के उस पर हलका तेल या घी लगाएं. फिर जैसे चीला बनाते हैं, उसी तरह से बनाएं. इसे सौस या मनपसंद चटनी के साथ खाया जा सकता है.

चिड़वे का पोहा

चिड़वे का पोहा भले ही महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश में ज्यादा खाया जाता हो, लेकिन उत्तर भारतीय भी पोहा के काफी शौकीन हैं. विशुद्ध पोहा खाना हो तो करीपत्ता का इस्तेमाल जरूर करें. गरम तेल में मूंगफली भून कर अलग निकाल लें. अब उसी कड़ाही में ?पहले करीपत्ता डालें और फिर प्याज को भूनें.

दूसरी ओर एक अलग बरतन में चिड़वा लें, इस पर नमक और हलदी छिड़क लें. थोड़ा पानी इस पर छिड़कें. हलके हाथ से मिला लें और 10 मिनट ढक कर रहने दें. भुने प्याज में इस चिड़वे को मिलाएं. इसे धीमी आंच पर पकाएं और ढक दें. बीचबीच में चलाते रहें. जब चिड़वा पक जाए तो इसे उतार लें. चाहें तो हरी धनिया से गार्निश कर लें.

सेवईं पोहा 

गेहूं की सेवइयों का भी आप इसी तरह से पोहा बना सकते हैं. इन दिनों बाजार में तरहतरह की गेहूं की सेवइयां उपलब्ध हैं, इन का पोहा बनाने के लिए बस, सेवइयों को पहले से पानी में उबाल लेना जरूरी है.

इस में मटर, गाजर, आलू जैसी मनपसंद सब्जी भी डाली जा सकती है. हरी सब्जियां डालने से इस का स्वाद तो बढ़ेगा ही, स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह लाभदायक है.

– आशीष सिंह, शेफ, लुब लुब लेबनीज, गुरुग्राम