बिंदास, बेबाक और ग्लैमरस जीवनशैली में रमी डौली पार्टन आज ग्रैमी अवार्ड विनर गायिका हैं. लेकिन उन के इस मुकाम तक पहुंचने की दास्तां बेहद अजीबोगरीब और रोचक किस्सों से भरी पड़ी है. मेकअप स्टाइल, टैटू और विग ने उन्हें कैसे मशहूर कर दिया, बता रही हैं रजनी माथुर.

वह शाम बहुत खुशनुमा थी. मशहूर कौमेडियन जैनिफर सौन्डर्स और फनी कलाकार रोजेनी बार अमेरिका के एक रेस्तरां में बैठी थीं. तभी वहां एक बेहद आकर्षक महिला ने प्रवेश किया. अब तीनों दोस्तों के बीच चर्चा का विषय था शरीर पर टैटू बनवाना. सब से बाद में आने वाली सुप्रसिद्ध गायिका व अभिनेत्री डौली पार्टन ने अपनी ड्रैस के टौप की जिप खोली और वक्षस्थल पर बने टैटू दिखाए जो खूबसूरत तितलियों के थे. उन सुंदर टैटू को देख कर सौन्डर्स व रोजेनी न सिर्फ चौंकी बल्कि प्रभावित भी हुईं.

अमेरिकी रेस्तरां का यह दृश्य अलगअलग टौक शो में चर्चा का विषय बना रहा. अब इस घटना में हकीकत कितनी है, यह बात अलग है पर है मजेदार और दिलचस्प.

डौली पार्टन अमेरिका की मशहूर गायिका, अभिनेत्री और लेखिका हैं. अपनी बिंदास जीवनशैली के लिए मशहूर डौली आज भले ही 67 वसंत पार कर चुकी हैं लेकिन उन के मेकअप का स्टाइल, अनगिनत विग उन्हें जैसे जवानी की दहलीज पर ला कर खड़ा कर देते हैं, वे वाकई में बिंदास हैं.

बचपन के दिन : डौली पार्टन का बचपन बहुत ही गरीबी के दौर से गुजरा. उन का जन्म अमेरिका के छोटे शहर लोकस्ट रिज टैनेसी में हुआ था. 12 भाईबहनों के विशाल परिवार में छोटा सा घर था. घर में एक ही बैड था. छोटी सी जगह में सब मिलबांट कर सो लेते थे. दीवारों पर वालपेपर भी पुराने हो चले थे. जहां से फट गए थे वहां पुराने अखबार  चिपका दिए गए थे. घर में बेशक गरीबी का आलम था पर डौली पार्टन ने बहुत ऊंचे सपने देखे थे. सब भाईबहन घर में रह लेते थे पर पैसे की तंगी ने डौली को काफी तंग किया. उन्हें सजनेसंवरने का बहुत शौक था पर उसे पूरा कैसे करें, लिहाजा उन के दिमाग में गजब का आइडिया आया.

विचित्र मेकअप : आंखों के मेकअप के लिए उन्होंने बहुत सोचा और फिर ढेर सारी माचिस की तीलियां जमा कीं. उन्हें जला कर उन का काला रंग इकट्ठा किया. इस चक्कर में कई बार उन के हाथ भी जल गए. उस कालिख को जमा कर के उन्होंने आईशैडो व आईलाइनर की तरह इस्तेमाल किया. यह सिलसिला चलता रहा. चूंकि चेहरे के निशानों को छिपाने के लिए पाउडर के पैसे न थे, लिहाजा चुपचाप सूखा आटा भी कई बार मल लेती थीं. कभी वह चिपक गया तो मुंह धो डालती थीं.

लिपस्टिक के लिए लाल बैरीज का प्रयोग करती थीं. वैसे यह थोड़ी जहरीली होती है पर मुंह के अंदर तो कभी गई नहीं. डौली को लगता था कि होंठ ही तो सब से सैक्सी पार्ट होता है, तो क्यों न लाल ही रंगा जाए जो सब से प्रभावशाली होता है. जब वे होंठों पर इसे लगा कर बाहर निकलतीं तो उन के पापा पूछते थे कि कौन सी लिपस्टिक लगाई है? वे कह देती थीं, ‘‘पापा, मेरे होंठ नैचुरली ऐसे ही तो हैं.’’

डौली अपने गाल भी लाल करना चाहती थीं. तभी उन के मन में विचार आया कि क्यों न पोक बैरीज का जूस गालों और होंठों पर लगाया जाए. पर यह जब धब्बेदार हो जाता था तो डौली को बहुत ही जोकराना लगता था. मरक्यूरोक्रोम से भी कई बार होंठ रंगे. जब कभी पोक बैरीज का जूस नहीं मिल पाता तो वे गालों पर जोरदार चिकोटी काट लेतीं जिस से गाल लाल हो जाया करते थे. इस तरीके में बेशक दर्द होता था पर उन्हें तो मेकअप की परवा थी.

