‘गोरी बनने के लिये 1 हजार की क्रीम लगा लोगी, पर जान बचाने के लिये 5 सौ रूपये का हेलमेट नहीं लगा सकती’

‘पुलिस की वर्दी पहनने वाले ही जब हेलमेट नहीं लगायेगे तो दूसरा कैसे लगायेगा.’

कुछ इस तरह के ताने देकर किन्नर लखनऊ में ट्रैफिक सिस्टम को सुधरने का प्रयास करेगे. शहरों में बढता यातायात तमाम तरह की परेशानियां खडा कर रहा है. दिल्ली सेलेकर लखनऊ तक यातायात, सडक सुरक्षा और प्रदूषण से निपटने के तमाम प्रयोग किये जा रहे है.

दिल्ली में औड इवन नम्बर पर हंगामा मचा है, तो उत्तर प्रदेश की राजधनी लखनऊ का दिल हजरतगंज वन वे सिस्टम से बेहाल हो चुका है. आधा किलोमीटर का सफर तय करने के लिये 2 किलोमीटरका चक्कर लगाना पड रहा है. मुख्यमंत्री सचिवालय, राजभवन और विधनसभा भवन के पास लगा वन वे सिस्टम 2 घंटे में ही खत्म करना पडा. वीवीआईपी मसला होने के कारण यह वन वे सिस्टम भले ही खत्म हो गया हो पर हजरतगंज में रहने वालों को वन वे सिस्टम से राहत नहीं मिल रहीहै.

मजेदार बात यह है कि वन वे सिस्टम के बाद भी हजरतगंज इलाके में चौराहों पर जाम की हालत में कोई अंतर नहीं आया है. जिला प्रशासन ने इसे नाक का सवाल बना लिया है. वह किसी भी हालत में वन वे सिस्टम की अपनी इंजीनियरिंग को फेल मानने को तैयार नहीं है. उसके पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि वीवीआईपी इलाके में 2 घंटे में ही वन वे सिस्टमक्यों हटा लिया ?

लखनऊ में तमाशा बन चुके ट्रैफिक सिस्टम को सुधारने में एक पहल किन्नरों के संगठन पायल फाउडेंशन ने शुरू की है. पायल फाउडेंशन को चलाने वाली पायल सिंह किन्नर है. वह लखनऊ में कई चुनाव भी लड चुकी है. वह कई तरह की समाजसेवा भी करती है. लखनऊ के हजरतगंज में बुधवार की दोपहर 3 बजे के बाद पायल और उसके संगठन में काम करने वाले दूसरे किन्नर साथियों ने यातायात को सही तरह से चलाने और यातायात नियमों का पालन करने जैसे सीट बेल्ट लगाने, हेलमेट लगाने, सही तरह से गाडी चलाने और पार्किंग का प्रयोग करने के लिये आते जाते लोगों को समझाया. इनमें साधरण नागरिक से लेकर पुलिस वाले और लाल नीली बत्ती वाले सभी तरह के लोग शामिल थे. पायल ने कहा कि वह रोजाना शहर के अलग अलग क्षेत्रों में ऐसे अभियान चलायेगीं.

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