सरिता विशेष

संगीत के रियालिटी शो से निकली प्रतिभाएं कुछ बन नहीं पाती हैं. जिनकी वजह से धीरे धीरे यह चर्चा भी होने लगी है कि रियालिटी शो की वजह से कई बच्चे अपनी प्रतिभा का सदुपयोग करने की बजाय भटक रहे हैं. मगर जो लोग रियालिटी शो के पक्ष में हैं, उनके लिए गायक व संगीतकार संदीप बत्रा बहुत बड़ा उदाहरण बन गए हैं. संदीप बत्रा के बतौर गायक कुछ अलबम बाजार में आ चुके हैं, तो वहीं वह कुछ फिल्मों के लिए आवाज दे चुके हैं. संदीप बत्रा भी टीवी के संगीत प्रधान रियालिटी शो ‘‘फेम गुरुकुल’’ की पैदाइश हैं. जबकि वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके हैं. संदीप का मानना है कि हर बच्चा टीवी के रियालिटी शो का हिस्सा होते हुए भी अपनी पढ़ाई पर भी ध्यान दे सकता है. पर इसके लिए उसके माता पिता को भी इस बारे में सोचना चाहिए.

हाल ही में जब संदीप बत्रा से हमारी मुलाकात हुई, तो हमने उनसे पहला सवाल यही किया कि रियालिटी शो से निकलने वाली बहुत कम प्रतिभाएं ही सफलता पा सकी हैं. आपकी सफलता का राज क्या है? इस पर ‘‘सरिता’’ पत्रिका से बात करते हुए संदीप बत्रा ने कहा-‘‘मेरे पास बहुत ज्यादा अनुभव नहीं है. मगर मैंने अपने माता पिता व गुरुजनों से जो कुछ सीखा व समझा है, उसके आधार पर यह कह सकता हूं कि इसमें रियालिटी शो से जुड़ने वाले बच्चों के साथ साथ उनके माता पिता की भी कुछ गलती रहती है. यह सभी रियालिटी शो से जुड़कर शोहरत पाते ही हवा में उड़ने लगते हैं और उन्हें लगता है कि अब सब कुछ आसान हो गया और वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना बंद कर देते हैं. जबकि रियालिटी शो के बंद होने के बाद उस शो से जुड़ी प्रतिभाओं का असली संघर्ष शुरू होता है. जहां तक मेरा सवाल है, तो मेरे माता पिता ने मुझ पर यह दबाव बनाकर खा कि पहले मुझे अपनी पढ़ाई पूरी करनी चाहिए.’

संदीप बत्रा आगे कहते हैं- ‘‘देखिए, मुझे तो संगीत का माहौल विरासत में मिला है. मेरी मां स्वयं अच्छी गायक हैं. मैने छह वर्ष की उम्र से गायन शुरू किया था. मैंने स्कूल व कालेज मे संगीत प्रतियोगिताओ में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया. मगर मेरी मां मुझसे पढ़ाई भी करवाती थी. आज मैं पेशे से साफ्टवेअर इंजीनियर हूं. मैंने दिल्ली में रहते हुए पं.बलदेव राज शर्मा से संगीत का प्रशिक्षण भी लिया. पर 2005 में सोनी टीवी के रियालिटी शो ‘फेम गुरुकुल’ से लोगों ने मेरी प्रतिभा के बारे में जाना. इस शो के जज जावेद अख्तर, शंकर महादेवन और गायक के के से मुझे संगीत की बारीकियां सीखने का सुनहरा अवसर मिला. साथ में शोहरत भी मिली. पर मेरे माता पिता ने हमेशा मुझे याद दिलाया कि रियालिटी शो की यह शोहरत अस्थायी है. इससे आप सफल हो गए, ऐसा न समझो. इसलिए मैं कठिन मेहनत करता रहा. एक तरफ पढ़ाई, दूसरी तरफ संगीत का रियाज जारी रखा.’’

तो फिर संगीत के क्षेत्र में प्रोफेशनल स्तर पर कब शुरुआत हुई और क्या क्या किया? इस सवाल पर संदीप बत्रा ने कहा-‘‘मेरी मेहनत का परिणाम यह रहा कि 2008 में मेरा पहला संगीत अलबम ‘‘कारी कजरी’’ बाजार में आया. उसके बाद ‘दीपावली आई रे’ व ‘यारियां’ अलबम आए. इसी दौरान मेरी मुलाकात संगीतकार मोंटी शर्मा से हो गयी. उनके साथ मैंने संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘‘रामलीलाःगोलियों की रासलीला’’ तथा विभु पुरी की फिल्म ‘‘हवाईजादा’’ की. वास्तव में इन दोनों फिल्मों का पार्श्वसंगीत मोंटी शर्मा ने किया है. तो जहां जहां गायकी की जरुरत पड़ी, उन्होंने मुझसे गवाया. मैंने कई टीवी विज्ञापनो के लिए जिंगल्स गाए हैं.’’

अब क्या कर रहे हैं? इस सवाल पर संदीप बत्रा ने कहा-‘‘मोंटी शर्मा के ही निर्देशन में मैंने योगेश पगारे की 14 अक्टूबर को प्रदर्शित होने वाली फिल्म ‘एक था हीरो’ में दो गाने गाए हैं. इस फिल्म का एक गीत ‘साइकल मेरी..’ मैंने अर्पिता मुखर्जी के साथ गया है, जो कि इन दिनों काफी पसंद किया जा रहा है. तथा इसी फिल्म के एक गीत  ‘आतिश है तू’ को संगीत से संवारा और इस गीत को दिव्या कुमार के साथ गाया है. यह गीत भी काफी लोकप्रिय हो चुका है.’’

गायन के साथ साथ संगीत निर्देशन..? इस पर संदीप बत्रा ने कहा-‘‘मैं तो बचपन से ही गीत लिखने के अलावा उसे संगीत से संवारने व गाने का शौकीन रहा हूं. पर मैं अपनी पहली पहचान गायक के तौर पर ही बनाना चाहा. अब जब गायक के तौर पर पहचान बन गयी है, तो योगेश पगारे ने एक गाने को संगीत निर्देशन से संवारने का जिम्मा दिया, तो इस काम को भी अंजाम दिया. मुझे खुशी है कि मेरे इस काम को पसंद किया जा रहा है.’’