डौली पार्टन के नाना, चर्च में उपदेशक थे, जहां मेकअप मना होता था. जब भी वहां जाना होता तब उन्हें मुश्किल होती. उन की एक ही चाह रहती थी कि कैसे वे मेकअप कर के बहुत सुंदर लगें. वे किसी चीज का इंतजार नहीं करतीं, जो करना है तुरंत करो. डौली आज कहती हैं कि मेकअप के लिए मैं ने इतनी तकलीफें उठाईं पर किसी ने उन्हें कभी भी खूबसूरत बच्ची नहीं कहा.

बचपन में डौली टौम बौय बन कर रहती थीं. उन्हें जब औरत बनने का एहसास हुआ तो लगता था हर चीज खुद में समेट लूं. उन की आंटी घर में आतीं तो उन का पर्स पाउडर, लिपस्टिक व आईलाइनर से भरा होता था. डौली उन को देख कर दंग रह जातीं और जब कभी उन्हें प्रयोग करने को मौका मिलता तो उन्हें लगता मानो खजाना ही मिल गया हो.

गरीबी के दिन यों ही बीतते गए. फिर हाईस्कूल पास करने के बाद वे संगीत की तरफ बढ़ने लगीं और नैशविले आ गईं. यहां संगीत से जुड़ गईं, बाद में तरक्की के द्वार खुलते गए और वे एक नामीगिरामी गायिका बन गईं. आलम यह था कि संगीत के क्षेत्र में उन्हें कई पुरस्कार जैसे कंट्री अवार्ड से नवाजा गया. और तो और, ‘ग्रैमी अवार्ड’ भी दिया गया.

विश्वव्यापी प्रसिद्धि अब उन के खाते में जमा हो गई. उन के चर्चे हर तरफ हुए. 1985 में उन्होंने ‘डौलीवुड थीम पार्क’ की स्थापना की और 2000 में ‘कंट्री म्यूजिक हौल औफ फेम’ में शामिल हो गईं. महज 12 साल की उम्र में वे स्थानीय रेडियो पर गाना गाने लगी थीं. स्नातक के बाद नैशविले में पोर्टर वैगनर के साथ टीवी शो में पार्टनर भी बनीं.

गायिका बनने के बाद उन के ढेर सारे अलबम निकले जिन में ‘डौली पैट्स ग्रेटैस्ट हिट्स’, ‘लिटिल स्पैरो मोर’, ‘बैकवुड्स बार्बी’ वगैरा खासे चर्चित हुए. उन्होंने एक संस्था भी खोली जिस में बच्चों के पैदा होने से बड़े होने तक शिक्षा प्रदान की जाती है. 

उन के गानों में खास हैं, ‘आई विल आल्वेज लव यू’ (1974), ‘आईलैंड इन दि स्ट्रीम’ (1982) और ‘हार्ड कैंडी क्रिसमस’ (1983).

विग और भारी मेकअप

डौली ने अब तक न जाने कितने विग लगाए हैं. भारी मेकअप के साथ विग उन पर बेहद दिलकश लगते हैं. विग के साथ एक बार मजेदार वाकेआ हुआ. डौली अपनी दोस्त के साथ जा रही थीं. वे साइकिल पर थीं. विग को ज्यादा टाइट नहीं किया था. यों ही मस्ती में जा रही थीं, तभी पेड़ की एक नीची टहनी से उन की विग टकराई और टहनी में ही अटक गई. वे काफी गंजी नजर आईं, फिर जल्दी से उसे उतारा और फिक्स किया.

डौली पार्टन हैवी मेकअप करती हैं और रात को भी मेकअप कर के सोती हैं. कहीं देर रात को जागीं तब भी मेकअप तो होना चाहिए. उन की कोई भी फोटो मेकअप के बिना नहीं मिल सकती. अपनी टूर बस में ट्रिप के दौरान भी वे मेकअप टिप देती रहती हैं. गहरे मेकअप की वे शौकीन हैं. वे आईलिड पर गोल्डन रंग का शैडो बहुत ही गहराई से लगाती हैं और नीचे, आधी आंख पर गोल्डन आईलाइनर लगाती हैं.

कहा जाता है कि वे मेकअप में सोती हैं, मेकअप में जागती हैं. बिना मेकअप के सिर्फ बाथटब में होती हैं. उम्र के इस पड़ाव पर भी वे कमसिन नजर आती हैं. यह सब कमाल उन के बेमिसाल हुस्न और अदाओं का है, आज भी वे सारे शरीर पर टैटू बनवाने का दमखम रखती हैं.