‘स्टूडैंट औफ द ईअर’ से कैरियर की शुरुआत कर वरुण धवन वही लवर बौय और मस्तमौला युवक के किरदार निभाते हुए नजर आते रहे पर फिल्म बदलापुर से उन्होंने हवा के विपरीत दिशा में बहने का निर्णय लेते हुए अपनी अब तक की इमेज के ठीक उलट किरदार निभा कर हर किसी को आश्चर्य में डालने के साथसाथ सफलता भी पा ली है. एक तरफ फिल्म बदलापुर को बौक्स औफिस पर अच्छी सफलता मिली तो दूसरी तरफ उन के संजीदा अभिनय को पसंद किया भी गया. पेश हैं उन से हुई बातचीत के मुख्य अंश :

आप ने ‘बदलापुर’ में अभिनय करना स्वीकार किया था तो आप के दिमाग में क्या था?

मैं हवा के विपरीत दिशा में बहना चाहता था. मगर मैं नैगेटिव किरदार नहीं निभाना चाहता था. बदलापुर में रघु का किरदार निभाते समय मैं ने इस बात का खयाल रखा कि वह कहीं से भी नैगेटिव न होने पाए.

‘बदलापुर’ में अभिनय करना आप के लिए रिस्क नहीं था?

कलाकार के लिए हर फिल्म रिस्क होती है क्योंकि किसी भी फिल्म की सफलता के दावे पहले से नहीं किए जा सकते. जब मैं मसाला फिल्म मैं तेरा हीरो और नए निर्देशक शशांक खेतान के साथ ‘हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया’ कर रहा था, तो लोगों ने कहा था कि मैं रिस्क उठा रहा हूं. मुझे इस तरह की फिल्में नहीं करनी चाहिए. पर मुझे उस फिल्म में भी लोगों ने पसंद किया था. इस के बाद जब मैं ‘बदलापुर’ कर रहा था तो कई लोगों ने मुझे सलाह दी कि यह फिल्म नहीं करनी चाहिए. लोगों की राय में श्रीराम राघवन असफल निर्देशक हैं. लेकिन मुझे अच्छी फिल्म करनी थी और मेरे अंतर्मन ने कहा कि ‘बदलापुर’ एक अच्छी फिल्म बन सकती है. इसलिए मैं ने यह फिल्म की.

मेरी जिंदगी का यह सब से बड़ा और सुखद पल है कि बदलापुर में अभिनय करने की वजह से मुझे सराहा जा रहा है. इस से मेरी इस सोच को बल मिला है कि आज का युवक इस तरह की फिल्में भी देखना चाहता है. दर्शक अब सिर्फ टिपिकल फिल्मी हीरो को नहीं देखना चाहते.

इस फिल्म में यामी गौतम, दिव्या दत्ता और हुमा कुरैशी जैसी 3 अभिनेत्रियों के साथ आप के इंटीमेट सीन हैं?

इन तीनों के साथ मेरा रोमांटिक एंगल है. इन के साथ थोड़े अलग रिश्ते हैं. लिहाजा किसिंग और इंटीमेट सीन भी हैं. हर इंसान अलग होता है, इसलिए सीन करने में भी अलग तरह के अनुभव रहे. मुझे दिव्या दत्ता जैसी वरिष्ठ और मंझी हुई कलाकार के साथ इस तरह के सीन करने में कोई दिक्कत नहीं हुई. कैमरे के सामने मैं सिर्फ एक किरदार निभाता हूं न कि वरुण होता हूं. हम दोनों कलाकार उस वक्त सीन में थे. सीन की जो जरूरत थी वह हम ने किया. उन के साथ काम कर के मैं ने बहुत एंजौय किया.

अब आप की लवर बौय और मस्तीखोर लड़के की इमेज बदलेगी?

बिलकुल नहीं. मैं अपनी इमेज बदलना नहीं चाहता. बदलापुर के बाद अब मैं फिर से उसी तरह की कौमेडी फिल्में करने वाला हूं. मैं ने इमेज बदलने के लिए बदलापुर में अभिनय नहीं किया. मैं चाहता हूं कि फिल्मकार मुझे कलाकार के तौर पर गंभीरता से लेना शुरू करें. सुना है कि फिल्म की शूटिंग खत्म होने के बाद रघु के चरित्र का असर आप की जिंदगी पर काफी समय तक बना रहा? यह सच है. रघु का किरदार बहुत संजीदा किरदार रहा. मैं इस किरदार को छोड़ नहीं पा रहा था. जिस माहौल में हम ने शूटिंग की वह माहौल मैं भूल नहीं पा रहा था. रघु का किरदार निभाते हुए मैं काफी गंभीर रहने लगा था. मेरा गुस्सा मेरी आंखों से झलकता था. ये सब शूटिंग खत्म होने के बाद भी काफी दिनों तक मेरे साथ चस्पां रहा. अब मैं कुछ कौमेडी फिल्मों में काम करना चाहूंगा.

