प्रियंका चोपड़ा ने बौलीवुड में बतौर अभिनेत्री बेहद औसत शुरुआत की थी. उन्हें देख कर कोई नहीं कहता था कि यह सितारा एक दिन हौलीवुड में भी अपनी कामयाबी के झंडे गाड़ देगा. बीते दिनों प्रियंका ने अपने अमेरिकी टीवी शो ‘क्वांटिको’ के लिए बैस्ट एक्ट्रैस का ‘पीपुल्स चौइस’ अवार्ड जीत कर इतिहास रच दिया. वे पहली भारतीय अभिनेत्री हैं जिन्होंने इस अंतर्राष्ट्रीय खिताब को अपने नाम किया है.

बीता साल प्रियंका के लिए कई माने में खास रहा. पहले तो फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ की कामयाबी, फिर अमेरिकी शो में मिली शोहरत और हालिया रिलीज ‘जय गंगाजल’ का ट्रेलर. प्रकाश झा की फिल्म ‘गंगाजल’ के इस सीक्वल में प्रियंका खाकी वरदी में दबंगई करेंगी तो वहीं क्वांटिको के अगले सीजन की भी तैयारियां उन के ‘सितारा’ कद को ऊंचा करने का काम कर रही हैं. करीब 50 फिल्मों में अलगअलग भूमिका निभा कर अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा देश में ही नहीं, विदेशों में भी काफी पौपुलर हो चुकी हैं. वे बौलीवुड की सब से अधिक फीस पाने वाली अभिनेत्रियों में से एक हैं. फिल्मी बैकग्राउंड से न होने के बावजूद उन्होंने अपनेआप को हर चरित्र में सिद्ध किया, अपनी अलग पहचान बनाई. यह काम आसान नहीं था. जब उन्होंने फिल्मी क्षेत्र में कदम रखा तो लोगों ने उन्हें कई तरह से निराश किया, पर वे डटी रहीं और कामयाब हुईं.

सफलता के इस मुकाम पर पहुंच कर प्रियंका कहती हैं, ‘‘मैं बहुत खुश हूं कि मेरा काम सब को पसंद आया. काशीबाई का चरित्र मेरे लिए आसान नहीं था. इतने कम संवाद में भूमिका निभाना कठिन था. यह चरित्र मेरे लिए चुनौती था.

‘‘मेरा कैरियर ही मेरी ‘ग्रोथ’ है. मुझे हर बार हर चरित्र से डर लगता है. विदेश में मैं जब ‘क्वांटिको’ कर रही थी तो मेरे पसीने छूट रहे थे. क्योंकि मैं अमेरिकन नहीं, फिर भी उन्हें विश्वास दिलाना था कि मैं अमेरिकन हूं, जो मुझे अभिनय के द्वारा करना था. मैं ने वहां का संवाद बोलने का तरीका सीखा, आज 120 जगहों पर क्वांटिको प्रसारित किया जा रहा है. मेरा नाम ‘बैस्ट एक्ट्रैस’ के लिए वहां नौमिनेट हुआ और अवार्ड भी मिला.’’

काशीबाई के किरदार को ले कर प्रशंसित हो रही प्रियंका इस किरदार की तैयारी को ले कर बताती हैं, ‘‘महाराष्ट्र में रहने के बाद मैं इस चरित्र को करने को काफी उत्सुक थी. मेरी पूरी टीम इस के पीछे थी. मुझे साड़ी पहनने में 2 घंटे का समय लगता था. उस जमाने में ‘रौयल्टी’ का पैमाना अलग होता था. राजा रवि वर्मा की पेंटिंग ही हमारी प्रेरणा थी. मैं एक पेशविन की भूमिका निभा रही थी, ऐसे में हेयर और मेकअप पर अधिक ध्यान देना था. मेरे बालों में एक भी इलैक्ट्रौनिक वस्तु का प्रयोग नहीं किया गया. मेरी हेयरड्रैसर हाथ से ‘कर्ल’ बनाती थी जिसे बनाने में डेढ़ घंटा लगता था ताकि विश्वसनीय लगे. बिंदी मेरे मेकअप आर्टिस्ट सिंदूर से रोज पेंट करते थे, क्योंकि बिंदी चिपका नहीं सकते थे.

‘‘मैं एक कलाकार हूं. हर चरित्र को निर्देशक के अनुसार निभाना मेरा काम है. फिल्म सफल होती है तो लगता है कि मैं उस चरित्र में उतर पाई. बर्फी, मैरी कौम, फैशन, बाजीराव मस्तानी-ये मेरे जीवन की माइलस्टोन फिल्में हैं.’’

‘मिस वर्ल्ड’ से यहां तक के सफर को ले कर प्रियंका का मानना है, ‘‘यहां तक पहुंचना मेरे लिए गर्व की बात है. 17-18 साल पहले जब मैं ने अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा तो पता नहीं था कि मैं कौन हूं, कैसे कपड़े पहनने हैं, कैसे बात करनी है, 6 से 7 साल लगे मुझे ये सब समझने में. समझ में आ गया है कि आप सब को खुश नहीं कर सकते. सब में कुछ न कुछ कमी है. उसी पर काम किया. मुझे याद है जब मैं इंडस्ट्री में आई थी, लोग मुझे काली और सांवली कहते थे. मैं ने अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बनाया. मेहनत से काम किया. इतना बेहतर कि कोई मना ही न कर सके.’’

समाज को ले कर आप क्या बदलाव चाहती हैं, इस विषय पर उन का कहना है, ‘‘हमारे देश में 60 प्रतिशत युवा ऐसे हैं जिन्हें नौकरी नहीं मिलती. उन के लिए नौकरी की व्यवस्था और महिलाओं के लिए पूरी शिक्षा, ताकि वे अपने परिवार व समाज की सोच को बदल सकें.’’

फिलहाल कैरियर के लिहाज से वे स्वीकार करती हैं, ‘‘मेरे पास 6-7 फिल्मों की चौइस है जिन में से केवल 2 फिल्में करने का समय है, क्वांटिको की शूटिंग करनी है. सिंगिंग का काम थोड़ाथोड़ा कर रही हूं. कुछ रीजनल फिल्म बनाने की योजना है. हौलीवुड की फिल्में मैं तब कर पाऊंगी जब वे मेरे अनुसार होंगी और उन के लिए मेरे पास वक्त होगा.’’

हालांकि इस से इनकार नहीं किया जा सकता कि मैरी कौम, एतराज और बाजीराव मस्तानी जैसी चंद फिल्में छोड़ कर उन के द्वारा निभाए गए किरदार औसत ही रहे लेकिन मार्केटिंग में शाहरुख खान की तरह प्रियंका ने कैरियर को एक नई दिशा दी. फिलहाल प्रियंका साल में ज्यादातर वक्त अमेरिकी शो की शूटिंग और वहां की ग्लैमरस पार्टियों में बिताती हैं. अभी तो उन्हें काम मिल रहा है लेकिन हौलीवुड का रवैया एशियन कलाकारों के साथ कुछ खास नहीं रहा है. कबीर बेदी, सईद जाफरी से ले कर ओमपुरी व नसीरुद्दीन शाह जैसे नाम इस बात की तसदीक करते हैं. बहरहाल, प्रियंका इन दिनों अपने कैरियर को ले कर बेहद गंभीर हैं और यह जरूरी भी है.