सरिता विशेष

विरासत में मिली शास्त्रीय गायकी छोड़ कर छोटे परदे का रुख करने वाली सुगंधा मिश्रा की पहचान एक कौमेडियन की ही है. जालंधर, पंजाब के एक मध्यवर्गीय परिवार की सुगंधा की इच्छा गायिका बनने की थी, लेकिन जब उसे लाफ्टर चैलेंज शो में मौका मिला तो हंसाना न केवल उन की पहचान बल्कि पेशा बन कर रह गया.

28 वर्षीय सुगंधा बेहद खूबसूरत और स्टाइलिश हैं और छोटे परदे की कौमेडियन टीम का अहम हिस्सा भी. एक टीवी शो ‘द वाइस औफ इंडिया’ के प्रमोशन के लिए वे भोपाल आईं तो लंबी बातचीत में उन्होंने स्वीकारा कि कौमेडी, गायकी के मुकाबले ज्यादा कठिन काम है. इस में चुनौतियां बहुत हैं खासतौर से युवतियों के लिए जिन्हें अपना हर ऐक्ट संभल कर करना होता है.

आज के मशहूर कौमेडियन कपिल शर्मा, सुदेश लहरी और भारती सिंह के साथ एक ही यूनिवर्सिटी में पढ़ीं सुगंधा होनहार और प्रतिभाशाली भी हैं. वे बताती हैं, ‘‘मैं कोई 10 से 5 बजे की नौकरी नहीं करना चाहती थी. मेरे परिवार में सभी शिक्षक हैं, घर वालों को मुझ से भी यही अपेक्षा थी कि मैं स्नातकोत्तर करने के बाद किसी कालेज में नौकरी कर लूं पर मैं काफी कुछ हासिल करना चाहती थी, इसलिए हर क्षेत्र में काम करती हूं. मैं पीएचडी भी कर रही हूं लेकिन अब इंडस्ट्री कभी नहीं छोडूंगी.’’

गायकी और कौमेडी की तुलना करते हुए वे कहती हैं कि वे एक प्रशिक्षित गायिका हैं. इस के लिए दादाजी रोज रिहर्सल कराते थे. एक गाना तो रोज गाया जा सकता है लेकिन कौमेडी में रोज कुछ नया लाना होता है.

बिग एफएम रेडियो पर बतौर आरजे अपनी महत्त्वाकांक्षाओं को आकार देने वाली सुगंधा के लिए सबकुछ उम्मीद के मुताबिक नहीं था, न ही बैठेबैठाए मिल गया, जो भी है उसे हासिल करने हेतु उन्होंने काफी मेहनत की है.

स्कूल टाइम से ही मिमिक्री करने वाली सुगंधा कहती हैं कि युवक किसी भी तरह की कौमेडी कर लें, चलता है पर युवतियों को साफसुथरी कौमेडी करते हुए ही दर्शकों के दिल में अपनी जगह बनानी पड़ती है, जो बेहद मुश्किल काम है. ऐसा कई बार उन के साथ भी हुआ कि कमैंट्स आए और सीटियां भी बजीं लेकिन वे मानती हैं कि इन चीजों को नजरअंदाज कर अपने काम पर ध्यान देने के बाद ही आगे बढ़ा जा सकता है.

छोटे परदे के अनुभव कैसे रहे? इस सवाल के जवाब में सुगंधा बताती हैं, ‘‘कमोबेश ठीक ही रहे. कुछ समय पहले शाहरुख खान ने कौमेडी शो में मेरा ही मजाक बनाया तो मैं स्टेज पर ही रोने लगी.’’

दूसरा अनुभव तो वे उत्साहपूर्वक बताती हैं कि जब उन्होंने एक शो में लता मंगेशकर की आवाज की नकल उतारी तो कई नामी कलाकारों ने उन की आलोचना की पर जब खुद लताजी ने तारीफ की तो जान में जान आई. सुगंधा का इरादा उन्हें अपमानित करने का नहीं था.

कपिल शर्मा को सुगंधा भाई मानती हैं. बीते दिनों एक शो के दौरान उन की टीम के साथ विदेश जाना हुआ तो उन्होंने उन्हें खूब खरीदारी कराई. सुगंधा बताती हैं, ‘‘मैं अपने काम को खूब ऐंजौय करती हूं.’’

भविष्य के लिए क्या योजना है, पूछने पर वे बताती हैं, ‘‘मैं ऐक्टिंग तो कर ही रही हूं पर गाते भी रहना चाहती हूं और एक संगीत स्कूल खोलना चाहती हूं, कभी अपने दादा से छिप कर रेडियो पर शो देने जाती थी और अब मेरा इरादा उभरती प्रतिभाओं को मंच और मौका देने का है.’’