सरिता विशेष

शुक्रवार को रिलीज हुई एडल्ट कामेडी जानर की फिल्म ‘‘क्या कूल हैं हम 3’’ के बाक्स आफिस पर सफल होने को लेकर लोग आशान्वित नहीं है. मगर लगातर कई एडल्ट कामेडी फिल्मों का हिस्सा रहे इस फिल्म में राकी का किरदार निभाने वाले अभिनेता आफताब शिवदसानी का दावा है कि इस फिल्म को हर परिवार देखना चाहेगा. सोलह साल का फिल्मी करियर होने के बावजूद वह कोई खास सफलता हासिल नहीं कर पाए हैं. पर इसके लिए वह खुद को दोषी नहीं मानते हैं. उन्हे गम है कि लोगों ने उनकी मेहनत की कद्र नहीं की. एक मुलाकात के दौरान खुद आफताब शिवदसानी ने कहा- ‘‘16 साल के करियर में काफी उतार चढ़ाव हुए. कभी खुशी कभी गम पाया. कई बार मुझे लगता कि हमने जो निर्णय लिए वह गलत थे. फिर कभी लगा कि हम अपनी तकदीर बदल नहीं सकते. हम अपना अतीत बदल नहीं सकते. पर वर्तमान और भविष्य बदल सकते हैं. इसलिए मुझे अपने किसी भी निर्णय को लेकर कोई पछतावा नही है. मुझे किसी भी फिल्म को करने का गम नही है.

मैने ‘‘अनकही’’, ‘आओ विष करे’ और ‘‘शुक्रिया’’ फिल्मों में काफी मेहनत की थी. यह फिल्में मेरे दिल के करीब थी, पर नहीं चली. यह फिल्में मेरे करियर को आगे बढ़ा सकती थी. मुझे इन फिल्मों के अफसल होने का अफसोस नहीं है. मुझे अफसोस इस बात का है कि मैं जो मेहनत करता हूं, वह लोगों को दुर्भाग्यवश दिखायी नहीं देती.’’

आफताब शिवदासानी ने खुद कुछ वर्ष पहले फिल्म ‘‘आओ विश करे’’ का निर्माण व इसमें अभिनय भी किया था. इस फिल्म की असफलता के लिए वह खुद का बचाव करते हुए कहते हैं- ‘‘इस फिल्म की मार्केटिंग व वितरण में कमी रह गयी थी. इस फिल्म का निर्माण मैने स्वयं किया था. हमने कोई कसर नहीं छोड़ी थी. उस वक्त मार्केटिंग और वितरण मेरे हाथ में नहीं था. आज की तारीख में फिल्म बनाना आसान है, पर उसे वितरित करना कठिन है. इसलिए आज फिल्मकार फिल्म का निर्माण करने से पहले आश्वस्त होने का प्रयास करता है कि उसकी फिल्म सही ढंग से रिलीज हो सकेगी. पर मैं फिल्म निर्माण से निराश नहीं हुआ. मैं पुनः फिल्म बनाना चाहता हॅूं.’’

लगातार एडल्ट कामेडी फिल्में करने पर सफाई देते हुए आफताब कहते हैं-‘‘मेरे पास जिन फिल्मों के आफर आए, उनमें से मुझे इस तरह की फिल्में सफल होने लायक लगी, इसलिए मैने चुनी. ग्रैंड मस्ती’,‘क्या कूल हैं हम 3’ जैसी एडल्ट कामेडी फिल्में एक के बाद एक आती गयी. यदि इन फिल्मों के बीच में मुझे कुछ अन्य फिल्में चुनने का अवसर मिल जाता, तो आज आप यह धारणा न बनाते कि मैं सिर्फ सेक्स या एडल्ट कामेडी वाली फिल्में ही करना चाहता हूं.

दूसरी बात इस तरह की जो धारणा होती है, वह सदैव के लिए नही होती.बौलीवुड में हर शुक्रवार को धारणा बदल सकती है. फिल्म इंडस्ट्री अंधी, बहरी या गूंगी नहीं है, उन्हे पता होता है कि इस बंदे में टैलेंट है. यह बंदा दूसरे जानर की फिल्म में भी छा सकता है. लेकिन एक मौके की जरुरत होती है. यदि ऐसा मौका मिलता रहे,तो हर शुक्रवार को लोगों की सोच व धारणा बदल सकती है.’’

फिल्म ‘‘क्या कूल हैं हम 3’’ में आफताब ने राकी का किरदार निभाया है, जो कि जिंदगी में सिर्फ मजा लेना जानता है. आफताब का दावा है कि वह निजी जिंदगी में राकी जैसे नहीं है. आफताब कहते हैं- ‘‘मैं निजी जिंदगी में राकी के ठीक विपरीत हूं. मैं निजी जिंदगी में सच्चे प्यार में यकीन करता हूं. मेरे लिए मेरा परिवार बहुत अहमियत रखता है. मेरी पत्नी ने इस फिल्म की पूरी शूटिंग देखी है. उन्हे कामेडी के तौर पर बहुत मजा आया. निजी जिंदगी में पत्नी के साथ मेरा रिश्ता ऐसा है कि मैं उनसे कुछ भी नहीं छिपाता. उनका सेंस आफ ह्यूमर कमाल का है. मेरा दावा है कि सिर्फ मेरा परिवार ही नहीं,बल्कि हर परिवार इस फिल्म को देखकर इंज्वाय करेगा.इस फिल्म में परिवार है और हमने संस्कार पर ही खेला है. यह कहना गलत होगा कि हम पार्न फिल्मों की तरफ बढ़ रहे हैं.’’ 

सोशल मीडिया को भविष्य बताते हुए आफताब कहते हैं- ‘‘मैं सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय हूं. यही हमारा भविष्य है. इसका पहुंच बहुत है, फिर चाहे आप इसे इंस्टाग्राम कहें या ट्वीटर कहें या फेसबुक या व्हाटसअप कहें. अब सब फोन पर चर्चा कर रहे हैं. मैं धार्मिक इंसान हूं. मैं तो कभी कभी बुद्धिजम पर ट्वीट करता हूं. सोशल मुद्दों पर ट्वीट नहीं करता. हमारा देश सामाजिक मुद्दो को लेकर कुछ ज्यादा ही संजीदा है. मैं ऐसी चीजों से दूर रहता हूं. इसके मायने यह नहीं हैं कि किसी मुद्दे को लेकर मेरी अपनी कोई राय नहीं है. मेरी अपनी राय है, लेकिन उसे सही जगह और सही समय पर ही व्यक्त करता हूं. सोशल मीडिया खुला मैदान है. कोई सेंसरशिप नहीं है. कोई कुछ भी किसी के बारे में भी लिख सकता है. यह स्वतंत्र माध्यम है, जिसके अपने फायदे और अपने नुकसान हैं.’’