जिस किरदार को आप निभाते हैं वह आप की निजी जिंदगी पर असर करता है?

हर फिल्म के किरदार के साथ नहीं होता है, मगर बदलापुर के साथ हुआ.

तो क्या अब आप बदलापुर जैसी संजीदा फिल्म नहीं करना चाहेंगे?

करूंगा, मगर कुछ अंतराल के बाद. इस तरह की फिल्में बारबार नहीं की जा सकतीं. इस फिल्म में अभिनय करते समय कलाकार के तौर पर मैं पूरा निचुड़ गया. मैं ने इस तरह का काम पहली बार किया इसलिए मुझे ज्यादा कठिन लगा. कौमेडी करना आसान नहीं होता है. बदलापुर करने के बाद मुझे लगा कि वास्तव में मैं ने कुछ काम किया है.

क्या आप निजी जिंदगी में भी बदला लेने वाले इंसान हैं?

फिल्म में रघु है. पर मैं निजी जिंदगी में ऐसा बिलकुल नहीं हूं.

बदलापुर में रघु के साथ जो कुछ होता है यदि वैसा किसी आम इंसान के साथ हो तो उसे क्या करना चाहिए?

मैं कभी नहीं चाहूंगा कि ऐसा किसी आम इंसान के साथ हो. पर यदि ऐसा हो जाए तो किसी को भी कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए.

आप अपने समकालीन कलाकारों के साथ किस तरह की प्रतिस्पर्धा महसूस करते हैं?

मैं दूसरों के काम पर नजर नहीं रखता. मैं सिर्फ अपने काम पर गौर करता हूं क्योंकि मेरी प्रतिस्पर्धा मेरे साथ है. मैं फिल्म दर फिल्म अपनी अभिनय क्षमता को निखारना चाहता हूं. मैं लगातार काम कर रहा हूं. इस साल मेरी कम से कम 3 फिल्में रिलीज होंगी. इस से ज्यादा मुझे क्या चाहिए.

आप ने पिछले दिनों कहीं कहा था कि आप के लिए अभिनय सैक्स जैसा है. इस के क्या माने हैं?

इस तरह की बात कहने के पीछे मेरी मंशा यह थी कि ऐक्ंटग करते हुए मुझे जिस तरह की खुशी मिलती है, जिस तरह का पावर मिलती है, वह वैसी ही होती है जैसी कि लोगों को सैक्स कर के मिलती है. ऐक्ंटग करते हुए मुझे बहुत एनर्जी मिलती है. मुझे लगता है कि ऐक्ंटग करना मेरे जीवन की सब से बड़ी खुशी है.

जब आप अपने पिता यानी कि डेविड धवन के निर्देशन में फिल्म करते हैं. उस वक्त रोमांटिक सीन करना आप के लिए कितना सहज होता है?

सच कहूं तो जब मैं उन के निर्देशन में ‘मैं तेरा हीरो’ कर रहा था तब थोड़ी सी हिचक थी. पर फिर मैं ने सोचा कि मैं इस फिल्म में जो कुछ कर रहा हूं वह मैं नहीं बल्कि शीनू कर रहा है तथा मेरे सामने मेरे पिता डेविड धवन नहीं, बल्कि 40 फिल्में निर्देशित कर चुके सफल निर्देशक डेविड धवन हैं. इतना ही नहीं, सैट पर मैं ने कभी भी अपने पिता को पिता नहीं कहा, हमेशा सर कहा. सैट पर हमारे बीच एक कलाकार और एक निर्देशक का ही रिश्ता होता था.

आप फेसबुक व ट्विटर पर कितने व्यस्त हैं?

मैं फेसबुक पर नहीं हूं, सिर्फ ट्विटर पर हूं. वहां मैं अपने मन की बातें लिखता हूं.

ट्विटर पर तो लोगों को गालियां भी मिल रही हैं?

देखिए, यह सोशल मीडिया है. यहां पर हर इंसान को अपनी बात कहने का हक है. ट्विटर अच्छा भी है और बुरा भी है. कलाकार के तौर पर आप को सोचना है कि आप इस मीडियम में कितना व्यस्त रहते हैं, क्या लिखना चाहते हैं.

कौनकौन सी फिल्में कर रहे हैं?

‘एबीसीडी 2’, अपने भाई की फिल्म ‘ढिशुम’ और धर्मा प्रोडक्शन की नई फिल्म कर रहा